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कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

Somu ki शायरी

like my new fb page of funny shayari & memes :- Somu ki शायरी....जरूर like करें और अपने सुझाव भी दें..


भारत दिखलाने आया हूँ

भारत दिखलाने आया हूँरंग रूप कई वेष यहाँ पररहते है कई देश यहाँ परकोई तिलक लगाकर चलताकोई टोपी सजा के चलताकोई हाथ मिलाने वालाकोई गले लगाकर मिलताकितने तौर-तरीके, सबसे मिलवाने आया हूँक्या तुम हो तैयार? भारत दिखलाने आया हूँएक कहे मंदिर में रब हैदूजा कहे खुदा में सब हैतीजा कहे चलो गुरुद्वाराचौथा कहे कहाँ औ


मगर ये हो न सका

मैंने एक ख्वाब देखा था, तुम्हारी आँखों मेंहक़ीक़त बन जाये मगर ये हो न सका ||एक कश्ती ले उतरेंगे समुन्दर की बाहों मेंकोई मोड़ न होगा फिर अपनी राहों मेंनीला आसमां होगा जिसकी छत बनाएंगेसराय एक ही होगी ठहर जायेंगे निगाहों मेंएक लहर उठाएँगी एक लहर गिराएगीगिरेंगे उठेंगे मगर


तैयार रहता हूँ

चाँदनी रात में सब साथ होते हैंअंधेरे में मगर, परछाईं भी साथ छोड़ देती है इसलिए तनहा जीने को तैयार रहता हूँ कहने को हमसफ़र हैं कईकौन किस मोड़ पर मगर, साथ छोड़ देइसलिए सफ़र ज़िंदगी का अकेले ही काटने को तैयार रहता हूँ दिलों जान से चाहने वाला दिलबर भी है ना जाने मगर, किस बात पर दिल तोड़ दे इसलिए, दिल के


तुझ से गिला नहीं

तुझ से कोई गिला नहीं नाराज़गी ख़ुद से है रहते थे जब नज़दीक तेरे तो दूरियाँ बना रखी थी अब जब दूर रहते हैं नज़दीकियों को तरसते हैं कहना चाहती थी जब कुछ अनसुना कर देते थे अब आवाज़ तुम्हारी सुनने को तरसते हैं नज़रें मिलते ही तुम से पलट जाते थे अब तुम्हें देखने को तरसते हैं तुझ से कोई गिला नाराज़गी ख़ुद


स्व -वित्त पोषित संस्थान

स्व-वित्त पोषित संस्थान में जो विराजते हैं ऊपर के पदों पर, उनको होता है हक निचले पदों पर काम करने वालों को ज़लील करने का, क्योंकि वे बाध्य नहीं है अपने किये को जस्टिफाई करने के लिए . स्व-वित्त पोषित संस्थान में आपको नियुक्त किया जाता है, इस शर्त के साथ कि खाली समय में आप सहयोग करेंगे संस्थान के अन्


उम्मीद की किरण

उम्मीद की एक किरणहर बारदिल के दरवाजे परजाने किस झरोखे सेकुछ यूँ झांकती हैके कुछ पल के लिए ही सहीचेहरे पे ख़ुशी की झलकसाफ दिखाई देती है,मन खुश होता है,दिल खुश होता है,फिर जाने कैसेचिंताओं की परछाईउस किरण के सामनेआ जाती हैसब दूर अँधेरा छा जाता हैदिल डूब जाता है।धीरे धीरे लड़खड़ाती सीफिर गुम हो जाती हैवो


बातें कुछ अनकही सी...........: अंतर्द्वन्द

अंतर्द्वन्द जो सीने में बसा औचित्य जीवन का मैं सोचता यहाँ हर कोई मुझे पहचानता है मैं पर खुद में खुद को ढूंढतासाँस चलती हर घड़ीप्रश्न उतने ही फूटतेजो सपने बनते हैं फलक परधरा पर आकर टूटतेकुंठित होकर मन मेरामुझसे है आकर पूछता जिसने देखे सपने वो कौन था और कौन तू है ये बतारो-रो


मैं लिखता हूँ

मैं नही जनता हूँ किक्या लिखता हूँ? हाँ, मगर मैं लिखता हूँ| मैं नही जनता कि गीत लिखता हूँ या गज़ल लिखता हूँ, हाँ,मगर मैं लिखता हूँ| अनजान हूँ अभी मैकाव्य सेमैं नही जानता कि कविता किसे कहते है,शायरी क्या होत


वो एक ही होता है

दिल के क़रीब रहने वाले मिल जाएँगे बहुतदिल में जो रहे वो एक ही होता है कुछ पल साथ रहने वाले मिल जाएँगे बहुत ज़िंदगी भर साथ रहे, वो एक ही होता है आँसू पोंछने वाले मिल जाएँगे बहुत आँसुओं को आने ही ना दे, वो एक ही होता है ख़ुशी में साथ देने वाले मिल जाएँगे बहुत अपनी ख़ुशी तुम


