आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

चाहो तो

चाहो तो पढ़ लेना तुम वो पाती, हवाओं के कागज पर लिखकर हमनें जो भेजी, ना कोई अक्षर इनमें, ना हैं स्याही के रंग, बस है इक यादों की खुश्बू चंचल पुरवाई के संग। चाहो तो रख लेना तुम वो यादें, घटाओं की चुनरी में कलियों संग हमने जो बाँधे, ना को


महाकवि श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी की पुण्यतिथी पर सादर श्रद्धांजलि

कैसी है पहचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो!!पथरा चलीं पुतलियाँ मैंने विविध धुनों में कितना गायादायें बायें ऊपर नीचे दूर पास तुमको कब पायाधन्य कुसुम पाषाणों पर ही तुम खिलते हो तो खिलते होकैसी है पहचान तुम्हारी राह भूलने पर मिलते हो!!किरणों से प्रगट हुए सूरज के सौ


बारिश फिर आ गयी

बारिश फिर आ गयीउनींदे सपनों कोहलके -हलके छींटों नेजगा दिया ठंडी नम हवाओं ने खोलकर झरोखे धीरे से कुछ कानों में कह दिया।बारिश में उतरे हैं कई रंगख़्वाहिशें सवार होती हैं मेघों परयादों के टुकड़े इकट्ठे हुएतो अरमानों की नाव बही रेलों पर ह


इंसानी हकूक और पत्थरबाजों की वहशी भीड़

अभी हाल में कश्मीर के नौहट्टा से एक दुखद घटना सुनने को मिली ...... शहीद DSP मौहम्मद अयूब की निर्मम हत्या से कुछ सवाल खड़े हुए है जो इन 2 रचनाओं के माध्यम से सामने रख रहा हूँ


मैं मटमैला माटी सा

मैं मटमैला माटी सा , माटी की मेरी काया,माटी से माटी बना, माटी में ही समाया।समय आया, आकाश समेटे घाटी-माटी पिघलाया,अगन, पवन, पानी में घोलकर, तन यह मेरा बनाया।।जनम हुआ माटी से मेरा, माटी पर ही लिटाया,माटी चखी, माटी ही सखी, माटी में ही नहा


इंसानी हकूक और पत्थरबाजों की वहशी भीड़ 1

अभी हाल में कश्मीर के नौहट्टा से एक दुखद घटना सुनने को मिली ...... शहीद DSP मौहम्मद अयूब की निर्मम हत्या से कुछ सवाल खड़े हुए है जो इन 2 रचनाओं के माध्यम से सामने रख रहा हूँ


ईद मुबारक

मुबारकबाद सबको दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , महक इस मौके में भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ********************************************* मुब्तला आज हर बंदा ,महफ़िल -ए -रंग ज़माने में , मिलनसारी यहाँ भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ************************************************************* मुक़द्दस


अपनी सोहरत से डरता हूँ

अपनी सोहरत से डरता हूँकहीं, यह तुझे रुसवा ना कर दे मोहब्बत का अपनी, इजहार करने से डरता हूँ की मशहूर, ना हो जाए यह कुछ इस क़दरकी लोग समझ जाएँ, इशारों इशारों में तेरा ज़िक्र अपनी रुसवाई से भी डरता हूँयह रुसवाई, तुझे मशहूर ना कर दे मोहब्बत को अपनी, छुपा के रखने से भी डरता हूँछुपाते छुपाते, कहीं इज़हार


प्यारी कोयल (कविता )

प्यारी कोयल-प्यारी कोयल, तू इतना प्यारा कैसे गाती है?तू क्या खाती और क्या पीती?, तू मुझको क्यों नहीं बतलाती है?कू-कू ,कू-कू तेरी बोली, मन में मेरे घर कर जाती है।तू अपना तो राज़ बता, फ़िर क्यों नहीं हमराज़ बनाती है?प्रभात हुआ सूरज निकला, और तू मधुर गति से गाती है।तभी पड़े का


मेरे सपने

अक्सर पूछते है ये रात के सन्नाटे मुझसे क्यूं आ रही है कुछ टूटने की अाहटे तुझसे अब क्या बताऊ इन रात के अधियारों सेकी अवाजे आ रही है मेरे टूटते हुए सपनो के गलियारों से


मेरी पाती

बादल की छाती परओस की स्याही सेसूरज की किरणों सेलिखी मैंने पातीभावनाओं को चुन चुनशब्दों में पिरो करसजा मैंने दीजिसे विविध भांतिऐ चंचल हवा सुन लेमेरा तू कहनाले जा उड़ा कर इसेजहाँ बस्ता हो मेरा साथी


