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मगध के सिंहासन पर बैठने के बाद आचार्य चाणक्य की सहायता से चंद्रगुप्त मौर्य ने संपूर्ण उत्तर भारत के बचे प्रांतों को अपने राज्य में सम्मिलित किया।


चंद्रगुप्त मौर्य एक लोक हितकारी शासक था उस समय सुराष्ट्र प्रांत में पानी की बहुत कमी रहती थी।उसने अपने प्रांतीय शासक पुष्य गुप्त वैश्य के द्वारा अत्यधिक धन खर्च करके वहां सुदर्शन झील का निर्माण कराया।


अपने अंतिम समय में चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन भिक्षु भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण की, कुछ समय पश्चात मगध में भीषण अकाल पड़ा। चंद्रगुप्त मौर्य ने इस अकाल से निपटने में जनता की प्रत्येक प्रकार से सहायता की।


जैन अनुश्रुति के अनुसार उसके पश्चात चंद्रगुप्त मौर्य कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर चला गया वहीं उसने अनशन के द्वारा अपने प्राण त्याग दिए। लगभग 24 वर्ष तक शासन करने के पश्चात 297 ईसा पूर्व में चंद्र गुप्त मौर्य की मृत्यु हुई। इस प्रकार से भारत का यह महान सम्राट इतिहास के पन्नों में अमर हो गया।


जैन धर्म की इस अनुश्रुति कि चंद्रगुप्त मौर्य ने अनशन के द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे कुछ विद्वान स्वीकार नहीं करते परंतु उस काल को देखते हुए यह असंभव भी नहीं जान पड़ता।


चंद्रगुप्त मौर्य की दो रानियां थी दुर्धारा और कार्नेलिया हेलेना।


दुर्धरा का पुत्र बिंदुसार हुआ जो चंद्रगुप्त के पश्चात मगध के सिंहासन पर आसीन हुआ


इसे देख सकते हैं:-

चन्द्रगुप्त मौर्य

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हर्ष वर्धन जोग
बताना तो मुश्किल है. तरह तरह की किम्वदंतियां हैं. बहरहाल श्रवणबेलगोला जब गए तो यही सुनने को मिला जो आपने लिखा है.

करोना काल ,कश्मकश है काम की।राहत की आस में लाईनें लगी जाम की। सहारे की तलाश में सीख मिली सोशल डिस्टेन्स की। हमें रोना(करोना) न पड़ता काश राह न छोड़ते मानवता की।

