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आलोक  जी,   आपकी  समस्या  का  निवारण  कर  दिया  गया  है. यदि  आपको  प्लेटफार्म के  नए  संस्करण  का  प्रयोग  करने  में  कोई  और  समस्या  आती  है  तो  अवश्य  बताइयेगा. 

मैं अपने हिंदी ब्लोग्स पे ट्रैफिक कैसे बढ़ा सकता हु ?

ये है मेरी वेबसाइट है क्या इसमें कोई कमी है ? कृपया मदद करें |

Tushar Thakur
 Aapne सही   तरीके   से सवाल नहीं   पूछा हैं मैं   एक   वेबमास्टर hun आप सही se sawal करिये पूरी   जानकारी   के साथ

पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि PMT क्लियर कर लेता। इसलिए दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ किया गया। जमीन, जायदाद जेवर गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन वहाँ धोखा हो गया। फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ भी चल नहीं पाया। फेल होने लगा.. डिप्रेशन में रहने लगा। रक्षाबंधन पर घर आया और यहाँ फांसी लगा ली। 20 दिन बाद माँ बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा के आत्म हत्या कर ली। अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया। माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं ... मैंने देखा कि कुछ माँ बाप अपने बच्चों को Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है। आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Grading ऐसे करती है जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की जाती है। पूरे देश के करोड़ों बच्चों को एक ही Syllabus पढ़ाया जा रहा है ....... For Example - जंगल में सभी पशुओं को एकत्र कर सबका इम्तहान लिया जा रहा है और पेड़ पर चढ़ने की क्षमता देख के Ranking निकाली जा रही है। यह शिक्षा व्यवस्था ये भूल जाती है कि इस प्रश्नपत्र में तो बेचारा हाथी का बच्चा फेल हो जाएगा और बन्दर First आ जाएगा। अब पूरे जंगल में ये बात फ़ैल गयी कि कामयाब वो जो झट से कूद के पेड़ पर चढ़ जाए। बाकी सबका जीवन व्यर्थ है। इसलिए उन सब जानवरों के, जिनके बच्चे कूद के झटपट पेड़ पर न चढ़ पाए, उनके लिए कोचिंग Institute खुल गए, व्हाँ पर बच्चों को पेड़ पर चढ़ना सिखाया जाता है। चल पड़े हाथी, जिराफ, शेर और सांड़, भैंसे और समंदर की सब मछलियाँ चल पड़ीं अपने बच्चों के साथ, Coaching institute की ओर ........ हमारा बिटवा भी पेड़ पर चढ़ेगा और हमारा नाम रोशन करेगा। हाथी के घर लड़का हुआ ....... तो उसने उसे गोद में ले के कहा- 'हमरी जिन्दगी का एक ही मक़सद है कि हमार बिटवा पेड़ पर चढ़ेगा।' और जब बिटवा पेड़ पर नहीं चढ़ पाया, तो हाथी ने सपरिवार ख़ुदकुशी कर ली। अपने बच्चे को पहचानिए। वो क्या है, ये जानिये। हाथी है या शेर ,चीता, लकडबग्घा , जिराफ ऊँट है या मछली , या फिर हंस , मोर या कोयल ? क्या पता वो चींटी ही हो ? और यदि चींटी है आपका बच्चा, तो हताश निराश न हों। चींटी धरती का सबसे परिश्रमी जीव है और अपने खुद के वज़न की तुलना में एक हज़ार गुना ज्यादा वजन उठा सकती है। इसलिए अपने बच्चों की क्षमता को परखें और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें.. हतोत्साहित नही......

rajkumarshaw
बहुत खूब।

महात्मा गांधी जी ने ऐसा क्या किया था जिससे कि उनकी फोटो भारतीय नोंटो पर छपती है अौर शहीद भगत् सिंह जी ने ऐसा क्या नहीं किया था कि उनको शहीद के शिवाय कुछ नहीं मिला

अमितेश मिश्र

भगत सिंह ने शहादत कुछ मिलने के लिए तो दी नहीं थी? आप ऐसा क्यों चाहते हैं की उन्हें भी नोटों पर छापा जाये और वो भी पैसे से जुड़े हर भ्रष्टाचार के गवाह बने. इतनी सस्ती भी नहीं थी उनकी क़ुरबानी विकास जी!




आपकी रचनाओं और अनमोल सहयोग से प्रेरित होकर हमने आपकी रचनाओं को पुरुस्कृत करने का निर्णय लिया है ताकि लेखन के साथ साथ हम अपने सदस्यों का उत्साहवर्धन भी कर सकें। साथ ही हम हर दिन आपकी लिखी रचनाओं से ही एक उत्क्रष्ट रचना चुन कर, उसे शब्दनगरी के होम पेज पर " आज का लेख " शीर्षक में प्रदर्शित करेंगे। 

आपको हमारा ये प्रयास कैसा लगा, हमें अवश्य बताएं . 