माँ का साया

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रियआज बैठकर सोचा मैनेक्या खोया क्या पाया हैएक चीज़ जो साथ रहीवो तो बस माँ का साया है||आज मुझे हा याद नहीअपने बचपन की बातेमाँ ने क्या-२ कष्ट झेलेतब मिली मुझे ये काया है||संसार मे जब मैने जन्म लियाना जाने कितना रोया थापर सारी दुनिया को भूलमाँ के आचल मे निडर हो सोया था||मुझे ठीक से


कविता के गांव में

कविता के गाँव मेंकविता के गाँव मेंकई तरह की कलम उगी थीकोई फूली थी कोई पचकी थीकोई स्याही में डूबी थीकोई लिखकर टूटी थीप्राचीन नदी के किनारेएक प्राचीन कुटी थीअबूझ भाषाओँ की चीखसमय के जंगल में गूंजी थीसूने कान में आवाजों के डोरेसूत्र बन जिह्वा पर बोलेध्वनि के चित्र खोलेकविता विचित्र होसंतप्त जीवन कीआह्ल


मशाल बुझी हुई है ....

मशाल बुझी हुई है .... कोई फूल मुरझाये आपको क्या ?कोई पत्थर पर चढ़ जाए आपको क्या ?क्या कोई इंसान भी जिन्दा है यहाँचाँद पर जाने से जैसे चाँद भी पत्थर हो गया ...चांदनी हो गई उजाला ...माफ़ करना मेरे दोस्त !यहाँ पर कोई तुम्हारी उम्मीद सुनने नहीं आये हैसपने तो ‘पाश’ के समय में भी मरते थेआज सपनों के साथ इन्स


आंसू

आंसूआपने रोहित वेमुला की माँ की आँखों में आंसू देखे थे ?आपने नजीब की माँ की आँखों में भी आंसू देखे थे ?पर आपको वह नजर नहीं आये ...वह नेता नहीं थेवह नेताओं के पुत्र-पौत्र नहीं थे...आपने उस उना काण्ड में मार खाने वालों के भी आंसू देखे थेआपको उस वक्त क्या लगा था ?आपने जब वह फैसला आया जब देश में आप जो र


जब भी तुम रूबरू होते हो

कोशिश बहुत की हैं तुम्हें भुलाने की मगर जब भी तुम रूबरू होते हो बीते पल, सुहानी यादें ताज़ा हो जाती हैं कुछ ज़ख़्म हरे हो जाते हैंकुछ नए मिल जाते हैं मुस्कुरा कर इन्हें छुपा तो लेता हूँमगर, दर्द पानी बन छलक जाता है ख़ुशी के आँसु हैं कह कर दुनिया को बहकाता हूँदोस्त मगर समझ जाते हैं जब भी तुम रूबरू हो


रिश्तों

रिश्तों की पहचान सब को हैफिर भी इनकी समझ कितनो को है रिश्तों से उम्मीद सब को है फिर भी इन्हें निभाते कितने हैं रिश्तों में मिठास की ज़रूरत सबको है फिर भी इनमे मिठास घोलते कितने हैं रिश्तों की कड़वाहट लगती बुरी सब को है फिर भी इसे ख़त्म करने की कोशिश करते कितने हैं रिश्तों से ज़िंदगी बेहतर बनाने की


जो दिल तुझे दे दिया

जो दिल तुझे दे दिया वो किसी और से लगाऊँ कैसे जो पल तेरे नाम किएउन्हें किसी और के साथ बिताऊँ कैसे जो साँसे जुड़ी है तुझ सेउन्हें किसी और को दे दूँ कैसे जिन आँखों में बसी हो तुमउन्मे किसी और को बसाऊँ कैसे जिस ज़ुबान पर हो तेरा नामउस पर किसी और का ज़िक्र लाऊँ कैसे जो जीवन कर दिया नाम तेरे वो कर दूँ किस


चलो कुछ लिखा जाए

हालांकि मैं कोई प्रोफेशनल लेखक या कवि तो नहीं, पर आपकी तरह लिखने का शौक स्कूल के समय से रखता हूँ। और आज भी कभी कभी बस यूं ही लिख लिया करता हूँ। करीब 10 - 12 साल पहले मैंने लिखना शुरू किया था, शुरुआत में कवितायें, शायरी, छोटे मोटे लेख इत्यादि लिखा करता था, पर मेरा दायरा सीमित था। मैं लिखता, और मेरे


सुधार के धंधे

मित्र सुधार इतना होता हैकिन्तु हम सुधरते नहीं हैऔर सुधार के धंधे भीकभी उबरते नहीं हैजब से बना है संविधानसंशोधन में ही फँसा हैबिकाऊ न्याय के बाहरहम बेचारों का हाथ कसा हैअब तो मुझे हर जगह जाने क्योंदुकान ही दुकान नज़र आती हैयह व्यवस्था क्यों नहीं शर्माती है ?लगता है संसद निजी क्षेत्र में हैसिर्फ धोख


बन जा तू हनुमान

जो पाप-पुण्य से सदा परे है, जो लाभ-हानि से है अविचल।सुख-दुख जिसके सदा बराबर, जन्म-मरण में है सम वो तो। जिसका ना है मान, ना अपमान कर्मयोग में लगा है जो, वही है हनुमान । आ उठ चल अब दौड़ लगा, छोड़ के सारे तू अभिमान।कर्म तू कर ना फल की चिंता,


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