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उपनिवेशवाद और औपनिवेशवाद दोनों में अंतर क्या है और इसकी परिभाषा क्या है ???

संपादन का विकल्प नहीं मिल रहा, हठात लिखी रचना वा डाली छवि में संशोधनार्थ?

क्या हिंदी भाषा वैश्विक भाषा है या ये केवल भारत तक ही सिमित है?

आजकल दौड़ भाग वाली जिंदगी में सभी लोग परेशान रहते है . किसी न किसी परेशानी से ग्रषित होते है. किसी को नौकरी नहीं मिल रही है , कोई अपने करियर को लेकर परेशान है , कोई पैसो की कमी से परेशान है , तो किसी को शरीर में होने वाली बीमारियों से परेशान है , अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है आपको बस अपनी परेशानी को इस मेल support@life24by7.com पर भेजना है , और आपको आपका नाम , जन्म दिनांक, जन्म समय, मेल में लिखना है .आपकी समस्या का निधान बहुत जल्दी आपके मेल पर मिल जायेगा .


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स्वतंत्रता का अर्थ ‘ हर तरह की आजादी ‘ नहीं हो सकती | भोग-लिप्सा के लिए आजादी नहीं होती | सच्ची स्वतंत्रता बंधन के स्वयं- स्वीकार से जुडी हुई है , क्योकि बिना उक्त बंधन-स्वीकार के विकास नहीं हो सकता है | नदी यदि दोनों तटों के बंधन को स्वीकार ना करे तो वह कभी भी सागर में नहीं मिल सकती है , उल्टा विनाशकारी ही होगी | वृक्ष यदि धरती के बंधन को स्वीकार ना करे तो कभी भी विकास और हरीतिमा को प्राप्त नहीं हो सकता | यहाँ तक सर्व-शक्तिमान सागर भी मर्यादा का त्याग नहीं करता | यदि वह मर्यादा का त्याग कर दे तो इस धरा का अस्तित्व ही नहीं रहेगा | स्वयं में स्थित सागरत्व को पहचानकर स्व-कल्याणार्थ एवं मानव कल्याणार्थ मर्यादा का स्वीकार करने से ही हम सच्चे स्वतंत्रता की और बढ़ सकते हैं |”