आत्मनिरीक्षण आवश्यक मनुष्य को अपने जीवन में आत्मनिरीक्षण नित्य करते रहना चाहिए। प्रतिदिन उसे सोने से पूर्व दिनभर के कार्य कलाप पर दृष्टि डालनी चाहिए। तभी उसे ज्ञात हो पाता है कि इस दिन उसने कौन-से अच्छे कार्य किए और कौन-से अकरणीय कार्य किए। कितने लोगों का उसने दिल दुखाया और कितने लोगों की उसने सहायता की। आत्मपरीक्षण के बिना मनुष्य अपने गुणों और दोषों दोनों की ही जानकारी नहीं ले सकता। यदि उस दिन आचरण दोषपूर्ण रहा हो, तो उन दोषों को दूर करने का उपाय करना चाहिए। विश्लेषण करने पर यदि लगे कि कहीं चूक हो गई, तो अगले दिन उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार धीरे-धीरे मनुष्य अपनी कमियों को दूर करने में समर्थ हो सकता है। यदि लगे कि आज कुछ अच्छे काम किए, तो अगले दिन और अधिक अच्छे कार्य करने चाहिए। इस प्रकार अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त की जा सकती है और शुभकार्यों को बढ़ाया जा सकता है। मनुष्य की विजय का यह एक सरल-सा उपाय है। तभी किसी मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति सम्भव हो सकती है। आत्मिक उन्नति चाहने वाले मनुष्य के लिये जितना साँस लेना अनिवार्य होता है, उसके लिए आत्मनिरीक्षण भी उतना ही आवश्यक होता है। सूक्ष्मातिसूक्ष्म दोषों को जानकर आत्मनिरीक्षण करने वाला व्यक्ति उन्हें स्वयं से दूर करने में समर्थ हो जाता है। तब वह संयमी बन जाता है। मनुष्य के जितने दोष दूर होते चले जाते हैं, उतना ही उसका मन दर्पण की तरह निर्मल एवं पवित्र होता चला जाता है । जिस दिन मनुष्य का मन पूर्णरूप से शुद्ध हो जाता है, उस दिन वह अपने सात्विक स्वरूप को देखकर आनन्द की अनुभूति कर पाता है। यह कोई कठिन कार्य नहीं है। केवल इच्छाशक्ति दृढ़ होनी चाहिए। इस तरह निरन्तर प्रयत्न करते रहने से व्यक्ति महानता को प्राप्त हो जाता है । आत्मनिरीक्षण पर बल देते हुए किसी कवि ने मनुष्य को निम्न श्लोक में समझाया है- प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः। किन्नु मे पशुभिस्तुल्यं किन्नु सत्पुरुषैरिति।। अर्थात् प्रतिदिन मनुष्य आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उसे यह देखना चाहिए कि आज उसका आचरण पशुओं के समान था अथवा सत्पुरुषों के समान था? सुभाषितकार ने आत्म-निरिक्षण के माध्यम से स्वयं को सुधारने का सटीक उपाय बताया है। मनुष्य को यह निरीक्षण करना चाहिए कि उसमें कौन-सी पशुओं जैसी प्रवृत्तियाँ हैं? उन प्रवृत्तियों को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। दूसरी तरफ किसी महापुरुष के साथ अपनी तुलना करके देखना चाहिए कि उनमें जो भी अच्छाइयाँ हैं, वे उसमें हैं या नहीं। महान लोगों में विद्यमान उन अच्छाइयों को ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। आत्मनिरीक्षण किसी भी समय किया जा सकता है। रात का समय इसके लिए सबसे अच्छा होता है। मनुष्य इस समय तक अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाता है। तब वह शान्त मन से बैठकर या लेटकर पूरे दिन के घटनाचक्र को फिल्म की रील की तरह चलाकर देख सकता है। उसे देखकर वह अपना परीक्षण स्वयं कर सकता है। दिनभर में उसका कौन-सा व्यवहार या कार्य उचित था और कौन-सा अनुचित? इस सबका फैसला वह स्वयं जज बनकर कर सकता है। उसी के अनरूप अगले दिन के लिए वह दृढ़प्रतिज्ञ होकर कार्य कर सकता है। कोई उसे उसकी गलती के लिए टोके या अपमानित करे, उससे अच्छा यही है कि उसे स्वयं ही सम्हल जाना चाहिए। किसी दूसरे को कहने का अवसर ही नहीं देना चाहिए। यह सब मनुष्य के आत्मविश्लेषण के कारण ही सम्भव हो सकता है। अतः मनुष्य को इस शुभकार्य को शीघ्र ही आरम्भ कर देना चाहिए। उसे आत्मनिरीक्षण करते हुए, स्वयं ही अपना मार्गदर्शक बन जाना चाहिए। ऐसा करके दोषरहित बनता हुआ वह मनुष्य सबकी प्रशंसा का पात्र बन जाएगा। निस्सन्देह ऐसे मनुष्य का यश चारों दिशाओं में प्रसारित होगा। चन्द्र प्रभा सूद

युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क कानपुर। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे पुलिस अभिरक्षा मे पुलिस के हाथो  मारा गया है। बताया जा रहा है कि कानपुर टोल नाके से 25 किलोमीटर दूर विकास दुबे को ला रही गाडी पलट गई। पुलिसिया कहानी अनुसार  विकास दुबे पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस की गोली का शिकार हो गया। विकास दूबे की मौत की पुष्टि करते हुए कानपुर एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि इस एनकाउंटर मे चार पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं।  एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे पुलिसवालों का हथियार छीनकर भाग रहा था उसे सरेंडर करने को कहा लेकिन विकास दुबे ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी और उसकी मौत हो गई है।  🔴 प्रत्यक्षदर्शी ने सुनी फायरिंग की आवाज मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमने फायरिंग की आवाज सुनी थी लेकिन  गाड़ी का एक्सीडेंट नहीं हुआ थ। हमने गोली की आवाज सुनी। इसके बाद पुलिस ने हमें भगाने की कोशिश की हम वहां से हट गए. हम लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी थी किसी ने किसी तरह के एक्सीडेंट या फिर गाडी पलटने की कोई आवाज नही सुनी।  🔴पिस्टल छीनकर भाग रहा था विकास दुबे एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि जैसे ही गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, विकास दुबे घायल पुलिसकर्मी का पिस्टल छीनकर भागने लगा. पुलिस ने कई बार उसे सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी।जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को सीने और कमर में गोली लगी।  🔵 प्रत्यक्षदर्शी ने सुनी फायरिंग की आवाज मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि हमने फायरिंग की आवाज सुनी थी. गाड़ी का एक्सीडेंट नहीं हुआ था. हमने गोली की आवाज सुनी. इसके बाद पुलिस ने हमें भगाने की कोशिश की. हम वहां से हट गए. हम लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी थी।  🔴 कैसे हुआ हादसा विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर कानपुर पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया, '5 लाख के इनामी विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किये जाने के बाद पुलिस और एसटीएफ टीम आज 10 जुलाई को कानपुर नगर ला रही थी. कानपुर नगर भौंती के पास पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गई. विकास दुबे और पुलिसकर्मी घायल हो गए.'कानपुर पुलिस के मुताबिक, 'इस दौरान विकास दुबे ने घायल पुलिस कर्मी की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की. पुलिस टीम द्वारा पीछा कर उसे घेर कर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं माना और पुलिस टीम पर फायर करने लगा. पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की. इस दौरान विकास दुबे घायल हो गया।   🔴 पुलिस का क्या है कहना पुलिस के अनुसार, घायल विकास दुबे को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज का दौरान 5 लाख के इनामी विकास दुबे की मौत हो गई. कानपुर पुलिस की ओर से अभी बयान जारी किया गया है. इस बाबत कोई भी पुलिस अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बच रहा है।  🔴उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से कल विकास दुबे पकड़ा गया था. उसकी गिरफ्तारी बड़े फिल्मी अंदाज में हुई थी. उज्जैन पुलिस की माने तो विकास दुबे महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा था. पहले माली को शक हुआ, फिर मंदिर के गार्ड ने विकास दुबे की पहचान की। इसके बाद स्थानीय पुलिस को बुलाया गया, जिसकी पूछताछ में पहले विकास दुबे ने अपना नाम शुभम बताया, लेकिन बाद में खुद को घिरा देखकर उसने चिल्लाया कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला. इसके बाद उज्जैन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और देर रात उसे यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया।  🔵विकास दुबे ने की थी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कानपुर के बिकारू गांव के रहने वाले विकास दुबे पर आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या का आरोप था. पुलिस टीम उस पर दबिश देने गई थी, तभी पहले से घात लगाए विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला बोल दिया था. 200 से 300 राउंड की फायरिंग की गई थी. इस दौरान सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे.आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के बाद विकास दुबे और उसके गुर्गे फरार हो गए थे. विकास दुबे की तलाश में पूरे प्रदेश को छावनी में बदल दिया गया था. घटना के 6 दिन बाद विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था। पुलिस के अनुसार, घायल विकास दुबे को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज का दौरान 5 लाख के इनामी विकास दुबे की मौत हो गई। यह बयान कानपुर पुलिस की ओर से जारी किया गया है। इस बाबत कोई भी पुलिस अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बच रहा है।  🔴 विकास दुबे के सरेंडर से लेकर उसकी मौत तक के सफर पर एक नजर ✔️ गुरुवार 9 जुलाई को सुबह करीब 9.30 बजे विकास दुबे ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में सरेंडर किया. जानकारी के मुताबिक विकास ने मंदिर के गार्ड को अपना नाम बताया, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।  ✔️इसके बाद उज्जैन पुलिस ने ही उससे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की. जानकारी के मुताबिक, उसने खुलासा किया था कि वो शवों को जलाना चाहता था।  ✔️इस बीच कानपुर में यूपी पुलिस ने विकास दुबे की पत्नी ऋचा और उसके नाबालिग बेटे को भी हिरासत में ले लिया.पुलिस ने ऋचा से पूछताछ की।  ✔️उज्जैन में विकास दुबे पर किसी तरह का कोई केस न होने के कारण और कानपुर एसएसपी के आग्रह पर उसे शाम में ही यूपी पुलिस की एसटीएफ की टीम के हवाले कर दिया गया, जो शाम में ही वहां पहुंची थी।  ✔️इसके बाद एसटीएफ की टीम एक बड़े काफिले के साथ उसे लेकर सड़क मार्ग से ही उज्जैन से कानपुर के लिए रवाना हो गई।  ✔️शुक्रवार 10 जुलाई सुबह करीब साढ़े 6 बजे विकास दुबे को लेकर आ रही एसटीएफ की टीम ने कानपुर की सीमा में प्रवेश किया. जानकारी के मुताबिक उसे किसी अज्ञात जगह पर ले जाकर पूछताछ करनी थी औऱ फिर 10 बजे कोर्ट में पेश करना था।  ✔️करीब 7:25 बजे एसटीएफ की वो गाड़ी रास्ते में ही पलट गई, जिसमें विकास दुबे बैठा था. जानकारी के मुताबिक इस दौरान उसने बचकर भागने की कोशिश की और पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हो गई. उसे गोली भी लगी।  ✔️घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 7:45 बजे इस कुख्यात गैंगस्टर की मौत हो गई।

