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कविता

कविता से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

जब जिन्दगी को कहा मैंने अलविदा

जब जिन्दगी को कहा मैंने अलविदा हर आंख मे थे आँसू , जब जिन्दगी को कहा मैंने अलविदा मेरा हर रास्ता तुम तक जाता था मै कही भी रहता था तुम मे ही लौट के आता था



रिश्ते अनमोल हैं



मन्दिर के अन्दर पत्थर बिखर गया

जब मैंने अपनी सूरत देखी आईना बिखर गया काँच हाथो मे चुभा , चेहरा बिखर गया तुमको पाने की जो दुआ मांग ली मन्दिर के अन्दर पत्थर बिखर गया मेरे



काहे भरमाये

काहे भरमाये***काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमायेनवयुग का ये मेला हैबस कुछ पल का खेल ा हैआनी जानी दुनिया केरंग मंच पे नहीं तू अकेला हैमन मर्जी से सब चलते जब,फिर तू ही, काहे घबराये, बन्दे काहे भरमाये !!कहने को सब साथ साथ हैनहीं किसी के कोई ह



दिल ने कहा धड़कनो मे कुछ खराबी है

दिल ने कहा धड़कनो मे कुछ खराबी है तुम्हे देखा है जब से आदते शराबी है सुबह की तो क्या कहु रात तक गुलाबी है मेरी आँखों मे गिर गया है तेरा हसीन ख्वाब आके आँखों की रंगत अब



अस्तित्व

क्या हूँ?रोजगारों के मेले में बेरोजगार!?! क्या हूँ ?बिल्डिंगों के बीच गिरी इमारत का मलबा!?! या हूँ? उसमें दबी इच्छाओं , आशाओं और उम्मीदों की ख़ाक !?! कौन हूँ मैं ?क्यूँ हूँ मैं ?क्या हूँ मैं ?क्या अस्तित्व है मेरी इस बेबस सी खीझ का ?...क्या हूँ ?भीड़ भ



इत्र ऐसा प्यार का

थोड़ा तुम महको थोड़ा मुझे भी महका दो इत्र मेरे जिस्म पर प्यार का आज ऐसा लगा दो थोड़ा तुम चहको थोड़ा मुझे भी चहका दो सुर अपने गीतो मे प्यार का आज ऐसा लगा



रात के आसमान पर जब चाँद निकलेगा

रात के आसमान पर जब चाँद निकलेगा बावरा मन प्यार को तरसेगा तुमको भी कुछ होगा , मुझको भी कुछ होगा जब प्यार का प्यासा सावन , हम दोनों पर बरसेगा प्यार मे नहाने



कोई तो बता दे विद्यार्थी की परिभाषा ?

कोई तो बता दे विद्यार्थी की परिभाषा क्यों मिलती है हमें हर मोड़ पर निराशा, हर कोई है कहता , आज का स्टूडेंट नहीं है पढता , किसी ने हमारी मजबूरी को नहीं है समझा , सभी ने अप



जिन्दगी तुम मुझे

जिन्दगी तुम मुझे फिर से जीने की वज़ह दे रही हो मैं इनाम का हकदार हु या फिर कोई सज़ा दे रही हो मैंने ग़ज़ल लिखना जब से बन्द किया है कोई नजम बन के तुम सदा दे



सभी मतलब के रिश्ते हैं

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंनेग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंनेमुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगीना जाने क्या हुआ फिर भी ये खिड़की खोल ली मैंनेदेख के रुख ज़माने का हुए थे दूर सब तुमसेमगर तब भी तो मीठी बात तुमसे बोल ली मैंनेमुझे तन्हा ना छोड़ोगे कहा करते थे तुम मुझसेझूठ हर बात वो



कभी हमको ख़ुदा बना देते हो

कभी हमको ख़ुदा बना देते हो कभी नज़रो से गिरा देते हो ये कैसी है तुम्हारी अदा हमको रुला देते हो कभी नज़रो मे बसा लेते हो कभी नज़रो से गिरा देते हो ये कैसी है



