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कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

बेनूर जिंदगियां इसी को तरसे हैं...

रंग बरसे...आदतन... इरादतन... फितरतन!... या फिर, यूं ही ... बेसबब... ... गैरइंतखाबी सुर बरसे,नामुकम्मल मेहरबानियां भी,आंधियां भी रंगो-शबाब से बरसीं,अरमानों के रंग तो बहुत थे मगर,सूखी हथेलियों से पूछिये क्यूं नहीं बरसीं! ... मासूमियत पिस के जो हिना हुईंतो आसनाई बदरंग हो गयीं...फिर खुसूशियत स्याह हो चल



गजबे बा इ देश

गजबे बा इ देश रे भइया खल खल के गीत गावेला । सत्य बुद्ध के कहाँ गइल उपनिषद के शांति कहाँ गइल राष्ट्रपिता के अहिंसा कहाँ भगत के क्रांति गइल । उज्जर झक खादी के ऊपर छलिया दाग लगावेला । पंचयत के चौपालन पर पांचाली के चीर हराता लाशन के टीला पर बइठल भेड़िया अजब गजब मुस्काता ।



हमार गांव

हमर गऊआं गजब अलबेलाउदास कभी होखे ना देला । ओहि मोरा गऊआं में बलवां बधरियाधानी चुनरिया में लागे बहुरिया डोल्हा पाती ओहिजे जमेलाउदास कभी होखे ना देला । ओहि मोरा गऊआं में चाना के पुलिया मछरी फँसावे ला लागेला जलियाओकर पीपर त लागे झुमेला उदास कभी होखे ना देला । ओहि हमर गऊआं में जिला चउकवाओहिजे मिलेला सउ



चंदा के ले आव ना

ए कोइलरी! आव ना। मिसिरी जस गीत सुनाव ना ॥ तरवाईल तन के उजास मन के मिठास मरुआईल बा।अंदर तक खालीपन पसरलसाख पाँख लरुआईल बा । तितली रानी! आव ना ।अपना संगे उड़ाव ना ॥ बाबूजी भइलन मरियाठी माई माँस के गठरी ।बिकी गइल भुअरी पाड़ीबिकी गइल झबरी बकरी । कुतुर कुतुर के सुग्गा राजा ।आ



गजब हो गइल

माई घरे तोरा कहयिनी सासु घरे रउरा गजब हो गइलभइनी गउरी से गउरागजब हो गइल। कनियाँ बनके ससुरा अइनीसासु खूब खिअवली पुहुट बनावे खातिर हमके खुबे दूध पियवली देखते देखत हो गइनी हम गरइ से सउरागजब हो गइल। चूल्हा मिलल चउका मिलल मिलल चाभी तालारिन करज के बोझा मिलल मिलल छान्ही के जाला कुछे दिन में हो गइनी हम कठेल



रंगदार हो गईल

रंगदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. ठेलठाल के इंटर कइलसबीए हो गइल फेल रमकलिया के रेप केस में भोगलस कुछ दिन जेल असरदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. खादी के कुरूता पयजामामाथे पगड़ी लाल मुंह में पान गिलौरी दबलेचले गजब के चाल ठेकेदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू. पंचायत चुनाव में कइलस नव परपंच समरसता में आग लगव



चलीं अपना गांव

चलीं अपना गाँवतनि सा घूम आईं. पत्थल के एह नगरिया मेंपथरा गइलीसन आँखटुटल डाढ़ी अस गिरल बानीकटल परल मोर पाँख लागल बा चोट कुठाँवत कइसे धूम मचाईं. खिसियाइल दुपहरिया मेंतिल तिल के तन जरतानोनिआइल देवालिन मेंनोनी जस मन झरता ओहिजे मिली नीम छाँवतनिसा झूम आईं. छाँह नदारद ठाँह नदारदमाहुर उगलत नलका जाने कइसन बा



जिस्म के सौदागर

तुम देखते हो एक औरत में आंखों की लंबाई होठों की चिकनाईस्तनों का आकार नितंबों की मोटाई तुम निहायतीजिस्म के सौदागर हो !तुम चूक कर देते हो !एक औरत के दिल में देखने मेंप्रेम और ममता की अथाह गहराई आंखों में लाज का काजलहोठों पर रहनुमाईदूध से



कमाई दिहलस पपुआ

पढ़ि लिखि के का कइलभईया पढ़वैयाकमाइ दिहलस पपुआखांचा भर रुपैया. मंत्री बिधायकजी केखास भइल बड़ुएगऊआं के लफुआन केबॉस भइल बड़ुएआ मुखिया जी के कांख केभइल बा अँठईया. मुंशी पटवारीजी केकरेला दलालीमुंहवा में पान लेकेकरेला जुगालीआ भोरहिं से लाग जालाफांसे में चिरईयाँ. हिंदी अंगरेजीभोजपुरी बोलि लेलाबनब त बन हरेसरओक



