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इंसान के व्यवहार को दर्शाती कहानी

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क्या व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखना चाहिए ?

शब्दनगरी को कैसे और बेहतर व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जोड़ सकते है ? कैसे एक राष्ट्रीय विख्यात मंच बना सकते है कि जैसे २०१५ में thequint thewire बने और आज देश की प्रमुख website media news में एक हैं वैसे ही हिंदी लेखन में कैसे हम इसे उस स्तर पे ले जा सकते है ?

अगर जीवन बोझ लगने लगे तो क्या करना चाहिए ?


प्रियंका शर्मा
ज़िन्दगी बोझ लगे , ऐसे दिन ही भगवन न दिखाए . ऐसे में सबसे पहले अपने आसपास का माहौल बदलना चाहिए तुरंत . और कोई अच्छा काम जो आपको दिन में व्यस्त रक्खे वो करना च्चिए ... एक नशा अपनाया हुआ बताती हूँ , पशु पक्षियों को खाना खिलाये और थोड़ा उनको दुलार करें, उनके साथ दस मिनट रहे ,,,, ये गजब का जादू करता है ..... दूसरा काम ये करे की आपकी जो भी परेशानी हो उसे एक पात्र लिख कर भगवन के मंदिर में रक्खे , यकीन माने बहुत अच्छा लगेगा
भरत का भारत
यह शब्द मुस्लिम्स ,दलित के लिए ही है ,आज ही का उदाहरण है हरियाणा के नवीन जी जिन्हे 24 जुलाई को मुस्लिम भीड़ ने निहत्या मारा और आज उनका देहांत हो गया |

मित्र बनाने के बारे में जानना चाहते हैं ?

आकाश गुप्ता

सत्य, साथ और विश्वास किसी को भी मित्र बनाने के किये आवश्यक कारक है। लेकिन मित्र बनाने में अक्सर ये प्रयास एक तरफा होते हैं। मेरे हिसाब से नाउम्मीदी इन सभी कारको में सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। क्योंकि दोस्ती में उम्मीद और शर्ते नहीं होती। 

6:30 बज गए वो आते ही होंगे मैंने बाल ठीक किए कमर से लिपटा साडी का पल्लू खोल दिया डोरबेल बजी वो आ गए उनकी आँखों में खुद को देखना चाहती हूँ उनके होंठों पर हंमेशा मैं गुनगुनाती हूँ..! उनके दहलीज़ पर कदम रखते ही मेरा दरवाज़ा खोलना मैं देखना चाहती हूँ मेरे सत्कार से उनकी मौजूदगी से बिखेरते हुए घर में पति के स्वाभिमान को..! उनका हाय मैडम कैसी है इस घर की रानी कहकर सोफे पर पसर जाना मेरे हाथ से चाय का प्याला टेबल पर रख कर मेरी आँखों में डूब जाना उफ्फ़..! घड़ी में देखकर मेरा मुँह फुलाकर कहना पूरे दस मिनट लेट हो जनाब उन पर आधिपत्य जताकर देखना चाहती हूँ उनकी अठखेलियां मुझे अपने करीब खींचकर आँखों में आँखें डालकर सौरी बोलना..! खाने के टेबल पर अपने हाथों से पहला कौर मुझे खिलाना उनकी इस परवाह पे मेरा इतराना खाने के बाद उनका मेरे हाथों को चूमना..! शयनकक्ष में गर्माते बिस्तर पर मेरी चूड़ीयों से खेलना मेरी पलकों पर उनके लबों की सरगोशियों के जवाब में मेरा उन पर बरसना..! रात के रतजगे का कहर ढ़ोती सुबह उनकी बोझिल पलकों पर मेरे सुगंधित गीले बालों से मेरा खेलना ओर कमर से मुझे अपनी ओर खिंचना मेरे दिन की हसीन शुरुआत है..! उनके आफिस जाते वक्त कोट के बटन अपने हाथों से बंद कर के मेरा बोलना तुम मेरे हो इस दायरे से न तुम बाहर निकलना न किसीको अंदर आने की इजाज़त देना..! उनके आसपास मेरे जीवन की नैया चले कमर में पल्लू लपेटती पति के इशारों पर थिरकती मैं बस एक उनके दिल तक पहुँचने का रास्ता जानूँ..! क्या कुछ ज्यादा सोच लिया मैंने होता होगा ना एक संसार एसा भी, साथ जीने की कसमे खाने वाले दो लोगों का..! ये मेरी कल्पना में बसा संसार है मेरी भावनाओं से अंजान वो अपने आप में मशगूल एक सुस्त आम सी ज़िंदगी ढो रहे है, उनकी नज़रों में मैं घर के अन्य सामान बराबर हूँ.! कट ही रही है ज़िंदगी वो अपने जहाँ में खुश है, मैं मेरे सपनो के जहाँ में, एसी भी तो ज़िंदगी होती होगी।। भावु।

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#चाँदी सी धवल सुबह में अभिराज सा कोई आकर बंद पलकों पर सुगंधित लबों से शृंगार कर गया वो विरक्त सी मेरी मुस्कान में #रंग हज़ार भर गया वो मधुमास की पहली बेला में विरह की पीर हर गया वो आँसू के सागर भरती आँखों में #प्रेमिल पुष्प भर गया वो अमर प्रतिक्षित अंतहीन नभ में चिर मिलन की सरिता दे गया वो द्रुत पंख वाले मन में #उड़ान की परवाज़ भर गया वो पीड़ा की मधुर कसक में शीत परत संदली गूँथ गया वो प्रतिपल की झंखना को #युगों का आलिंगन दे गया वो मुझ जीवन विधुर निशा सा कुंकुम सा भर गया वो अतृप्त उर धरा की #तृष्णा मिटा गया वो भावु।।

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