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कहानी

कहानी से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

घमंडी सियार ---- ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

घमंडी सियार ओमप्रकाश क्षत्रिय"प्रकाश" काननवन में एक सियाररहता था. उस का नाम था सेमलू. वह अपने साथियों में सब से तेज व चालाकी से दौड़ताथा. कोई उस की बराबरी नहीं कर पाता था. इस कारण उसे घमंड हो गया था," मै सियारों में सब से तेज व होशियार सियार हूँ." उस ने


प्रणय पात्र

रोहित का मोबाईल फिर बजा. अब तक न जाने कितनी बार बज चुका था. इतनी बार बजने पर उसे लगा कि कोई तो किसी गंभीर परेशानी में होगा अन्यथा इतने बार फोन न करता. अनमना सा हारकर रोहित ने इस बार फोन उठा ही लिया. संबोधन किया हलो..उधर से आवाज आई...भाई साहब नमस्कार, गोपाल बोल रहा हूँ. बह


लड़का बिकाऊ है

लड़का अधिकारी था, मां-बाप के रंग-ढंग बदल गये थे ! शादी के लिये लड़के की बोलिया लगने लगी थी, जो 40 लाख देगा वो अपनी लड़की ब्याह सकता है, जो 60 लाख देगा लड़का उसके घर का दामाद बन जायेगा, जो 1 करोड देगा लड़का उनका ! समझ नहीं आता कि वो लड़का वाकई अधिकारी था या भिखारी,


एक रात की व्यथा कथा

एक रात की व्यथा - कथा बहुत मुश्किल से स्नेहा ने अपना तबादला हैदराबाद करवाया था चंडीगढ़ से. पति प्रीतम पहले से ही हैदराबाद में नियुक्त थे. प्रीतम खुश था कि अब स्नेहा और बेटी आशिया भी साथ रहने हैदराबाद आ रहे हैं. आशिया उनकी इकलौती व लाड़ली बेटी थी. इसलिए उसकी सुविधा का हर


मिट्टी के सपने.

सुबह के तकरीबन ६ बज रहे थे. मौसम में थोड़ी नमी थी और हवा भी हलके हलके बह रही थी. गाँव की एक छोटी सी झोपडी के एक कोने में मिट्टी के बिछोने पर शुभा दुनिया से बेख़बर मिट्टी के सपनों में खोई हुई थी. शुभा कहने क


हास्य कहानी

एक दिन एक कुत्ता जंगल में रास्ता भटक गया..तभी उसने देखा, एक शेर उसकी तरफ आ रहा है..।कुत्ते की सांस रूक गयी.."आज तो काम तमाम मेरा..!" उसने सोचा..Management ka lesson yaad aa gaya aurफिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ पड़ी देखि..वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा..और ज


बेटे की चाहत में,घर बर्बाद कब तक !

ये कैसी विडंबना है कि नारी का समाज में इतने योगदान के बाद भी वो सम्मान नहीं मिला, जितनी की वो हकदार है, इसके पीछे शायद नारी ही दोषी है, जब हम बेटी होते है तो अपने हक के लिए लड़ते है, शादी के बाद जब मां बनने वाले होते है तो ' बेटे की चाह ' रखते है, ऐसा क्यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


सदाफूली की साइकिल

माँ ने उसका नाम ही सदाफूली रख दिया था. 'सदाफूली ' महाराष्ट्र में 'सदाबहार' फूल को कहते हैं. गर्मी हो, सर्दी या कि बरसात, यह फूल सदाबहार है , फूलता ही रहता है. कई मर्ज़ों की दवा भी है यह! 'एंटीबायटिक' बनाने मैं भी प्रयोग की जाती है अर्थात स्वयं तो सदा खिली रहती ही है द


तुम्हारे बाद

खबर आयी कि 'बाबा' का अस्पताल में देहांत हो गया है | खबर ऐसी कि कानो को विश्वास न हो | पर सत्य सामने था, जिसपर अविश्वास नहीं किया जा सकता था | सभी लोग अस्पताल की तरफ भागे जहां 'बाबा' ने अंतिम साँसे ली थी | अस्पताल की साड़ी औपचारिकताएं ख़त्म कर रात बारह बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके घर लाया गया | कड़


मैं अमित और मंजय (यादें बचपन की)

चलो अब हम तो इतने बड़े हो गये है की बचपना भी अब अजीब सा लगता है । पर वो अजीब नही बचपन ही जिंदगी और जन्नत होती है बाद में तो सभी रेस में लग जाते है। जैसे हम तीनो अब जिंदगी की रेस में लगे हुए है। तीनो कितने मस्ती किया करते थे बचपन में शायद तुम


अलबेलिया

नई वाली हिन्दी में लिखी गई कहानियों का अलबेला संग्रह अलबेलिया grab your copy soon at bumper discount from Amazon http://www.amazon.in/Albeliya-Govind-Pandit/dp/9386027283/ref=sr_1_1?ie=UTF8&qid=1487911920&sr=8-1&keywords=albeliya


और तभी...

