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कहानी

कहानी से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

... और वो सुकून से मर गये...!

बात बहुत छोटी सी है... पता नहीं, कहनी भी चाहिये या नहीं...!दरअसल, कहना-सुनना एक खास परिवेश एवं माहौल में ही अच्छा होता है। क्यूं...?इसलिए कि विद्वानों ने कहा है, ‘शब्द मूलतः सारे फसाद की जड़ है’...मगर, मामला तो यह भी है कि खामोशी भी कम फसाद नहीं करती...!चलिये, कह ही दे



अब छोड़ दिया...!

बहुत साल पहले, एक फिल्म त्रिशूल देख कर आए मेरे चचा बेहद बेहद खफा थे। बस शुरू हो गये – हद है, तहजीब गयी तेल बेचने, अब तो सिनेमा देखना ही छोड़ दूंगा।हिम्मत जुटा कर मैंने उनसे पूछा, किस बात से नाराज हैं?कहने लगे, सिनेमा में कभी भी गलत बात नही दिखानी चाहिए, सिनेमा हमारे समाज की तहजीब का हिस्सा है। समझाया



भागी हुई लड़की

सुबहका समय था. राजू सोया पड़ा था कि तभी किसी नेउसे झकझोर कर उठाया. राजू आँखे मलते हुए उठ गया. सामने मामी खड़ी थीं. मामी ने हांफते हुए कहा,“तुम्हे पता है रात छबीली घूरे के साले के साथ भाग गयी.” राजू ने आँखे मिचमिचा कर देखा कि कहीं वो सपना तो नही देख रहा है. राजू मामी से बोला, “किसने बताया आपको?”मामी



कहानी - दूसरी शादी

संतोष हरफनमौला और शौकीन किस्म का इंसान था। पिता सरकारी मास्टर थे, जिनके पैसों से वह आराम से अपने शौक पूरे करता रहता था। उसके बाकी के दो बडे भाई भी थे लेकिन वे अपने खर्चे अपनी कमाई से ही करते थे। उन दोनों का शौक संतोष की तरह नही था। लेकिन पिता की सरकारी नौकरी कब तक चलती.



मासूमीयत

शर्मा जी अभी-अभी रेलवे स्टेशन पर पहुँचे ही थे। शर्मा जी पेशे से मुंबई मे रेलवे मे ही स्टेशन मास्टर थे। गर्मी की छुट्टी चल रही थी इसलिए वह शिमला घूमने जा रहे थे, उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मंजू और बेटी प्रतीक्षा भी थी। ट्रेन के आने मे अभी समय था।तभी सामने एक महिला अपने पाँच स



किसका भारत महान? (कहानी) #ज़हन

पैंतालीस वर्षों से दुनियाभर में समाजसेवा और निष्पक्ष खोजी पत्रकारिता कर रहे कनाडा के चार्ली हैस को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई। नोबेल संस्था की आधिकारिक घोषणा के बाद से उनके निवास के बाहर पत्रकारों का तांता लगा था। अपनी दिनचर्या से समय निकाल कर उन्होंने एक प्रेस वार्ता और कुछ बड़े टीवी, र



चुन्नू

वो मुस्कुराता चेहरा, कई सारे ख्व़ाब, कई ख़्वाहिशें, कई हसरतें और कई अरमान. कैसा हो अगर उन सभी ख्वाहिशों और अरमानों को कुछ चुनिंदा लम्हे ज़ज्बे और होंसलों के रंगों से उस मुस्कुराते चेहरे पर बसी दो प्यारी आँखों में भर दे. कैसा हो अगर सिर्फ एक पल उसकी सारी दुनिया बदल दे. कैसा



भूतिया स्टेशन

विशेष हमेशा की तरह इस बार भी ऑफिस की तरफ से एक टूर पर था. वैसे तो उसके लिए टूर पर जाना कोई नई बात नहीं थी फिर भी इस बार उसे एक अजीब सी ख़ुशी हो रही थी. शायद इसलिए क्यूँकी इस बार टूर पर और कहीं नहीं उसे उसके अपने शहर जाना था. हमेशा की तरह उसने रिजर्वेशन सेकंड AC में किया हुआ था. स्टेशन वो टाइम पर पहुं



धूमिल चाँद

*धूमिलचाँद*हिन्दुस्तान भवन काहॉल पूरा भरा हुया था | हर स्टाल पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी हुई थी | कुछ पत्रकारफोटो क्लिक करने में लगे थे | मोतियों से बने सुन्दर-सुन्दर मंगलसूत्र..पायल..



