भगवान की माया :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमपिता परमेश्वर जिन्हें ब्रह्म कहा जाता है उन्होंने अपनी माया से इस सृष्टि की रचना की | सृष्टि का कण-कण माया से परिपूर्ण रहे बिना माया की / ब्रह्म की शक्तियां काम नहीं कर पाती , अर्थात ब्रह्म एवं माया से मिलकर ही यह सृष्टि बनी है और इस सृष्टि का प्रत्येक जीव माया से अभिभूत होकर ही कार्य करता है |



अन्तर्विकारों से बचने का उपाय :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️*🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈*श्रीरामचंरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने उत्तरकांड के लेखन में अंतर्मन के विकारों का बहुत विस्तृत वर्णन किया है |उसके अनुसार अंतर्मन के विकार निम्नवत् है :---**काम , क्रोध , लो



बिना विचारे जो करै :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में समय समय पर अनेकों समस्यायें उत्पन्न होती रहती हैं ! कुछ समस्यायें तो ऐसी होती हैं जो स्वयं मनुष्य के द्वारा ही उत्पन्न कर ली जाती हैं | यदि किसीने कह दिया कि हमने तो ऐसा सुना है तो मनुष्य को उसे तब तक सत्य सत्य नहीं मानना चाहिए जब तक स्वयं न देख ले | बिना विषय की सच्चाई जाने ही यदि उस



उत्पन्ना एकादशी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों व्रत उपवास बताए गए है जो मनुष्य को भौतिकता से कुछ क्षण के लिए उबार कर सात्त्विकता की ओर अग्रसर करते हैं | अपनी संस्कृति एवं संस्कार को.जानने का सशक्त साधन हैं समय समय पर पड़ने वाले हमारे व्रत एवं उपवास | वैसे तो सनातन धर्म में व्रत उपवासों की वृहद श्रृंखला है परंतु कुछ व्पत वि



इन्र्दिय सुख की अधिकता से बचें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य अपने जीवन में पग पग पर सावधानी के साथ कदम बढ़ाता है | संसार में किससे अपना हित होना है और किससे अहित होना है इस विषय में मनुष्य बहुत ही सावधान रहता है , परंतु जिससे उसे सावधान रहना चाहिए वह उससे सावधान नहीं रह पाता | मनुष्य को किस से सावधान रहना चाहिए ? इसके वि



कर्तिक पूर्णिमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धरा धाम पर प्रतिष्ठित होने वाला एकमात्र धर्म सनातन धर्म मानव मात्र का धर्म है क्योंकि सनातन धर्म ही ऐसा दिव्य है जो मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हुए एक दूसरे को पर्व त्योहारों के माध्यम से समीप लाने का कार्य करता है | सनातन धर्म में वर्ष के प्रत्येक माह में कुछ ना कुछ पर्व ऐसे मन



जीवन को उत्कृष्ट करता है ज्ञान :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य अनेक प्रकार से ज्ञानार्जन करने का प्रयास करता है | जब से मनुष्य का इस धरा धाम पर विकास हुआ तब से ही ज्ञान की महिमा किसी न किसी ढंग से , किसी न किसी रूप में मनुष्य के साथ जुड़ी रही है | मनुष्य की सभ्यता - संस्कृति , मनुष्य का जीवन सब कुछ ज्ञान की ही देन है | मनु



वर्तमान को सुधारें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*यह सृष्टि निरंतर गतिशील है , आज जो समय है कल वह भूत बन जाता है | काल गणना की सुविधा की दृष्टि से समय को तीन भागों में बांटा गया है जिसे भूतकाल वर्तमान काल एवं भविष्य काल कहा गया है | ध्यान देने वाली बात है भूत एवं भविष्य दोनों के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसे कहा जाता है "कल" | अंतर सि



एकादशी व्रत निर्णय :- आचार्य अर्जुन तिवारी

💥🌳🌳💥🌳🌳💥🌳🌳💥🌳🌳 *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *एकादशी व्रत निर्णय* 🚩🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️*दशम्येकादशी यत्र तत्र नोपवसद्बुध: !* *अपत्यानि विनश्यन्ति विष्णुलोकं न गच्छति !!*यह परमावश्यक है कि एकादशी दशमीविद्धा (पूर्वविद्धा) न हो ! हाँ द्वादशीविद्धा (



तुलसी विवाह एवं पंचकोसी परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक कार्य शुभ कर्म करके तब प्रारंभ करने की परंपरा रही है | विगत चार महीनों से सभी शुभ कार्य चातुर्मास्य के कारण बंद पड़े थे , आज देवोत्थानी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के जागृत होने पर सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे | शुभ कार्य प्रारंभ होने से पहले मनुष्य के द्वारा कुछ अ



