की



माँ कात्यायनी वन्दना

हरिगीतिका छन्द,2212 2212 2, 212 2212हे! मात! नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात्यायनी।अवसाद सारे नष्ट कर हे, मात! मोक्ष प्रदायनी।हे! सौम्य रूपा चन्द्र वदनी, रक्त पट माँ धरिणी।हे! शक्तिशाली नंदिनी माँ, सिंह प्रिय नित वाहिनी।माथे मुकुट है स्वर्ण का शुभ, पुष्प कर में धारिणी।हे! मात!नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात



युवा

जल रही हो जिसमें लौ आत्मज्ञान की समझ हो जिसको स्वाभिमान की हृदय में हो जिसके करुणा व प्रेम भरा बाधाओं व संघर्षों से जो नहीं कभी डरा अपनी संस्कृति की हो जिसको पहचान भेदभाव से विमुख करे सबका सम्मान स्वदेश से करे जो प्रेम अपरम्पार जानता हो चलाना कलम व तलवार राष्ट्र निर्माण में जो सदैव बने अगुवा वास्तव



प्रेम परिधि

बिंदु और रेखा में परस्पर आकर्षण हुआ तत्पश्चात् आकर्षण प्रेम में परिणत धीरे-धीरे रेखा की लंबाई बढ़ती गई और वह वृत्त में रूपांतरित हो गयी उसने अपनी परिधि में बिंदु को घेर लिया अब वह बिंदु उस वृत्त को ही संपूर्ण संसार समझने लगा क्योंकि उसकी दृष्टि प्रेम परिधि से परे देख पाने में असमर्थ हो गई थी कुछ समय



आलिंगन

पृथक् थी प्रकृति हमारी भिन्न था एक-दूसरे से श्रम ईंट के जैसी सख़्त थी वो और मैं था सीमेंट-सा नरम भूख थी उसको केवल भावों की मैं था जन्मों-से प्रेम का प्यासा जगत् बोले जाति-धर्म की बोली हम समझते थे प्यार की भाषा प्रेम अपार था हम दोनों में मगर ना जाने क्यों नहीं होता था हमारा मिलन पड़ा प्रेम का जल ज्यों



पास और दूर

वो जब मेरे पास थी थी मेरी ज़िंदगी रुकी हुई अब वो मुझसे दूर है ज़िंदगी फिर से चल पड़ी जब था उसके पास मैं मैं नहीं था कहीं भी मुझमें अब केवल मैं ही मैं हूँ वो कहीं नहीं है मुझमें जब थी मेरे पास वो था उसे खोने का डर खोकर उसको हो गया अब हर डर से बेख़बर ✍️आलोक कौशिक



‘‘न्यूटन के गति‘‘ का नियम क्या ‘‘अपराधिक राजनीति पर भी लागू होता है?

‘‘न्यूटन‘‘ क्या भारतीय राजनीति को ‘‘न्यूट्रल‘‘ कर देगें?मैं विज्ञान का छात्र रहा हूं। बचपन में मैंने पढ़ा है कि ‘‘न्यूटन के गति‘‘ के तीसरे नियम के अनुसार ‘‘हर क्रिया के बराबर (समान) और विपरीत प्रतिक्रिया होती है‘‘। प्रसिध्द वैज्ञानिक ‘‘न्यूटन‘‘ ने अपनी पुस्तक ‘‘प्रिंसीपिया मैथमैटिका‘‘ (वर्ष 1687) के



तुम्हारी याद

कवितातुम्हारी याद तुम यादों से विस्मृत हो जाओ सम्भव नहीं है ये ,तुम पटल से उतर जाओ स्वीकृत नहीं है ये । न करो याद तुमफ़र्क पड़ता है क्या ?न करो विश्वास तुमसमय रुकता है क्या ?श्वास तो चलते हैंहृदय भी धड़कता है दोनों ही के स्पंदन मेंध्वनि हो या प्रतिध्वनि तुमसे ही होकर आती



जंगली जानवरों पर करंट कनेक्‍शन !