कानपुर। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे पुलिस अभिरक्षा मे पुलिस के हाथो मारा गया है। बताया जा रहा है कि कानपुर टोल नाके से 25 किलोमीटर दूर विकास दुबे को ला रही गाडी पलट गई। पुलिसिया कहानी अनुसार विकास दुबे पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस की गोली का शिकार हो गया। विकास दूबे की मौत की पुष्टि करते हुए कानपुर एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि इस एनकाउंटर मे चार पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे पुलिसवालों का हथियार छीनकर भाग रहा था उसे सरेंडर करने को कहा लेकिन विकास दुबे ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी और उसकी मौत हो गई है। 🔴 प्रत्यक्षदर्शी ने सुनी फायरिंग की आवाज मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमने फायरिंग की आवाज सुनी थी लेकिन गाड़ी का एक्सीडेंट नहीं हुआ थ। हमने गोली की आवाज सुनी। इसके बाद पुलिस ने हमें भगाने की कोशिश की हम वहां से हट गए. हम लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी थी किसी ने किसी तरह के एक्सीडेंट या फिर गाडी पलटने की कोई आवाज नही सुनी। 🔴पिस्टल छीनकर भाग रहा था विकास दुबे एसएसपी दिनेश कुमार ने कहा कि जैसे ही गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, विकास दुबे घायल पुलिसकर्मी का पिस्टल छीनकर भागने लगा. पुलिस ने कई बार उसे सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी।जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को सीने और कमर में गोली लगी। 🔵 प्रत्यक्षदर्शी ने सुनी फायरिंग की आवाज मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि हमने फायरिंग की आवाज सुनी थी. गाड़ी का एक्सीडेंट नहीं हुआ था. हमने गोली की आवाज सुनी. इसके बाद पुलिस ने हमें भगाने की कोशिश की. हम वहां से हट गए. हम लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी थी। 🔴 कैसे हुआ हादसा विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर कानपुर पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया, '5 लाख के इनामी विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किये जाने के बाद पुलिस और एसटीएफ टीम आज 10 जुलाई को कानपुर नगर ला रही थी. कानपुर नगर भौंती के पास पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गई. विकास दुबे और पुलिसकर्मी घायल हो गए। कानपुर पुलिस के मुताबिक, 'इस दौरान विकास दुबे ने घायल पुलिस कर्मी की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की. पुलिस टीम द्वारा पीछा कर उसे घेर कर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं माना और पुलिस टीम पर फायर करने लगा. पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की. इस दौरान विकास दुबे घायल हो गया। 🔴 पुलिस का क्या है कहना पुलिस के अनुसार, घायल विकास दुबे को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज का दौरान 5 लाख के इनामी विकास दुबे की मौत हो गई. कानपुर पुलिस की ओर से अभी बयान जारी किया गया है. इस बाबत कोई भी पुलिस अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बच रहा है। 🔴उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से कल विकास दुबे पकड़ा गया था. उसकी गिरफ्तारी बड़े फिल्मी अंदाज में हुई थी. उज्जैन पुलिस की माने तो विकास दुबे महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा था. पहले माली को शक हुआ, फिर मंदिर के गार्ड ने विकास दुबे की पहचान की। इसके बाद स्थानीय पुलिस को बुलाया गया, जिसकी पूछताछ में पहले विकास दुबे ने अपना नाम शुभम बताया, लेकिन बाद में खुद को घिरा देखकर उसने चिल्लाया कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला. इसके बाद उज्जैन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और देर रात उसे यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया। 