वो आखिरी लोकल ट्रैन - भाग 2

पिछले भाग में एक साधारण सा व्यक्ति नरेंद्र अपने घर जाने के लिए ट्रैन पकड़ता है लेकिन जब वो उठता है तब वह अतीत के नरसंहार को सामने पाता है जो अंग्रेज कर रहे थे| वो चार अंग्रेजों को मार कर नरसंहार को रोक देता है लेकिन बेहोश होते-होते बागियों के हाथ लग ज



वो आखिरी लोकल ट्रेन

शुक्रवार की वो सुनसान रात जहाँ लोग रात के ९ बजे से ही घर में दुबक जाते हैं, वहाँ रात ९ बजे से ही कब्रिस्तान जैसा सन्नाटा छा जाता है। कड़ाके की इस ठंड में हड्डियाँ तक काँपने लगती हैं, बाहर इंसान तो क्या कुत्ते का बच्चा भी नजर नहीं आता फिर भी कुत्तों के रोने की आवाज़ क



स्थानीय tutors को छोर के Rahul ने कैसे अपने लिए अच्छा tutors ढूंढा

1. Finding a Local Tutor THE CRISIS & THE RESOLUTION W W W . T U T S T U . C O M2. Meet Rahul Rahul, a cheerful boy of 14, who lives in Janakpuri, New Delhi. Rahul’s father is employed and is the only earning member. Rahul's mom has been



क्या Rahul को अच्छा स्थानिय शिक्षक मिल पाया? कैसे उसने नया हल निकाला

The storyof Rahul who struggled to find a local tutor. Who would be competent enough toaid him recovering his old enthusiasm in academics. Belonging to thelower-middle-class family, Rahul's parents couldn't provide him with luxuriesbut still, they left no stone unturned w



बिना निष्कर्ष की कहानी....

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12 अगस्त को रात नहीं होगी, बस एक बहुत बड़े झूठ से परदा उठेगा!

ज्ञानचक्षु खोलने का जिम्मा अब गुरुघंटालों की बजाय व्हाट्सऐप ग्रुप्स ने लिया हुआ है. जिसको आगे बढ़ाने का काम कुछ हमारी बिरादरी के लोग यानी मीडिया वाले करते हैं. नोट में चिप, लड़के की गूगल में नौकरी और चोटी कटवा आदि उदाहरण. वैसा ही एक ज्ञान ये भी है कि “12 अगस्त को रात नहीं होगी.” व्हाट्सऐप, फेसबुक, ट



घासलेट का घी

बात लावन गाँव की है,जिसमे राजेश्वरी देवी नाम की एक महिला रहती थीं. उनके पति की मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी थी. तीनलडके और एक लडकी थी जिसकी शादी कुछ दिनों पहले हो चुकी थी. घरकी आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. क्योंकि कमाने वाला घर मेंकोई थ



कॉन्डम की वजह से पिटती है दिल्ली की हर चौथी औरत

representative image: Reutersदिल्ली शहर में घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण सामने आया है. ज्यादातर मर्द सेफ सेक्स नहीं करना चाहते. बहुत सारे आदमी कॉन्डम इस्तेमाल नहीं करना चाहते. वो अपनी बीवियों को भी गर्भ रोकने की दवाइयां इस्तेमाल नहीं करने देते. इस बात पर अगर पत्नी विरोध करे, तो वो उसको मारते हैं. शारी



ये दिल्ली का सबसे ज्यादा रिसर्च किया हुआ मर्डर है, रूस की खुफिया एजेंसी के स्टाइल में

9 जनवरी की शाम को दिल्ली के सदर बाजार में एक मर्डर हुआ. रवि कुमार का. पर ये मर्डर आम हत्याओं जैसा नहीं था. दिल्ली में तो रोज हत्याएं होती हैं, पर सबमें कॉमन चीजें ही होती हैं. किसी को गोली मार दी जाती है. कहीं छुरा चल जाता है. पर इस हत्या में जो तरीका इस्तेमाल किया गया था वो कॉल्ड वॉर के दौरान अमेरि



प्रेमचंद की सबसे धांसू कहानियां, एक जगह पर एक साथ

प्रेमचंद भारत के सबसे महान राइटर माने जाते हैं. हम कहते हैं वो सबसे नए और कूल राइटर थे. आज होते तो दर ऑफेंड होते लोग उनसे. ट्विटर पर उनको बहुत कोसा जाता और वेबसाइट्स उनकी कहानियों के बीच से लाइन निकाल-निकाल कोट्स बनाती. सन 36 था, दिन आज का था. आज मतलब 8 अक्टूबर. जगह बनारस थी और वो दुनिया छोड़ गए.जब उ



सीमा समाप्त (हॉरर कहानी) #ज़हन

रात के 3 बजे सरोर पुलिस थाने से सटे कमरे में सोते दीवान जी की किवाड़ ज़ोर से धड़धड़ाई। यकायक हुई तेज़ आवाज़ से दीवान जी उठ बैठे। उन्होंने तो जूनियर मुंशी को थाने पर किसी इमरजेंसी



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