हमार जान ह भोजपुरी

हमार सान हहमार पहचान ह भोजपुरीहमार मतारी हहमार जान ह भोजपुरी. इहे ह खेत,इहे खरिहान हइहे ह सोखा,इहे सिवान हहमार सुरुज हहमार चान ह भोजपुरी. बचपन बुढ़ापा ह,इहे जवानीचूल्हा के आगि ह,अदहन के पानीहमार साँझ ह,हमार बिहान ह भोजपुरी. ओढिला इहे,इहे बिछाइलाकुटिला इहे,इहे पिसाइलाहमार चाउर हहमार पिसान ह भोजपुरी इह



तुलसीदास ओ तुलसीदास

तुलसीदास ओ तुलसीदास तुम भी प्रेम पाश में सारी हदें लांघ गये थेरजनी के तम में जली जो विरह अगन उर मेंतुम लाश को नाव और सर्प को रस्सी समझ बैठे थेतुलसीदास ओ तुलसीदासतुम भी प्रिये की आस मेंभटके थे वन वन किसी की तलाश मेंसच सच बतलाना रत्नावली के दमक से तुम भी कुछ देर जले थे तुलसीदास ओ तुलसीदासपाकर अपनी मूर



खाता नम्बर

ग़ौर से देखो गुलशन में बयाबान का साया है ,ज़ाहिर-सी बात है आज फ़ज़ा ने जताया है। इक दिन मदहोश हवाऐं कानों में कहती गुज़र गयीं, उम्मीद-ओ-ख़्वाब का दिया हमने ही बुझाया है। आपने अपना खाता नम्बर विश्वास में किसी को बताया है,



परिचय

मेरा इश्क़ मेरा दर्द मेरा रोग लिखता हूँज़ीवन के सारे अनुभवों का योग लिखता हूँसंयोग से संयोग हुआ इस कदर मेराक़ि बिछड़न में अब तलक मैं वियोग लिखता हूँ



पहले कौन उठता है...

कुछ वक्त गये, दुपैसियल बाजार से फनां हो गये... फिर तीन, पांच, दस और बीसपैसियल भी साथ हो लिए,चवन्नी की बिसात क्या, अब अठन्नी भी पाकिट छोड़ गये, न जाने कितने, ताबो-बिसात वाले यूं ही बेखास हो गये।इसी दुपैसियल से तिलंगी, लेमचूस और खट्टा पाचक जुटाये थे... बामुश्किल जुगाड़े थे दसपैसियल तो भाई संग फुलप्लेट



ये धुआं कहां से उठता है...

जुड़ सकूं, ऐसा कोई गुर तलाशती हूं,सन्नाटों के बिंदास सुर तलाशती हूं...हूं भी या माजी की शादाब मुहर भर हूं,किससे पूछूं, उसको अक्सर पुकारती हूं...रोने के सुकूं से जब घुट जाती हैं सांसें,मुस्कुराहट का अदद दस्तूर तलाशती हूं...फलक-ओ-जमीं से फुर्कत का सबब लेती हूं,लिपट के उससे रोने के बहाने तलाशती हूं...खु



बलि

भावार्थ : - भारत में आज भी बलि-प्रथा ब- दस्तूर जारी है एवं जारी है आज के शिक्षित वर्ग का उसम



कायनात खरीद लाया...

चरागों में तुझको ढूंढा, खुशबुओं में तुझको पाया,पता तेरा मालूम न था, तभी तो यह लुत्फ पाया।पिछली गली में साया कोई अंधेरे में गुनगुनाता था,तेरे लिए जो खरीदी थी पाजेब, मैं उसको दे आया।पगली ही थी, चीथरों में लिपटी दुआएं बांट रही थी,मेरी कोट में पड़ा गुलाब मैं उसके पल्लू में बांध आया।भुट्टे बेचती बुढ़िया न



जिस रात उस गली में

रौशनी में खो गयी कुछ बात जिस गली में वो चाँद ढूढ़ने गया जिस रात उस गली में || आज झगड़ रहे है आपस में कुछ लुटेरे कुछ जोगी गुजरे थे एक साथ उस गली में || कुछ चिरागो ने जहाँ अपनी रौशनी खो दी क्यों ढूढ़ता है पागल कयनात उस गली में || मौसम बदलते होंगे तुम्हारे शहर में लेकिन रह



" वह चुप था "

ज़िन्दगी ने किया एक मज़ाक,उस नन्हें नादान के साथ,राहें दर्द देती रहीं उसे,फिर भी वह चुप था| वो हसीं रिश्ता माँ-बेटे का,जिससे वह हमेशा वंचित रहा,ममता के लिए वो तड़पता रहा,फिर भी वह चुप था| पिता तो करते थे प्यार उसे,ले आये नयी



तकिया

कुछ बेसबब, अल्हड़ से ख्वाब,चश्मे-तर में कहां होते हैं,तकिये के नीचे दबे होते हैं...।दबे पांव निकल कर, संभल कर,आपकी ठुड्डी सहला जाते हैं...आलमें-इम्कां का एतबार न टूटे,इस कर थपकियों से जगा जाते हैं...होने को जहां में क्या नहीं होता,पर ये ख्वाब मुकम्मल नहीं होता,फिर भी, तकिया किसके पास नहीं होता...!



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