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प्रश्नों पर प्रतिक्रिया दीजिये

अकेला इन्सांन से पूछो अकेला पण क्या है

5+7+4=364730
9+6+3=456990
8+2+9=912672
then
7+3+5=??????


इसका आप भाइयों में कोई भी एक भाई हल करके इसका उत्तर दें .

सभी पाठको का हार्दिक अभिनंदन,


बीते दिनों कुछ राजनैतिक बदलाव हुए।


एक मुद्दा बहुत चर्चा ने है "सभी यांत्रिक और अवैध बूचड़खाना बंद होंगे।"

सुनने में अच्छा लगता है कुछ नहीं से तो कुछ सही।

मेरे मन में एक सवाल है :


"क्या बूचड़खाना यांत्रिक हो या नहीं हो ,अवैध हो या न हो, क्या बूचड़ खाने जहाँ मासूम बेजुबानो की दर्दनाक हत्या की जाती है,


किसी भी तरीके से सही है ?????

  •   नहीं (0 वोट )
  •   कभी भी नहीं (1 वोट )
  •   हाँ (0 वोट )
t k sharma   |   19 मार्च 2017

भय बिन प्रीति न होई

इ वि एम् के साथ छेद शाड़ हुई क्या ??

सामाजिक मीडिया के कई रूप हैं जिनमें कि इन्टरनेट फोरम, वेबलॉग, सामाजिक ब्लॉग, माइक्रोब्लागिंग, विकीज, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, फोटोग्राफ, चित्र, चलचित्र आदि सभी आते हैं। अपनी सेवाओं के अनुसार सोशल मीडिया के लिए कई संचार प्रौद्योगिकी उपलब्ध हैं। लेकिन आजकल इस सबका प्रयोग जिन परिपेक्ष्य के लिए है उसके विपरीत हो रहा है । फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प एवम अन्य जो बहुचर्चित एवम सामान्य लोगो के पहुच तक है सिर्फ शुभ-प्रभात, शुभ-रात्रि तक तथा दूसरे के पोस्ट चुराकर प्रकाशित करने तक रह गया है । फेसबुक में हिंदी में " आपके मन में क्या है " तथा अंग्रेजी में " what's on your mind " ऐसा लिखा है लेकिन लोग " फलाने ( अमुक ) के मन में क्या है " या अंग्रेजी में " what's on others mind " समझते है और चुराकर चिपका दिया ।


निवेदन : - यहाँ सभी लोग शिक्षित है इसलिए सही शब्दो में टिपण्णी करे और मन को आवेग में नही लाएंगे और सहिष्णु होने का परिचय देंगे ।


धन्यवाद ,

अनुराग मिश्र ।

यह "रावत " शब्द फारसी भाषा में मुगलकाल में रचा गया था। इसका एकाक्षर कोष से क्या अर्थ निकलता है??

तमन्ना है साथ चलने की,रंजोगम से दूर किसी मुकाम पर। यकीं है मिटेगी दूरी वक्त की,मिलों के फासलें किसी मुकाम पर।। कारवाँ जिन्दगी का चलता रहे,खोऐ रिश्तों के एक मुकाम पर। मुसाफिर है हर लम्हां,खामोश उदास नगमों के एक मुकाम पर।। टालती रही है जिन्दगी हर सवाल,तकलीफों के एक मुकाम पर। हसीन ख्वाबों की रीत,तन्हाँ छलके आंसुओं के एक मुकाम पर।। भूले बिसरे वादों में,गुलतरीन ख्वाबों के एक मुकाम पर। अतीत से गुजरना महफुज नहीं,कैसे जीऐं बुझे दीऐ के एक मुकाम पर।। गोविन्द