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लेख से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

टूटते बंधन

टूटते बंधनपाश्चात्य सभ्यता के अनुसरण की होड़ में जो सबसे महत्वपूर्ण बातेंसीखी गई या सीखी जा रही है उनमें जो सर्वप्रथम स्थान पर आता है वह है बंधन मुक्तहोना. जीवन के हर विधा में बंधनों को तोड़कर बाहर मुक्त गगन में आने की प्रथा चलपड़ी है. यहाँ यह विचार का या विमर्श का विषय नहीं है कि यह उचित है या अनुच



बधाई हो एक और घोटाला हुआ हैं!!!

कुछ दिनों पहले ही प्रधानमंत्री जी ने अपने सबसे पसंदीदा विषय "कांग्रेस के काले कारनामे: नेहरू से मनमोहन तक" पर लंबा चौड़ा भाषण संसद में दिया और बैंकों के घाटे की सच्चाई बताने की कोशिश की थी पर तब मीडिया में चर्चा का केंद्र बिंदु उनका रामायण का उल् लेख बन कर रह गया जो



सेना का तमाशा बनाया बाबू मोशा ने

आज के समाचार पत्रों में एक समाचार के शीर्षक ने सर शर्म से झुका दिया ,शीर्षक था -''शहीद का कोई धर्म नहीं होता ,''शीर्षक सही था और लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू ने बात कही भी सही थी क्योंकि शहीद का केवल एक धर्म होता है ''वतन '' और केवल एक ही मकसद होता है ''वतन के ल



जैसा राजा वैसी प्रजा -अब तनाव कहाँ

नया ज़माना आ गया है आज हम वी आई पी दौर में हैं ,पहले हमारे प्रधानमंत्री महोदय साल में बच्चों से मिलने का एक दिन रखते थे और आज प्रधानमंत्री हर वक़्त देश के बच्चों को उपलब्ध हैं और वह भी उन विषयों और समस्याओं के लिए जिसे समझाने व् सुलझाने का काम बच्चों का स्वयं का



मिलिए चलती फिरती प्रेरणादायी किताब से

क्रिकेट का खेल तो हमें विरासत में मिला हैं। हमारे दादा जी देखते थे, पापा भी देखते थे तो हम भी देखते हैं। एक समय वो था जब हम अपने दादा जी के साथ टेलीविजन पर मैच देख रहे होते थे और जैसे ही एक भारतीय खिलाड़ी बल्लेबाजी के लिए आता था, दादा जी के मुंह से कुछ आपत्तिजनक



एक मजबूत साक्ष्य -मृत्युकालीन कथन

साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 में वे दशाएं बताई गयी हैं जिनमे उस व्यक्ति द्वारा सुसंगत तथ्य का किया गया कथन सुसंगत है जो मर गया है या मिल नहीं सकता इत्यादि ,और ऐसे में जो सबसे महत्वपूर्ण है वह है धारा 32 [1 ] जो कि मृत्यु के कारण से सम्बंधित है ,इसमें कहा गया है - ''



पद्मावती विवाद से भंसाली, करणी सेना, मीडिया, नेताओं सबका फायदा ही फायदा हैं, नुक्सान तो बस एक का ही हैं

रामायण के सुंदर कांड में एक प्रसंग हैं। हनुमान जब सीता की खोज में लंका की और जा रहे थे तब नागों की देवी सुरसा, राक्षसी का रूप लेकर आई और उन्हें बीच समुन्द्र रोक कर कहा कि मुझे वरदान प्राप्त हैं कि कोई भी मेरे मुख से बचकर नही जा सकता इसलिए तुम्हे भी मेरा भोजन बनना पड़ेगा। हनुमान ने कहा कि एक बार मैं अ



शादी के 1 दिन बाद दुल्हन ने छोड़ा पति का साथ, रिसेप्शन में माइक पर खोला पति का ये राज

रिसेप्शन में लड़की ने माइक पर एलान कर दिया की इस वजह से वह शादी से खुश नहीं है और अब तलाक चाहती है। नई दिल्ली (ब्यूरो) : कहते है की जब लड़का-लड़की अग्नि को साक्षी मान कर सात फेरे ले लेते है तो उनका साथ सात जन्मों तक रहता है लेकिन आज के आधुनिक ज़माने में शायद ये बात सच नहीं हैं। लेकिन 4G के ज़माने के लड़के



हिन्दू विधवा पुनर्विवाह बाद भी उत्ताधिकारी

एक सामान्य सोच है कि यदि हिन्दू विधवा ने पुनर्विवाह कर लिया है तो वह अपने पूर्व पति की संपत्ति को उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं कर सकती है किन्तु हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम कहता है कि यदि विधवा ने पुनर्विवाह कर लिया है तब भी वह उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति से निर



वो "अशुभ" दिन जब मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ फिर से जी उठी