देवोत्थानी एकादशी :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की प्रत्येक मान्यता स्वयं में गौरवशाली है | सृष्टि का संयोजन एवं इसकी गतिशीलता यद्यपि ईश्वर के हाथों में है परंतु मानव मात्र की सहायता के लिए हमारे विद्वानों ने वर्ष , मास एवं दिन , बारह राशियों , २७ नक्षत्रों एवं सूर्य चंद्रमा के आधार पर काल विभाग किया है | समस्त संसार को प्राण एवं ऊर्ज



परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में जितना महत्व पूजा - पाठ , साधना - उपासना का है उससे कहीं अधिक महत्त्व परिक्रमा का है | परिक्रमा करने से अनेकों जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं | हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है :- "यानि कानि च पापानि , जन्मांतर कृतानि च ! तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदिक्षण पदे पदे !! अर्थात :- अनेक



18 नवम्बर 2020

ज्ञानवेदा क्या है?

www.gyanveda.inज्ञानवेदा का पता है ज्ञानवेदा - एक हिन्दी टेक ब्लॉग है। यहाँ कंप्यूटर, इंटरनेट , शिक्षा, ब्लॉगिंग इत्यादि से संबंधित जानकारी शेयर की जाती है।



योगी किसे कहते हैं

*सनातन धर्म में साधक की कई श्रेणियाँ कही गयी हैं इसमें सर्वश्रेष्ठ श्रेणी है योगी की ! योगी शब्द बहुत ही सम्माननीय है | योगी कौन होता है ? इस पर विचार करना परम आवश्यक है | योगी को समझने के लिए सर्वप्रथम योग को जानने का प्रयास करना चाहिए कि आखिर योग क्या है जिसे धारण करके एक साधारण मनुष्य योगी बनता ह



त्याग

*मनुष्य इस धरा धाम पर आने के बाद अपने जीवन में संतोष प्राप्त करना चाहता है पर मनुष्य को संतोष नहीं प्राप्त हो पाता | कोई ना कोई कमी जीवन भर उसे शूल की तरह चुभती रहती है | जीवन में यदि संतोष प्राप्त करना तो हमारे सनातन धर्म के रहस्य को समझना होगा | संतोष प्राप्त होता है त्याग से | हमारा देश भारत आदिक



दु:ख का कारण

*इस संसार में मनुष्य सुख एवं दुख के बीच जीवन यापन करता रहता है | मनुष्य को सुख एवं दुख यद्यपि उसके कर्मों के अनुसार मिलते हैं परंतु मनुष्य के दुखों के कारण पर हमारे शास्त्रों में विस्तृत चर्चा की गई है जिसके अनुसार मनुष्य के दुख के तीन मुख्य कारण बताए गए हैं :- १- अज्ञान , २- अशक्ति एवं ३- अभाव | य



भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में जल का बहुत बड़ा महत्व है | बिना जल के जीवन की संकल्पना भी नहीं की जा सकती | जिस प्रकार जीवन में जल का महत्व है उसी प्रकार बारह महीनों में भाद्रपद मास का भी बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि जल वर्षा का मुख्य समय भाद्रपद मास ही है | वर्ष की बारह महीनों में यदि भाद्रपद मास में जल वर्षा न हो तो



कुशोत्पाटिनी अमावस्या :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में प्रत्येक माह के प्रत्येक दिन या प्रत्येक तिथि को कोई न कोई पर्व या त्यौहार मनाया जाता रहा है , यह सनातन धर्म की दिव्यता है कि वर्ष भर नित्य नवीन पर्व मनाने का विधान बनाया गया है | इसी क्रम में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या को एक विशेष पर्व मनाने का विधान हमारे सर ग्रंथों में वर्णित



उपदेश सूत्र

*श्रीमते रामानुजाय नमः**श्रीगोदम्बाय नमः**चीराणि किं पथि न सन्ति दिशन्ति भिक्षां* *नैवाङ्घ्रिपाः परभृतः सरितोऽप्यशुष्यन् ।**रुद्धा गुहाः किमजितोऽवति* *नोपसन्नान् कस्माद्भजन्ति कवयो धनदुर्मदान्धान्*पहनने को क्या रास्तों में चिथड़े नहीं हैं? रहने के लिए क्या पहाड़ो की गुफाएँ बंद कर दी गयी हैं? अरे भाई !



श्री हन्मान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग - १ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *भाग - प्रथम* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️प्रातःस्मरणीय , परमपूज्यपाद , कबिकुल शिरोमणि , गोस्वामी तुलसीदा



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