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नारीशक्ति

नारीशक्ति से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

हस्ती ....जिसके कदम पर ज़माना पड़ा

कुर्सियां,मेज और मोटर साइकिल नजर आती हैं हर तरफ और चलती फिरती जिंदगी मात्र भागती हुई जमानत के लिए निषेधाज्ञा के लिए तारीख के लिए मतलब हक के लिए! ये आता यहां जिंदगी का सफर, है मंदिर ये कहता न्याय का हर कोई, मगर नारी कदमों को देख यहां लगाता है लांछन बढ हर कोई. है व


संभल जा रे नारी .....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपना नाम बताया ,अच्छा लगा ,कई वर्षों बाद अपनी सहपाठी से बात कर रही हूँ ,पर आश्चर्य हुआ कि आखिर उसे मेरा नंबर कैसे मिला ,क्योंकि आज जो फोन नंबर की स्थिति


....मरे जो शादियां करके .

दर्द गृहस्थी का ,बह रहा आँखों से छलके , ये उसके पल्लू बाँधा है ,उसी के अपनों ने बढ़के . ................................................................पिता के आदेशों को मान ,चली थी संग जिसके वो. उसी ने सड़कों पर डाला ,उसे बच्चे पैदा करके. ..................................


कानपुर की इस रिवॉल्वर रानी को आप 'हीरो' कहेंगे या 'विलेन' ?

आपने कुछ दिन पुराना वो किस्सा जरूर सुना होगा जब गूगल ने एक लड़की को आत्महत्या करने से बचा लिया। मामला यह था कि लड़की को उसके बॉयफ्रेंड ने रिलेशनशिप के कई सालों बाद शादी करने से मना कर दिया था। कारण वही पुराना घिसा-पिटा था, लड़के के मां-बाप इस रिश्ते के लिए कतई राजी नहीं थे। अपने सामने कोई रास्ता न देख


कोई इन मांओं की भी सुध ले लो...

न जाने कितनी ही लड़कियों की शादी उसके पंद्रहवें जन्मदिन से पहले कर दी जाती हैं. इनमें से कुछ लड़कियों की शादी तो आठ या नौ साल की उम्र में भी कर दी जाती है. अगर यही गति बनी रही तो 2011 से 2020 के बीच 14 करोड़ से ज्यादा लड़कियों की 18 से कम उम्र में शादी हो जाएगी. पुरानी


मासूम बच्चों से यौन अपराध -जिम्मेदारी आधुनिक नारीकी?

''आंधी ने तिनका तिनका नशेमन का कर दिया , पलभर में एक परिंदे की मेहनत बिखर गयी .'' फखरुल आलम का यह शेर उजागर कर गया मेरे मन में उन हालातों को जिनमे गलत कुछ भी हो जिम्मेदार नारी को ठहराया जाता है जिसका सम्पूर्ण जीवन अपने परिवार के लिए त्याग और समर्पण पर आधारित रहता है .


नारी क्यूं बनती है बेचारी

दुष्कर्म आज ही नहीं सदियों से नारी जीवन के लिए त्रासदी रहा है .कभी इक्का-दुक्का ही सुनाई पड़ने वाली ये घटनाएँ आज सूचना-संचार क्रांति के कारण एक सुनामी की तरह नज़र आ रही हैं और नारी जीवन पर बरपाये कहर का वास्तविक परिदृश्य दिखा रही हैं . भारतीय दंड सहिंता में दुष्कर्म ये है - भारतीय दंड संहिता १


ट्रिपल तलाक का एक और वाहियात कारण जान लीजिये , हँसी रोक नहीं पाएंगे

गाज़ियाबाद की एक मुस्लिम महिला आज इस बात के लिए अफ़सोस कर रही है, कि उसने अपने घर पर रखा नमकीन का पैकेट मायके वालों को क्यों दिया. ये नमकीन आज उसके तलाक का कारण बन चुकी है. बीते रविवार को उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री और सांसद अतुल गर्ग के जनता दरबार में एक ऐसा केस आया कि वो भी असहा


हाय रे औरतों की बीमारी

कवि शायर कह कह कर मर गए-''इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा,''''न कजरे की धार,न मोतियों के हार, न कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुन्दर हो,तुम कितनी सुन्दर हो.'' पर क्या करें आज की महिलाओं के दिमाग का जो बाहरी सुन्दरता को ही सबसे ज्


इंडियन एयरफोर्स: मैं एक लड़की हूं और मुझे पटाखों से डर नहीं लगता

जब भी महिलाओं के सामने करियर चुनने की बात आती है तो समाज उनके लिए कुछ काम तय कर देता है, जैसे टीचर बन जाओ फिर पूरी जिंदगी कोई दिक्कत नहीं होगी। कई ऐसे प्रोफेशन भी हैं जिसमें काम करने वाली महिलाओं का चरित्र निर्धारण लोग बहुत जल्दी कर देते हैं। मसलन फलां काम करने वाल


एक प्रश्न: आप की माता जी क्या करती है?