संकल्प है सम्पर्क जुड़ेगा कल सुबह एक ऐसी तस्वीर आती है जो सभी को भावुक कर देती है लेकिन वह तस्वीर बहुत कुछ बया कर रही थी वो तस्वीर थी रोकेटमैन इसरो के चैयरमैन के सिवन सर की और प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की... जब प्रधानमंत्री इसरो से सम्बोधन देके वहां से विदा हो रहे थे तो  इसरो के चैयरमैन के भावुक हो गये और प्रधानमंत्री जी ने के सिवन सर को  गले लगाकर होसला अफजाई किया हमे गर्व है, हम ऐसे देश के नागरिक हैं जहां एक वैज्ञानिक चन्द्रयान के सपने को एक बच्चे की तरह अपनी आंखों में पालता है और फिर एक रोज़ उसकी खातिर जार जार रो पड़ता है। वो आसु बहुत कुछ कह रहे थे ये आंसू बेशकीमती है। ये कभी व्यर्थ नही होंगे वो  तस्वीर वो सब कुछ बया करती है जिसको शब्दों में अलंकृत करने की हिम्मत नहीं है.वे आंसू बरसों की साधना , एकाग्रता , तप परिश्रम के थे। ये आंसू उस समर्पण को प्रदर्शित कर रहे थे है जिस समर्पण के साथ सिवन सर और उनकी टीम ने चन्द्रयान 2 के साथ जिया है, ये आशु उस विश्वास को दर्शा रहे थे जिस विश्वास की टुटने की उम्मीद कभी नहीं थी, ये आसु उस तपस्या को दिखा रहे थे जो जो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए की गई थी . ये आसु उस लगन की गवाही देते हैं जिस लगन से सिवन सर और उनकी टीम चन्द्रयान 2 के सफलता के लिए लगी हुई है. ये आसू उस विश्वास को प्रदर्शित कर रहे थे जिस विश्वास से हम तिरंगा फहराने निकले है. ये आंसू उन आँखों मे थे जो 125 करोड़ जनता की आँखों मे खुशी देखना चाहती हैं  ये सिवन सर के आँसू है पुरुषार्थ के ..... ये थपकी जो प्रधानमंत्री जी द्वारा दी गई है  वो विश्वास की...... ये हौसला है देश के अभिमान का......इसरो अध्यक्ष कैलाशवादिवू सीवन की आंखों में आंसू आना स्वाभाविक है । मेहनत के उपरांत 2 कदम से दुर रह  जाना मन को कचोटता तो है ही..... परन्तु यह नींव है नए भारत की.... सिवन सर ये जनता आपके साथ है आपके समर्पण भाव आपकी मेहनत आपकी इच्छा शक्ति आपके लगन सभी को आकाश भर सैल्यूट करती है और कन्धे से कन्धा मिलाकर आपके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है ISRO अध्यक्ष के. सिवन रोकेटमैन के नाम से भी जाने जाते हैं इन्होंने भी अपने जीवन में फर्श से अर्श तक का सफर अनेक चुनौतियों को पार करते हुए किया है या तत्कालीन स्थिति से जोड कर देखे तो इनका जीवन भी Chandrayaan-2 की तरह ही अद्भुत, अविश्वमरणीय और अचंभित करने वाला है। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि मेरा बचपन बिना जूतों और सैंडल के गुजरा है। जब मैं कॉलेज में था तो मैं खेतों में अपने पिता की मदद किया करता था। यही कारण था कि पिता ने दाखिला घर के पास वाले कॉलेज में कराया था। मैं कॉलेज तक धोती ही पहना करता था। जब मैं एमआइटी में गया तब पहली बार मैंने पैंट पहनी थी। जन्म - राज्य - तमिलनाडु जिला कन्याकुमारी गांव सराकल्लविलाई के  गरीब किसान परिवार में 14 अप्रैल 1957 हुआ प्रारंभिक शिक्षा - सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम आर्थिक स्थिति और तमाम परेशानियों चुनौतियों का सामना करती हुई 7 साल में एसटी हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया और वहां से बीएससी गणित 100% अंकों के साथ पूरी की सिवन सर स्नातक पूरी करने वाले प्रथम सदस्य थे परिवार के यहीं से जीवन में बदलाव आता है और सिवन सर 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हैं स्नातकोत्तर   इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस   पीएचडी आइआइटी बांबे एसे एयरोस्पेस इंजीनियरिंग 1982 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़ गए। और यहां पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) परियोजना में अपना योगदान देना शुरू किया।यहां उन्होंने लगभग हर रॉकेट कार्यक्रम में काम किया। अप्रैल 2011 में वह जीएसएलवी के परियोजना के निदेशक पद पर आसीन होते हैं । सिवन सर  के योगदान मेहनत  को देखते हुए जुलाई 2014 में उन्हें इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर का निदेशक नियुक्त किया गया। एक जून, 2015 को उन्हें विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक बना दिया गया। रॉकेट बनाता है। यहां उन्होेंने साइक्रोजेनिक इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और रियूसेबल लांच व्हीकल कार्यक्रमों में काम देने के कारण  रॉकेटमैन कहा जाता है।15 फरवरी, 2017 को भारत द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में अहम भूमिका निभाई थी। 15 जनवरी, 2018 को सिवन ने इसरो के मुखिया के रूप मे  पद्भार ग्रहण करते हैं और यही से चन्द्रयान मिशन 2 जो 2007 से चल रहा था उसका निर्देशन करते हैं और इस मिशन में जुट जाते हैं चन्द्रयान 2 मिशन की शुरुआत 12 नवम्बर 2007 को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 परियोजना पर साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।  ऑर्बिटर तथा रोवर की मुख्य जिम्मेदारी इसरो की होगी तथा रोसकोसमोस लैंडर के लिए जिम्मेदार होगा. भारत सरकार ने 18 सितंबर 2008 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अभियान को स्वीकृति दी थी। अंतरिक्ष यान के डिजाइन को अगस्त 2009 में पूर्ण कर लिया गया जिसमे दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपना संयुक्त योगदान दिया. हालांकि इसरो ने चंद्रयान -2 कार्यक्रम के अनुसार पेलोड को अंतिम रूप दिया। परंतु अभियान को जनवरी 2013 में स्थगित कर दिया गया। तथा अभियान को 2016 के लिये पुनर्निर्धारित किया। क्योंकि रूस लैंडर को समय पर विकसित करने में असमर्थ था।  रोसकोसमोस को बाद में मंगल ग्रह के लिए भेज़े फोबोस-ग्रन्ट अभियान मे मिली विफलता के कारण चंद्रयान -2 कार्यक्रम से अलग कर दिया गया। तथा भारत ने चंद्र मिशन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का फैसला किया। 15 जुलाई, 2019 को जब चंद्रयान-2 अपने मिशन के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि कुछ घंटों पहले तकनीकी कारणों से इसे रोकना पड़ा। इसमे लिकेज की समस्या आ गई इसके बाद सिवन सर ने एक उच्चस्तरीय टीम बनाई,  और इस लिकेज को  24 घंटे के अंदर ठीक कर दिया। सात दिनों बाद 22 जुलाई  को चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की थी। इसके बाद दिनांक 07 सितंबर 2019 को रात्रि 02 बजे चंद्रमा के धरातल पर उतरना था उस समय रात को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी इसरो मुख्यालय में स्कुली बच्चों के साथ इस ऐतिहासिक गौरवपूर्ण समय को देख रहे थे पुरा देश जाग रहा था हमारे वैज्ञानिकों के चहरे पर चिंता की लकीर साफ नजर आ रही थी लेकिन दुर्भाग्य वश हम इतिहास रचते रचते 2. 1 किलोमीटर दूर रह गये चंद्रमा के धरातल से 02.1 किमी ऊपर विक्रम लेंडर का इसरो से फिलहाल सम्पर्क टूट गया. आज फिर से उनकी टीम की मेहनत से फिर एक उम्मीद की किरण दिखाई दी है आज विक्रम की तस्वीर आयी है अब सम्पर्क साधने की कोशिश जारी है और 125 करोड़ देशवासियों की दुआओं का साथ है मंजिल तक अवश्य पहुंचेंगे आप अपना प्रयास जारी रखे। तू चाँद है तू तेरे नखरे तो दिखायेगा, ये "हिन्दुस्तान " तेरा आशिक है लौट कर जरूर आएगा 🇮🇳 बहुत बहुत बधाई ISRO देश को आप पर गर्व है !!ये देश आपके साथ खडा है नवीन कुमार यादव

इंसान के व्यवहार को दर्शाती कहानी

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क्या व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखना चाहिए ?

शब्दनगरी को कैसे और बेहतर व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जोड़ सकते है ? कैसे एक राष्ट्रीय विख्यात मंच बना सकते है कि जैसे २०१५ में thequint thewire बने और आज देश की प्रमुख website media news में एक हैं वैसे ही हिंदी लेखन में कैसे हम इसे उस स्तर पे ले जा सकते है ?

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