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क्या मै अपनी कोई भी स्वरचित कविता या रचना यहाँ पेश कर सकता हूँ ? मुझे इसके बारे में पूरी जानकारी चाहिए.


प्रेमेन्द्रन के के

मैं जाती हूँ जब तुम्हारे विस्मृत पथों पर घन बन बरसने लगती स्मृति भीग भीग मैं जाती हृदय के तार बज उठते जब तुम गाते थे मेरे साथ अश्रु बहने लगते नीरवता छा जाती तुम गा उठते मेरे हृदय तारों के साथ साथ कुछ यादें लहरों पर बहतीं कुछ तट पर रह जातीं दोनों में भरकर पुष्पों को एक बार बहा देती गंगा में, सोच विदा लेती मैं, भारी मन से घन बन बरसने लगती स्मृति भीग भीग मैं जाती डूब गया जो दोना बहाने से लगता है डर चलकर डिब्बी में कर लेती हूँ माला बंद फिर लौटूँगी तुम्हारे विस्मृत हुये पथों पर और तुमको लौटाउँगी तुम्हारे स्मृति चिन्ह बार बार का वादा मेरा टूट क्यों जाता है हर बार का मोह तुम्हारा छूट क्यों नहीं जाता है घन बन बरसने लगती स्मृति भीग भीग मैं जाती। हन .

क्या आप जानते दीपावली असली मतलब? जब व्यक्ति अपने जीवन में रावण रूपी अहंकार (स्वयं) को मारकर खुशियां मानता है तब उसके जीवन में दशहरा होता है। फिर परम अनुभूति होते हुए उसके जीवन में प्रकाश का प्राकट्य होता है । जिसके साथ वह परम सुख रूपी प्रकाश में अद्भुत दीवाली मानता है । तब वह स्वयं दीपक बन कर, स्वयं जल कर, स्वयं उसी प्रकाश में प्रकाशित होते हुए आनंदित होता है। उस समय उसके जीवन रूपी अयोध्या में श्री राम आगमन होता है।...... वह होती है.... शुद्ध दीपावली अद्भुत दीपावली

क्या आप जानते दीपावली असली मतलब? जब व्यक्ति अपने जीवन में रावण रूपी अहंकार (स्वयं) को मारकर खुशियां मानता है तब उसके जीवन में दशहरा होता है। फिर परम अनुभूति होते हुए उसके जीवन में प्रकाश का प्राकट्य होता है । जिसके साथ वह परम सुख रूपी प्रकाश में अद्भुत दीवाली मानता है । तब वह स्वयं दीपक बन कर, स्वयं जल कर, स्वयं उसी प्रकाश में प्रकाशित होते हुए आनंदित होता है। उस समय उसके जीवन रूपी अयोध्या में श्री राम आगमन होता है।...... वह होती है.... शुद्ध दीपावली अद्भुत दीपावली #Kanhaiya Dubey

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आज हमारे देस मै हमारी हिंदी भषा को इग्नोर किया जा रहा है और अंग्रेजी भषा को महत्व दिया जा रहा है जो की गलत है जिको अंग्रेजी नहीं अति उनको अनपढ़ लंझा जा रहा है जो की हमारे देश को शोभा नहीं देता पर ऐसा हो रहा है हम कहि जॉब के लिए जाते है और हमसे खा जाता है की आपको अंग्रेजी अति है अगर हमने मना क्र दिया तो हमको जॉब नहीं मिलती जो की दुर्भाग्य पूर्ण है मै चाहता हु जिस तरह चीन अपनी भाषा के साथ विकाश क्र रहा है हमारा देश भी हिंदी भाष के साथ विकाश करे

करवाचौथ के व्रत के दिन  होगी वो विरहिणी सी  ना संग हूँ  ना दिल से दूर उसके ! हृदय की वीणा के तारों  झंकृत करके  निकली जो सुमधुर ध्वनि  मिलन का सुर है  या बिछोह की वेदना! कभी तीव्रता यन्त्र सी  धरती सी स्थिर कभी  व्याघ्र सी तृष्णा कभी  कोमल सी प्रीत में ! नवकौंपल सा अहसास  उस परिपक्व शाख में  भौंरा प्रीत ना छोड़ पाए  वो दीवार तोड़ ना पाए! तीव्रताएं तीव्रोत्तर हर क्षण  विश्वास क्षीण हर पल  अनुत्तरित भौंरा  जिए कि बेढाल हो ! शाख ने समेटा तो होता  निष्कपट सा उड़ जाता  उसे ही नवपुष्प जानकर  नवजीवन सा पा जाता! 

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मां है एक ममता की मूरत , सबसे न्यारी इनकी सूरत । एक हमारी माता धरती , सारे जीवो के मन भर्ती, अन्न देकर ये हम जीवो के , जीवन को खुशहाल बनाती । भारत मां की बड़ी है शान , लोग यहां के बड़े महान, वक्त पड़े तो जान भी देकर, रखेंगे हम इसका मान । प्यारी प्यारी मां हमारी , इसने दिखलाई दुनिया सारी, धूप छांव से हमें बचा कर, बनाती है वह छवि हमारी । हमें है इनकी अधिक जरूरत , मां है एक ममता की मूरत।

मां है एक ममता की मूरत , सबसे न्यारी इनकी सूरत । एक हमारी माता धरती , सारे जीवो के मन भर्ती, अन्न देकर ये हम जीवो के , जीवन को खुशहाल बनाती । भारत मां की बड़ी है शान , लोग यहां के बड़े महान, वक्त पड़े तो जान भी देकर, रखेंगे हम इसका मान । प्यारी प्यारी मां हमारी , इसने दिखलाई दुनिया सारी, धूप छांव से हमें बचा कर, बनाती है वह छवि हमारी । हमें है इनकी अधिक जरूरत , मां है एक ममता की मूरत।

मां है एक ममता की मूरत सबसे न्यारी इनकी सूरत । एक हमारी माता धरती , सारे जीवो के मन भर्ती , अन्न देकर ये हम जीवो के , जीवन को खुशहाल बनाती। भारत मां की बड़ी है शान , लोग यहां के बड़े महान , वक्त पड़े तो जान भी दे कर, रखेंगे हम इसका मान। प्यारी प्यारी मां हमारी , इसने दिखलाई दुनिया सारी, धूप छांव से हमें बचाकर , बनाती है वह छवि हमारी । हमें है इनकी अधिक जरूरत , मां है एक ममता की मूरत।

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