चलती

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एक लड़की भीगी भागी सी - चलती का नाम गाडी

Ek Ladki Bheegi Bhagi Si Lyrics from the movie Chalti Ka Naam Gaadi is sung by Kishore Kumar, its music is composed by S D Burman and lyrics are written by Majrooh Sultanpuri.चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )एक लड़की भीगी भागी सी की लिरिक्स (Lyrics Of Ek Ladki Bheegi Bhagi Si )एक लड़की भीगी



हम थे वह थी और समां रंगीन - चलती का नाम गाडी

हम वही थी और सम रेंजन गीत चल्ती का नाम गादी से गीत: यह किशोर कुमार द्वारा एसडी बर्मन द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ एक बहुत अच्छा गाया गया गीत है। हम द वही थी और सम रेंजन के गीत महारू सुल्तानपुरी द्वारा खूबसूरती से लिखे गए हैं।चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )हम थे वह थी और समां रंगीन



बाबू समझो इशारे होर्न पुकारे - चलती का नाम गाडी

Babu Samjho Ishare Horn Pukare Lyrics of Chalti Ka Naam Gaadi (1958) is penned by Majrooh Sultanpuri, it's composed by S D Burman and sung by Kishore Kumar and Manna Dey.चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )बाबू समझो इशारे होर्न पुकारे की लिरिक्स (Lyrics Of Babu Samjho Ishare Horn Pukare )बाजू



पांच रुपैया बारह आना - चलती का नाम गाडी

फिल्म चल्ती का नाम गादी - 1 9 58 से पैंच रुपय्या बारा अाना गीत के साथ पढ़ें और गाएं जो कि किशोर कुमार द्वारा गाया जाता है। आप चल्ती का नाम गादी से अन्य गाने और गीत भी प्राप्त कर सकते हैं।चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )पांच रुपैया बारह आना की लिरिक्स (Lyrics Of Paanch Rupaiya Baara Aana )



हाल कैसा है जनाब का - चलती का नाम गाडी

Haal Kaisa Hai Janaab Ka Lyrics of Chalti Ka Naam Gaadi (1958): This is a lovely song from Chalti Ka Naam Gaadi starring Kishore Kumar, Madhubala, Ashok Kumar and Anoop Kumar. It is sung by Asha Bhosle and Kishore Kumar and composed by S D Burman.चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )हाल कैसा है ज



चलती का नाम गाडी (Chalti Ka Naam Gaadi )

"Chalti Ka Naam Gaadi" is a 1958 hindi film which has Kishore Kumar, Madhubala, Ashok Kumar, Anoop Kumar, Sajjan, K N Singh, Cuckoo, Mohan Choti, Veena, Sahira and Helen in lead roles. We have and 5 songs lyrics of Chalti Ka Naam Gaadi. S. D. Burman has composed its music. Kishore Kumar, Manna Dey



"दुर्मिल सवैया"हिलती डुलती चलती नवका ठहरे विच में डरि जा जियरा।

छंद- दुर्मिल सवैया (वर्णिक ) शिल्प - आठ सगण सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा ११२ ११२ ११२ ११२ ११२ ११२ ११२ ११२"दुर्मिल सवैया"हिलती डुलती चलती नवका ठहरे विच में डरि जा जियरा।भरि के असवार खुले रसरी पतवार रखे जल का भँवरा ।।अरमान लिए सिमटी गठरी जब शोर मचा हंवुका उभरा।ततक



“गीतिका" यह महल है पुराना किसी और का याद उसकी सजाकर मचलती रही।।

गीतिका आधार छंद- गंगोदक मापनी- २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ (रगण क्ष ८) पदांत- अती समांत- रही“गीतिका" आग लगती रही धुंध उडती रही क्या हुआ क्या हुआ चींख जलती रहीअब जला दो मुझे या बुझा लो मुझे पर हकीकत हवा है सुलगती रहीदाग दामन लगी है कहूँ अब किसे भूलना इस बला को मुनासिब





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