अभिनव अरुण
अंतरजाल पर साहित्यिक सामग्री की उपलब्धता के बावजूद उनका मानकीकरण नहीं हो पाया है .पाठक हैं लेकिन उनके सामने क्या स्तरीय ,विश्वसनीय , पठनीय है इसका श्रेणीकरण नहीं है .ऐसे में पहली चुनौती अच्छी रचनाओं और समाज के लिए कुछ सकारात्मक सशक्त करने के ध्येय के साथ लिखने वालों को और उनकी रचनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रसारित प्रचारित करना है . शब्द्नगरी को यहाँ लिखे गए को पाठकों तक पहुँचाने का महती कार्य करना है .अन्यथा आज नेट पर सक्रिय हर रचनाकार अनेक मंचों और सोशल साइट्स और ब्लॉग्स पर लिख रहा है .आई आई टी जैसे बड़े और मानिंद संस्थानों की कक्षाओं में यहाँ लिखे गए को पढने और सुनाने पढ़ाने की पहल करनी चाहिए और फिर वोटिंग से रचना का निर्धारण कर सम्मानित करना चाहिए .अभी यहाँ सिर्फ लिखा जा रहा पढने और प्रतिक्रिया देने का अनुपात कम है . यानी हम सब लेखक तो हैं पर पाठक नहीं हैं अथवा अपेक्षित संख्या में नहीं हैं .सादर शुभकामनाओं सहित ! 

भारत की आज कि इस स्थिति को देखते हुए आतंकवादी भी बहुत खुश होते होंगे चलो अब हमें भारत में किसी भी तरह के विस्फोट की आवश्यकता नहीं है और न ही कहीं से गलत रास्ते से घुसपैठ करने की आवश्यकता है क्योंकि भारत कुछ लोग स्वयं ही एक आतंकवाद को जन्म दे रहे हैं और आपस में लड - भिड़ रहे हैं इनके देश का बिनाश तो इनके द्वारा स्वयं ही किया जा रहा है और मैं स्वयं यह देख रहा हूँ कि कुछ लोग तो देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें रास्ते से हटाने के लिए बहुत से उल्टे सीधे बयान दे रहे हैं उन्हें देश की चिंता न होकर अपनी कुर्सी की चिंता है चाहे देश की जनता मरती रहे। आतंकवाद का मतलब यह नहीं है कि किसी देश पर जबरन कब्जा कर लेना या किसी देश पर आक्रमण कर देना या किसी को जान से मार देना नही है बल्कि आतंकवाद का मतलब है किसी भी काम की या किसी भी बात की जादा अत कर देना है । हो सकता है मेरे द्वारा लिखित विचार में कुछ गलती हो उसके लिए में माफी चाहुंगा ।। विचार प्रस्तुत कर्ता सचिन कुमार सिद्धार्थ

शब्दनगरी संगठन
इसमें  प्रश्न  क्या  है?  

मैं सिर्फ ये पूछना चाहती हूँ कि क्या लिखने का कुछ रुपया भी मिलता हैं ?

मिरे गीतोँ के हिरदे मेँ समाने क्योँ चले आए ? क़लम की ऑंख से आँसू बहाने क्यों चले आए ? दिया बनकर तुम्हें जब ग़ैर का घर जगमगाना था तो दर्द का तूफाँ उठाने क्यों चले आए ?

नमस्कार मित्रों,

आपको यह जानकार अति खुशी होगी कि इंजी॰ एन॰आर॰ बैरवा द्वारा व्यवहारिक, आधुनिक एवं मूलभूत तकनीकी ज्ञान से परिपूर्ण, भारतीय रेल में कार्यरत रेलपथ एवं अन्य कर्मचारियों के लिए अति लाभदायक हिन्दी पुस्तिका " रेलपथ गाइड" का सृजन किया गया है; जिसका विमोचन परम श्रध्येय श्री विश्वेश चौबेजी, निदेशक-इरिसेन (Indian Railways Institute of Civil Engineering ) पुणे द्वारा किया गया है । इस अविस्मरणीय क्षण के बारे मे अधिक जानकारी हेतु 'ज्ञानदीप' अंक 74 (अप्रेल-जून 2015) के पृष्ठ संख्या 3 पर देखे ।

आशा है कि यह मौलिक पुस्तिका वर्तमान समय की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगी ।

इस पुस्तिका के व्यापक प्रचार-प्रसार मे आपके सहयोग की अपेक्षा है ताकि अधिकतम रेलपथ कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सके ।

धन्यवाद,


नोट : कूरियर से यह पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क करें ।: मोबाइल नम्बर - 09601255321.

मूल्य : पुस्तक की कीमत + डिलिवरी चार्ज (पैकिंग + कूरियर चार्ज).


(Ref. Link address : https://sites.google.com/site/trackcellrjt/hindi-pustika-relapatha-ga-ida )

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