🔵विकास दुबे ने की थी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कानपुर के बिकारू गांव के रहने वाले विकास दुबे पर आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या का आरोप था. पुलिस टीम उस पर दबिश देने गई थी, तभी पहले से घात लगाए विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला बोल दिया था. 200 से 300 राउंड की फायरिंग की गई थी. इस दौरान सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के बाद विकास दुबे और उसके गुर्गे फरार हो गए थे. विकास दुबे की तलाश में पूरे प्रदेश को छावनी में बदल दिया गया था. घटना के 6 दिन बाद विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था। पुलिस के अनुसार, घायल विकास दुबे को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज का दौरान 5 लाख के इनामी विकास दुबे की मौत हो गई. यह बयान कानपुर पुलिस की ओर से जारी किया गया है। इस बाबत कोई भी पुलिस अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बच रहा है। 🔴 विकास दुबे के सरेंडर से लेकर उसकी मौत तक के सफर पर एक नजर ✔️ गुरुवार 9 जुलाई को सुबह करीब 9.30 बजे विकास दुबे ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में सरेंडर किया. जानकारी के मुताबिक विकास ने मंदिर के गार्ड को अपना नाम बताया, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। ✔️इसके बाद उज्जैन पुलिस ने ही उससे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की. जानकारी के मुताबिक, उसने खुलासा किया था कि वो शवों को जलाना चाहता था। ✔️इस बीच कानपुर में यूपी पुलिस ने विकास दुबे की पत्नी ऋचा और उसके नाबालिग बेटे को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस ने ऋचा से पूछताछ की। ✔️उज्जैन में विकास दुबे पर किसी तरह का कोई केस न होने के कारण और कानपुर एसएसपी के आग्रह पर उसे शाम में ही यूपी पुलिस की एसटीएफ की टीम के हवाले कर दिया गया, जो शाम में ही वहां पहुंची थी। ✔️इसके बाद एसटीएफ की टीम एक बड़े काफिले के साथ उसे लेकर सड़क मार्ग से ही उज्जैन से कानपुर के लिए रवाना हो गई। ✔️शुक्रवार 10 जुलाई सुबह करीब साढ़े 6 बजे विकास दुबे को लेकर आ रही एसटीएफ की टीम ने कानपुर की सीमा में प्रवेश किया. जानकारी के मुताबिक उसे किसी अज्ञात जगह पर ले जाकर पूछताछ करनी थी औऱ फिर 10 बजे कोर्ट में पेश करना था। ✔️करीब 7:25 बजे एसटीएफ की वो गाड़ी रास्ते में ही पलट गई, जिसमें विकास दुबे बैठा था. जानकारी के मुताबिक इस दौरान उसने बचकर भागने की कोशिश की और पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हो गई. उसे गोली भी लगी। ✔️घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 7:45 बजे इस कुख्यात गैंगस्टर की मौत हो गई।

*आज का सुविचार* ______________________ *#आत्मनिर्भर* *#आत्मनिर्भर* एक बड़ी गलती जो लोग करते हैं वो है अपने ऊपर किसी रूचि को थोपने का प्रयास करना । आप अपने जूनून को नहीं चुनते ; आपका जूनून आपको चुनता है। घमंड न करें। दिखावा ना करें। हमेशा कोई न कोई आपसे बेहतर होता है। ______________________ *#सुप्रभातम* *#वंदे मातरम* *🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳*

ज्योति वशिष्ठ
हां, निश्चित रूप से ऐसा ऐप है और इसका नाम "योवो" है, जो सबसे अच्छा साबित हुआ है क्योंकि इसे पेश किया गया है और इसने कई एप्स जैसे पीछे छोड़ दिया है जैसे कि टिक्टोक, हेलो और लाइक क्योंकि उपयोगकर्ता न केवल बना सकते हैं और स्क्रॉल कर सकते हैं। वीडियो लेकिन मंच पर अपने वीडियो अपलोड करके भी बहुत पैसा कमा सकते हैं।
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