उसके घर से पहले,

खुद का सब्र आज़माया,उसके दर से पहले,रास्ते में थे कई मुकाम, उसके घर से पहले,ऊँचें बेशक़ कर लिए दर-ओ-दिवार अपने,यक़ीनन झुका था ईमान, खुद नज़र से पहले,बिना कहे-सुनेही जद्दो-जेहद बयाँ हो गयी,जी भर के रोया था जो, अपने फ़क़्र से पहले,शायद कुछ अधूरी सी ही रह गयी वो दुश्मनी,हमारी ज़िंदगी जो कट गयी, इक सर से पहले,


मुश्किल ना था यादों को तरो-ताज़ा करना

मुश्किल ना था यादों को तरो-ताज़ा करना,बैठे-बिठाये खुद का ही खामियाज़ा करना, पहली ही दस्तक पे जो खोल दिया था मैंने,फ़िज़ूल था उसका बंद वो दरवाज़ा करना, रुकता भी तो शायद ना रोकता कभी उसे,वक़्त से चंद लम्हों का क्


आहिस्ते-आहिस्ते

तैयार की जाती है औरतें इसी तरह रोज छेदी जाती है उनके सब्र की सिल हथौड़ी से चोट होती है उनके विश्वास पर और छैनी करती है तार – तार उनके आत्मसम्मान को कि तब तैयार होती है औरत पूरी तरह से चाहे जैसे रखो रहेगी पहले थोड़ा विरोध थोडा दर्द जरुर निकलेगा आहिस्ते – आहिस्ते सब गायब और पुनश्च दी जाती है धार क्रूर


पितृ दिवस की शुभकामनायें

झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं . ……................................................... बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ , ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं . ........................................................ शिक्षा दिलाई हमें बढा


माना जाएगा

न भागना ,न कोई बहाना काम आयेगा । मुश्किलों से सिर्फ टकराना काम आयेगा । लोग जहनी हैं, बहुत इल्म है जमाने में । होगा जो सही इस्तेमाल ,माना जायेगा । फुर्सत किसी को वक्त की मोहलत होगी । दिल को करार आयेगा तो, माना जायेगा ।


क़िस्मत( कविता)

किस्मत ना तो वरदान है,और ना ही यह फ़रमान है।जो ज़िए इसके सहारे,रास्ते ग़ुमनाम हैं।अनज़ान यूँ छोर हैं,ख्वाहिशों के शोर हैं।हाँकते फ़िरते मग़र वे,समझते की हम नूँर हैं।चल पड़े वे दो डगर,ज़नाब कह दिए की रास्ते तो दूर हैं।जो ज़िए इस ‘मत’ सहारे,वे ज़िन्दगी की धूल हैं।किस्मत का मतलब य


मुझे प्रेम जताते हो

मुझे प्रेम जताते हो मुझे पास बुलाते होजब सब कुछ तुमसे है मेरा मुझे क्यों सताते हो?कभी आँचल थामते होकभी बंधन बांधते होकभी छोड़ देते हो हाथ मेराकभी हक़ भी मांगते हो,कभी दिल ये तोड़ते होकभी रिश्ते जोड़ते होकभी राहें ताकते होकभी बीच में छोड़ते होन रहेंगे जब हम सनमफिर किसको छोड़ोगेखुद टूट टूटकर बिखरे होमुझे और


वर्षा देखकर हर्षा दिल ( कविता)

वर्षा देखकर हर्षा दिल,रिमझिम-रिमझिम-हिलमिल हिल।प्यासी धरा अब हो उठी खिल,बिजली चमकी चिल-चिल-चिल।बच्चे दौड़े हिल मिल हिल,बच्चे गये तब सभी फिसल।मेढ़कों के अब बने महल,और ज़ोर से बोले टिर-टिर-टिर।सभी बोले अब मिलकर,वर्षा गई अब और भी बढ़।वर्षा ऋतु का यही पहर,सब ऋतुओं से है बढ़कर।अकड़े आँगन गली नहर,पानी निकला फर-


एक बहाना तो हो

"तेरे क़दमों में चाँद-तारों को बिछाऊँ मैं, तेरी तारीफ़ में कोई नगमा गुनगुनाऊँ मैं, बिन तुझे देखे दिल को चैन अब नही मिलता, कोई तरकीब बता दूरियाँ मिटाऊँ मैं, यूँ हैं जीवन की भागदौड़ में मशरूफ़ बहुत, साथ तेरा मिले तो जिंदगी भुलाऊँ मैं, कोई महफ़िल, कोई त्यौहार या कोई रश्म-ए-वफ़ा, इक बहाना तो हो की तुझसे म


आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x