जिन्दगी ने सताया मुझे इतना है

जिन्दगी ने सताया मुझे इतना है कि आँखों से लहू निकल आया है मेरे ज़ख्मो का कोई हिसाब नहीं है अपना हि कोई जब जुल्म करने पर उत्तर आया है मै रात कि तन्हाईयो मे जाग रहा हु जबकि दुनिया की आँखों मे ख़्



जब से तुम गयी हो

जबसे तुम गये हो लगता है की जैसे हर कोई मुझसे रूठ गया है हर रात जो बिस्तर मेरा इंतेजार करता था, जो दिन भर की थकान को ऐसे पी जाता था जैसे की मंथन के बाद विष को पी लिया भोले नाथ नेवो तकिया जो मेरी गर्दन को सहला लेता था जैसे की ममता की गोदवो चादर जो छिपा लेती थी मुझको बाहर की दुनिया सेआजकल ये सब नाराज़



तुम्हारी याद आई है

ग़िला शिक़वा करूँ कैसे मोहब्बत की इनायत कादिल-ए-बेताब की हर क़श्मकश किस्सा शिकायत काकिसी बीमार को जैसे अखरता हो बदन का ज्वरलहर की चोट से जैसे सिहरता हो कोई सागरकिसी अमरत्व की ख़्वाहिश में जैसे भाव मरता होक़ि जैसे फ़र्श पऱ ग़िरकर कोई शीशा बिखरता होक़ि टूटा हो परिंदा और पंखों का पता ना होबटाँ अस्तित्व हो ऐसे



दर्द को छोड़ दो दवा की बात करो

दर्द को छोड़ दो दवा की बात करो माँ के पाँव छु लो उसकी दुआ की बात करो कल का सूरज कल के साथ डूब गया , आँखों मे नये ख़्वाब रखो और कल को छोड़ दो आज की बात करो जब तुम्हारी मन्जिल मे हु और मुझको पाना है तो



दाँत दर्द !!!

जब करने लगे दांत दर्द ,और बहने लगे हवा सर्द | जब सोना पड़े चटाई पर ,और रोना पड़े पढाई पर | जीवन हो जाये भागम भाग ,और एग्जाम भी आ जाये एकदम पास | जब मैगी पर रहना हो ज़िंदा ,तो नीरज भइया कैसे रहे चंगा | जब सारी दूध पी जाये बिल्ली ,और दोस्त भी मिलकर उड़ाए खिल्ली |जूते मै



चाँद साक्षी आज की रात

तेरे मेरे अनुपम प्रणय का- चाँद साक्षी आज की रात ; मेरे मन में तेरे विलय का - चाँद साक्षी आज की रात ! झांके गगन की खिड़की से -चंदा घिरा तारों के झुरमुट से, मुस्काए नटखट आनन्द भरा -छलकाए रस अम्बर घट से ; सजा है आँगन नील न



फॉग चल रहा है रात दिन

कोई आँखों मे रहता है रात दिन मुस्कुराता है मुझ मै रात दिन कोई दिल मे रहता है रात दिन खूबसूरत हो गए है मेरे रात दिन मे अपने मे से निकल कर रह आता हु उसमे रात दिन मेरी रूह भी कह रही है कहा रहते हो आजकल रात दिन सुबह



भगवान

बच्चे भगवान तुम भगवान के पिताजी,ऊँची कैंटीन की बेकार पावभाजी।पानी बेभाव सागर बगल में दहाड़े,जिह्वा है ऐंठती क्या खूब जालसाजी।माना बलवान हो है पूँछ भी तुम्हारी,रावण के बन्धुगण देने को आग राजी।सोंचो शैतान आखिर चीख क्यों पड़ा है?उसके व्यवसाय पर भगवान है फ



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