6 साल पहलेमैंने मुंशी प्रेमचंद जी की लघुकथाओं का संग्रह ख़रीदा था। कथा संग्रह २ भागों में था परपढने का कभी समय ही नही मिला। करीब 2.5 वर्ष पहलेजब मेरी माँ का देहांत हुआ तब मन बड़ा ही व्यथित था। जीवन से मन उचट सा गया था। तब मैंने वो कथासंग्रह पढना शुरू किया पर 10-12 कथाओं के बाद पढने की हिम्मत ही न रही।



स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर जानते हैं, क्यों मानते है युवा उन्हें आपना आदर्श : National Youth Day

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोल्कता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था, उनका असली नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था, वह एक शिक्षित परिवार से थे, उनके पिता कोल्कता हाई कोर्ट में वकील थे, वह बचपन में बेहद शरारती थे लेकिन उनके घर का माहोल बेहद अध्यात्मिक और धार्मिक था, दर्शन, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज



शब्दनगरी में डिलीट किये गये लेख को वापस कैसे लायें?

नमस्र दोस्तों, मैं शब्दनगरी का नया सदस्य हूँ मैंने गलती से अपना लेख कल डिलीट कर दिया है अब मैउसमें कुछ शब्द जोड़ना चाहता हूँ मैं अपना लेख वापस कैसे लाऊं?



भारत रत्न अब चौधरी चरण सिंह को

कोई जीना ही जिंदगी समझा , और फ़साना बन गया कोई . अपनी हस्ती मिटाकर ए-अंजुम , अपनी हस्ती बना गया कोई . सुलक्षणा 'अंजुम' द्वारा कही गयी उपरोक्त पंक्तियाँ अक्षरशः सही प्रतीत होती हैं परम पूजनीय ,किसानों के मसीहा ,दलितों के देवता ,चौधरी चरण सिंह जी पर .२३ दिसंबर १९०२ को किसान परिवार में जन्मे चौधरी



अपना मन ही अपना कुरुक्षेत्र

आज प्रत्येक व्यक्ति का मन चलता फिरता कुरुक्षेत्र बना हुआ है| जहां पर हमारी निकृष्ट और उत्कृष्ट ,सद्गुण और दुर्गुण ,धर्म और अधर्म दोनों ही प्रकार की प्रुवृत्तियों में निरंतर द्वंद्व चलता रहता है| हमारी आंतरिक प्रुवृत्तियाँ हमसे वो सब करवा लेती है जिन्हें हम मन से तो स्वीकार नही करते लेकिन करने के लि



सच मानिए ‘आप और हम’ कुछ विशेष है

ये बात तो सब मानते है की भगवान् है हर व्यक्ति की सोच, शारीरिकर मानसिक स्थिति भिन्न बनाई है| हर व्यक्ति आकार प्रकार में दुसरे व्यक्ति से भिन्न है स्वभाव व् गुणों से लेकर हर चीज़ सब में अलग-अलग है निराली है क्या अपने कभी भी शांति से बैठकर ये सोचा है की हमारे अंदर क्या चीज़ ऐसी है जो हमको दूसरों से अलग



आत्मकेंद्रित होते युवा और समाज की आवश्यकता

इस तकनीकि के युग में आजकल के युवा इतने आत्मकेंद्रित हो गये है की उन्हें समाज या अपने आसपास के लोगों से मानो कोई सरोकार ही नही रह गया है| इसलिए आज घर के बुजुर्गों को अपने युवा हो रहे किशोरों से ये कहते सुनते है कि समाज में उठा बैठा करो, लोगों से मिला जुला करो, लोगों के यहाँ आया जाया करो थोड़े सोशल (सा



आखिर सुषमा क्यों पीछे हटी ?

आतंकवाद के खिलाफ नई दिल्ली में भारत ,रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के १५वें सम्मलेन में तीनों देशों ने इसके खात्मे का ऐलान किया है .साथ ही टेरर फंडिंग रोकने और आतंकी



तभी लेंगे शपथ .....

''औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाजार दिया .'' कैसी विडम्बना है जन्म देने वाली की ,जन्म देने का सम्मान तो मिलना दूर की बात है ,अपने प्यार के बदले में प्यार भी नहीं मिलता ,मिलती है क्या एक औलाद जो केवल मर्द की हवस को शांत करने का एक जरिया म



राजस्थान की संगठित शक्ति की जय हो

पद्मावती आजकल सुर्ख़ियों में हैं .हों भी क्यूँ न नारी शक्ति की जो मिसाल पद्मावती ने पेश की वह अनूठी है और ऐसी मिसाल ही होती हैं जो अनुकरणीय बन जाती हैं यही कारण है कि आज राजस्थान उनके सम्मान को लेकर भंसाली की सोच से ,भंसाली की फिल्म से लड़ रहा है और साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि भंस



तर्जे-बयां के फरोगे-हुस्न की खुशबू का लुत्फ...

तर्जे-बयां, यानि किसी चीज के बारे में कहने-सुनाने का तरीका... इस तर्जे-बयां का हमारी जिंदगी में और उसके खुशनुमेंपन में बेहद संजीदा रोल है... हम हालांकि आज की तेज जिंदगी में इस तर्जे-बयां की खूबसूरती की खुशबू से लगातार महरूम होते जा रहे हैं... चलिए, थोड़ी बातचीत इसी तर्



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