अभिलाषा

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मैं और मेरा प्रियतम

दूर कहीं अम्बर के नीचे,गहरा बिखरा झुटपुट हो। वहीं सलोनी नदिया-झरना झिलमिल जल का सम्पुट हो। नीरव का स्पंदन हो केवल छितराता सा बादल हो। तरुवर की छाया सा फैला सहज निशा का काजल हो। दूर दिशा से कर्ण - उतरती बंसी की मीठी धुन हो। प्राणों में



कौन हूँ मैं

कौन हूँ मैं समझ नहीं पाती ये पहेली क्यों सुलझ नहीं पाती मैं ममता का अंश हूँ या पीड़ा का दंश हूँ जूही चमेली का इत्र हूँ या देह पर लिखा संधि पत्र हूँ विधि की अनुकृति न्यारी हूँ या औलादों की क्यारी हूँ अभिलाषा का राग हूँ या सन्यासी का



पुष्प की अभिलाषा

साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी, हिंदी साहित्य के श्रेष्ठतम रचनाकारों में से एक हैं । आपका जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में बाबई नामक स्थान पर हुआ था । आप भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंद



06 सितम्बर 2015

नन्ही सी अभिलाषा

नन्ही सी अभिलाषादेखकर मुझे क्यों मुँह मोड़ लेते हो,हाथ तेरा थामती हूँ तो क्यों छोड़ देते हो। मेरी कुंठित व्यथा को सुनो, मैं भी एक इंसान हुँ, पापा जी , मैं भी तो आप ही की संतान हुँ।।मैं तो कभी भी नई खिलौने नहीं माँगती, मेला में जाने की जिद भी नहीं बांधती। घर की जुठा खा कर भी झाडू-पोछा कर लेती हूँ, आ





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