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प्रश्नों पर प्रतिक्रिया दीजिये
प्रवीण कुमार शर्मा
लम्बा  इन्वेस्टमेंट  

कल का मैच किसने देखा

सामाजिक मीडिया के कई रूप हैं जिनमें कि इन्टरनेट फोरम, वेबलॉग, सामाजिक ब्लॉग, माइक्रोब्लागिंग, विकीज, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, फोटोग्राफ, चित्र, चलचित्र आदि सभी आते हैं। अपनी सेवाओं के अनुसार सोशल मीडिया के लिए कई संचार प्रौद्योगिकी उपलब्ध हैं। लेकिन आजकल इस सबका प्रयोग जिन परिपेक्ष्य के लिए है उसके विपरीत हो रहा है । फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प एवम अन्य जो बहुचर्चित एवम सामान्य लोगो के पहुच तक है सिर्फ शुभ-प्रभात, शुभ-रात्रि तक तथा दूसरे के पोस्ट चुराकर प्रकाशित करने तक रह गया है । फेसबुक में हिंदी में " आपके मन में क्या है " तथा अंग्रेजी में " what's on your mind " ऐसा लिखा है लेकिन लोग " फलाने ( अमुक ) के मन में क्या है " या अंग्रेजी में " what's on others mind " समझते है और चुराकर चिपका दिया ।


निवेदन : - यहाँ सभी लोग शिक्षित है इसलिए सही शब्दो में टिपण्णी करे और मन को आवेग में नही लाएंगे और सहिष्णु होने का परिचय देंगे ।


धन्यवाद ,

अनुराग मिश्र ।

kuldeep
हो तो रहा है एक दूसरे से आगे आने की चाहत में हो रहा है

क्या इस देश की तरक्की में सबसे बड़ी रूकावट जातिगत आरक्षण है ? है तो क्यों ? और नहीं तो क्यों ?

विजय कुड़िया

पूर्ण रूप से नहीं परंतु कुछ हद तक| अगर आप पूर्ण रूप से समृद्ध होने के बाद भी इसका गलत फ़ायदा लेते हो तब|  अन्यथा आरक्षण से अधिक किसी भी चीज़ में भ्रष्टाचार सबसे ऊपर आता है|

 

स्वार्थ से भरी इस दुनिया मे कौन किसी का होता है परछाई भी छोड़ जाती है साथ जब घोर अंधेरा होता है

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अब तक आपने शब्दनगरी पर अपने पसंद के बहुत से लेख और रचनाएँ लिखी या पढ़ी होंगी मगर जो अभी तक नही बताया वो ये है की आपकी पसंद की पुस्तक कौन सी है. तो अब थोड़ा दिमाग पर ज़ोर डालिये और और हमें उन किताबों के बारे में भी बताइये जो आपके मन में घर कर गई।

याद रहे इसका भी उत्तर आपको थोड़ा शीघ्र ही देना है , अब समय ज्यादा नही बचा है !!!


दीपेश मिश्रा

वैसे तो कई किताबे पढ़ी लेकिन अभी हाल ही में एक किताब पढ़ी जिसे पढ़कर सच में जिन्दगी के कई अनमोल हिस्सों को समझने का मौका मिला ! किताब का नाम है  मुसाफ़िर cafe !यह एक पूर्ण उपन्यास है ! उपन्यास कई ऐसी  लाइने है जो इसे जबरदस्त बनाती है ! उन्ही में से  कुछ लाइने आप लोगो से शेयर करता हूँ ! 



  • जो भी रातें रोते हुए गुजरती है वो अगले दिन सुबह ज़रूर कुछ अलग लेकर आती है !
  • हमारे सब जवाब हमारे पास खुद है, ये बात समझने के लिये अपने हिस्से भर की दुनिया भटकनी पड़ती ही है।
  • पहली बार के बाद हम बस अपने आप को दोहराते हैं और हर बार दोहराने में बस वो पहली बार ढूंढते हैं।
  • कहानी लिखने की सबसे बड़ी कीमत लेखक यही चुकाता है की कहानी लिखते लिखते एक दिन वो खुद कहानी हो जाता है!
आशा करता हूँ की जल्द ही मुसाफ़िर कैफ़े उपन्यास आप भी अपने स्टोर में ऐड करेंगे 

रेल में बहुत सारे लोग सफर कर रहे थे तो सभी को पारी पारी से टी टी आई ने टिकट जाँच करते गए तभी एक लड़की को कहा कि आपका टिकट तो लड़की ने बोली टिकट नही है तब लड़की को थाना ले गया,थाना वाले ने लड़की को अपना नाम पूछा तब लड़की ने अपना नाम बताई उसके बाद अपने पिताजी का नाम पूछा तो लड़की ने जवाब दिया की जो चलता रुकता है वही मेरा पिताजी का नाम है?

कुमार अ
हरी लाल

क्यो भारत की एक राष्ट्रीय भाषा नहीं है और सब देसो की एक ना एक राष्ट्रीय भाषा है ?

अभय विवेक अगगरोइआ

भाषा अनेक होने के बावजूद एक ऐसी भाषा का विकास भी करना जरूरी हो जो सामान्य हो- लेकिन राजनैतिक पार्टियां ऐसा नहीं होने देती, -- जब तक जाती, भाषा , धर्म  के आधार पर बांटे  जाएंगे तो इनके पकवान पकते रहेंगे ---- चाहे  कोई  भी पार्टी सत्ता में आये.

                

क्या इस बार नशे के खिलाफ आप आलम भाई को समर्थन करेंगे