एक बार फिर उसने बाइक की किक पर ताकत आज़माई. लेकिन एक बार फिर बाइक ने स्टार्ट होने से मना कर दिया. चिपचिपी उमस तिस पर हेलमेट जिसे वो उतार भी नहीं सकता था. वो उस लम्हे को कोस रहा था जब इस मोहल्ले का रुख़ करने का ख़याल आया. यादें उमस मुक्त होतीं हैं और शायद इसलिए अच्छी भी लगती हैं. अक्सर ही आम ज़िंदगी हम


छोटा इश्क़ कथा- 1

ज़माना कहता है तुम्हारे जाने के बाद मेरा फ़िज़िक्स बदल गया है दाढ़ी थोड़ी बढ़ी सी रहती है और बाल बेतरतीब से। लेकिन ये उनकी गफ़लत है हक़ीक़त में मेरे शरीर की बायोलॉजी बदल गयी है।कोशिका के सेल वॉल पर तुम्हारी यादों की एक मोटी परत सी जम गयी है।जिस माइटोकोंड्रिया से एक वक़्त


अमैन वाला प्यार

मैं जब जाता हूँ हमारे अमैन(गाँव) में तो अजनबी सा महसूस करता हूँ।ऐसा नही है अमैन बदल गया है ये बिलकुल वैसे ही जैसा हमारे वक़्त में था।कुछ बदलाव होता रहता है हर जगह पर इतना भी यहाँ नही हुआ था कि मैं अजनबी सा महसूस करूँ।लेकिन तुम जबसे यहाँ से गयी हो सब अजीब सा लगता है इस अमै


अमैन वाला प्यार

मैं जब जाता हूँ हमारे अमैन(गाँव) में तो अजनबी सा महसूस करता हूँ।ऐसा नही है अमैन बदल गया है ये बिलकुल वैसे ही जैसा हमारे वक़्त में था।कुछ बदलाव होता रहता है हर जगह पर इतना भी यहाँ नही हुआ था कि मैं अजनबी सा महसूस करूँ।लेकिन तुम जबसे यहाँ से गयी हो सब अजीब सा लगता है इस अमैन का। नयी पीढ़ी आ गयी है नया


इश्क़बाज़

झूठा ही सही प्यार तो कर। कमीना साला! अबे! अनु तू क्यूँ अपनी ज़ुबान ख़राब कर रही है।एक बार अच्छे से साले को झाड़ दो दिमाग़ सही हो जाएगा। हाँ प्रिया! कब तक इसकी बकवास रोज़ सुनती रहूँगी।छिछोरा एक दम कोचिंग के मुहाने पर खड़ा हो जाता है और तान


अपनों को वक़्त देना सीखे

कल मैं दुकान से जल्दी घर चला आया। आम तौर पर रात में 10 बजे के बाद आता हूं, कल 8 बजे ही चला आया। सोचा था घर जाकर थोड़ी देर पत्नी से बातें करूंगा, फिर कहूंगा कि कहीं बाहर खाना खाने चलते हैं। बहुत साल पहले, , हम ऐसा करते थे। घर आया तो पत्नी टीवी देख रही थी। मुझे लगा कि ज


अब पछताये क्या होत -कहानी

विनय के घर आज हाहाकार मचा था .विनय के पिता का कल रात ही लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया .विनय के पिता चलने फिरने में कठिनाई अनुभव करते थे .सब जानते थे कि वे बेचारे किसी तरह जिंदगी के दिन काट रहे थे और सभी अन्दर ही अन्दर मौत की असली वजह भी जानते थे किन्तु अपने मन को समझाने के लिए सभी बीमारी को ही


साहित्य (कविता ,कहानी ,)पतन की ओर

आजकल हमारे देश में नौजवानो के लिए साहित्य से लगाव ही नहीं |कविता,कहानी क्या है जानते ही नहीं |न लेखक को पहचानते हैं न कवि को |साहित्य से दूर ही रहते हैं वो तो आजकल अश्लील वीडियो ,अश्लील मूवीज एंव भोजपुरी के अश्लील गाने एंव फिल्मो को देखना पसंद करते हैं इन सबका हमारे देश मे तेजी से वृद्धि भी हो रहा ह


तत त्वम् असि

तत त्वं असि रोज की तरह सब काम काज समेट ऑफिस से घर पहुचा कि चलो भाई इस व्यस्त भागदौड़ की जिंदगी का एक और दिन गुजर गया,अब श्रीमती जी के साथ एक कप चाय हो जाये तो जिंदगी और श्रीमती जी दोनों पर एहसान हो जाये।खैर ख्यालों से बाहर भी नही आ पाया था कि श्रीमती जी का मधुर स्वर अचानक


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