"भारतीय नारी" जिसे सम्पूर्ण विश्व प्रेम, स्नेह, त्याग ,तपस्या, वात्सल्य,संघर्ष, समझदारी, बुद्धिमत्ता और नेतृत्व कौशल की देवी के रूप में देखता है। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी समान माना गया है विभिन्न अवसरों पर उनकी पूजा होती है। वेदों में ये भी कहा गया है कि "यत्र


’डार्क एंड लवली’ महिलाओं ने अपने सांवले रंग के साथ तसवीरें की पोस्ट, 30000 लोग कर चुके हैं शेयर

काला रंग, गोरा रंग ये हमारे समाज का एक कड़वा सच है. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बदलते समय के साथ दुनिया ने बहुत तरक्की की है, लेकिन अफ़सोस की बात ये है, कि लोगों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है. ज़्यादातर लोगों के लिए सुंदरता का मतलब होता है गोरा होना.भारत में ब्यूटी प्रोडक्ट्स का कार


भाषण देने के मामले में मोदी से कम नहीं हैं, उनकी पत्नी जशोदाबेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी भाषण देते हैं तो श्रोता उनके साथ जुड़ जाते हैं। भले ही लोग उनसे सहमति रखते हों या न रखते हों लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं है कि उनकी भाषण शैली कुछ खास है। मौजूदा दौर में पक्ष-विपक्ष का शायद ही कोई ऐसा नेता होगा, जो यह दावा कर सके कि लोगों को अपनी भाषण शैली से बांधे


समीक्षा - '' ये तो मोहब्बत नहीं ''-समीक्षक शालिनी कौशिक

समीक्षा - '' ये तो मोहब्बत नहीं ''-समीक्षक शालिनी कौशिक उत्कर्ष प्रकाशन ,मेरठ द्वारा प्रकाशित डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन' का काव्य-संग्रह 'ये तो मोहब्बत नहीं ' स्त्री-जीवन के यथार्थ चित्र को प्रस्तुत करने वाला संग्रह है .आज भी हमारा समाज पितृ-सत्ता की ज़ंजीरों में ऐसा जकड़ा ह


बेटी की माँ

बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग जितने भी लोग बेटी के जन्म पर उपस्थित होते हैं सभी के चेहरे पर मुर्दनी सी ही छा जाती है.सबसे ज्यादा आश्


यहाँ महिलाओं की स्थिति को जानने के बाद, शायद आप ये नहीं कहेंगे कि ‘देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है’

मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है' ये तो आपने देखा और सुना ही होगा. इस स्लोगन से ये प्रतीत होता कि हमारे भारत की छवि बदल रही है और देश तरक्की की राह पर है. अच्छी बात है कि देश ख़ूब तरक्की करे और आगे बढ़े, इससे बढ़कर हम देशवासियों के लिए फ़र्क की बात और क्या हो सकती है.लेकिन इतनी तरक्की के बावजूद द


वह तो वर्किंग है, ऑफिस जाती है लेकिन तुम तो घर पे रहती हो

आपने भी शायद यह कई बार सुना होगा। लेकिन आज लता को जब यह सासूमाँ ने बोला तो वह भौचक रह गयी। उसकी आँखें डबडबा गई । पिछले १० साल मानो उसके नज़र के सामने से एक पल में निकल गया हो । जब नई नवेली दुल्हन बनकर उसने अपने पति के घर में पहला कदम रखा था। बस बीस साल की थी तो वह। कितनी गलतिया की थी उसने शुरू के


नारी शक्ति सिरमौर - कोई माने या न माने

''कुछ लोग वक़्त के सांचों में ढल जाते हैं ,कुछ लोग वक़्त के सांचों को ही बदल जाते हैं ,माना कि वक़्त माफ़ नहीं करता किसी कोपर क्या कर लोगे उनका जो वक़्त से आगे निकल जाते हैं .'' नारी शक्ति को लेकर ये पंक्तियाँ एकदम सटीक उतरती हैं क्योंकि न


मिलिए महिला कॉन्स्टेबल 'स्मिता' से जो बिना किसी लालच के जरूरतमंद लोगों की मदद कर रही है

बहुत अच्छा लगता है ये सुनकर कि कोई तो है जो जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए अपना समय देता है। उसे अपनी जरूरत समझता है। और ऐसा जब कोई महिला करती है तो बात कुछ और ही होती है। इन्हीं कुछ महिलाओं में से एक स्मिता हैं। स्मिता जरूरतमंद लोगों तक पहुंचती हैं और फेसबुक के ज़रिए उनकी मदद करती हैं। फेसबुक पर उनकी


शादीशुदा दासी नहीं

आज जैसे जैसे महिला सशक्तिकरण की मांग जोर पकड़ रही है वैसे ही एक धारणा और भी बलवती होती जा रही है वह यह कि विवाह करने से नारी गुलाम हो जाती है ,पति की दासी हो जाती है और इसका परिचायक है बहुत सी स्वावलंबी महिलाओं का विवाह से दूर रहना . यदि हम सशक्तिकरण की परिभाषा में जाते हैं तो यही पाते हैं कि ''स


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