जंगली जानवरों पर करंट कनेक्‍शन !छत्‍तीसगढ के जंगलों में अवैध शिकार, लकड़ी की कटाई और अवैध परिवहन अब एक समस्‍या बनती जा रही है: हालाकि सरकार की तरफ से इस पर लगाम लगाने सहित कई उपाय भी किये जा रहे हैं किन्‍तु लगता है यह पर्याप्‍त्‍ नहीं है:हाल के दिनों में जो घटनाएं सामने आई है वह यह निष्‍कर्ष निकालता



आराध्य पिता जी

यह कविता मेरे आराध्य पिता जी को समर्पित:-देखो दिवाली फिर से कुछ, यादें लाने वाली है।पर तेरी यादों से पापा, लगती खाली-खाली है।।याद आता है पापा मुझ को साथ में दीप जलाना।कैसे भूलूँ पापा मैं वो, फुलझड़ियां साथ छुटाना।।दीपावली में पापा आप, पटाखे खूब लाते थे।सबको देते बांट पिता जी, हम सब खूब दगाते थे।।तेरे



नौकरी का भूत

[12/09/2020 ]*नौकरी का भूत* (व्यंग्य-कविता)पढ़ लिख के मैं बड़ा हुआ जब, ये मन में मैने ठाना ।जिन सब का था कर्ज पिता पर, वो मुझको जल्द चुकाना ।नौकरी की आस को लेकर, निकला घर से मतवाला ।सफल सफर करके भैया मैं, पहुच गया हूँ अम्बाला।***दो महिनें तक करी नौकरी , मन को थी कुछ ना भायी ।पता चला कुछ भर्ती निकली



सफर यादों का

तेरा धरती से यूँ जाना, मेरा धरती में रह जाना ।अखरता है मुझे हर पल, तेरा मुझसे बिछुड़ जाना ।मेरी साँसों में तेरा नाम, मेरी धड़कन में तेरा नाम ।मेरे ख्वाबों में तू ही तू,



कान की व्यथा कान की जुबानी

कान की व्यथा कान की जुबानी इस दुनिया में कोई पूर्ण नहीं है… सभी अपूर्ण हैं। कोई सुखी नहीं है सभी दुखी हैं। जिसके पास सबकुछ है फिर भी वो उसका भोग आनन्द पूर्वक न करके जो नहीं है या जो अप्राप्य है उसके लिए दुखी है। सभी के मन में कोई न कोई व्यथा है जिसने आहत कर रखा है। औरों की बात तो छोड़ो एक दिन कान बेच



गरीब और असहाय लोगो की डोर किसके हाथ में?

गरीब औरअसहाय लोगो की डोर किसके हाथ में?यूपी केहाथरस रेप कांड ने पिछले दो चार दिनो में देश के आम लोगो को अपने बोर में सोचने व समझने का मौका दिया कि वे‍ किस तरहकतिपय लोगों की कठपुती बने समाज में जी रहे हैं: यह भी लगभग साफ हो गया कि उनकेऊपर किन लोगों की मर्जी चलती है: मीडिया को भी यह समझने का मौका मिल



एक और हैवानियत….अंघेरी रात में पुलिस ने जलाई चिता?

एक और हैवानियत….अंघेरी रात में पुलिस ने जलाई चिता?हृाथरस में इंसानों के बीच मौजूद राक्षसो ने फिर अपना असली रूप दिखाया और हम एक बार फिर वही डायलाग दोहरा रहे हैं जो इससे पहले मानवता को शर्मसार करने की अन्‍य घटनाओं के समय हुआ: कडी सजा देगे



पश्चिमी एशिया में शांति की बढ़ती संभावनाएं ' इजरायल '

पश्चिमी एशिया में शान्ति की बढ़ती संभावनायें डॉ शोभा भारद्वाज यहूदियों का सम्पूर्ण इतिहास संघर्ष , संहार अपने स्थान से विस्थापित होने की दर्द भरी दास्तान है। विश्व के सभी देश ‘इजरायल’ की तरक्की पर हैरान है. यू एस राष्ट्रपति ट्रंप की उपस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात ( यूएई) एवं इजरायल के बीच द्विपक्



मौन

मौनमौन होकर उस आनंद की अनुभूति करना चाहता हूँलाखों वर्षों से जिसके लिए भटक रहा हूँ।जग मन विलास है....प्रभु हृदय-हुलास है;यह भाव निरंतर आ रहा है,चिर -शांति का द्वार लग रहा है।अनुभूतियाँ जीवन की अनेक हैं..अनेक हैं धरातल भी..मौन का धरातल हृदय-पटल हैसत् चित् आनंद जहाँ हर



अपने पूर्वजों ,मृत्युलोक के प्राणियों की याद में मनाये जाने वाले पर्व

अपने पूर्वज ,मृत्यु लोक के प्राणियों की याद में मनाये जाने वाले पर्व डॉ शोभा भारद्वाज विश्व की लगभग सभी संस्कृतियों में जन्म मृत्यु आत्मा भूत प्रेत पूर्वजों आदि की मान्यता है। पश्चिमी देशों में ‘एक दिन’ का हैलोवीन एवं आल सेंट्स डे पर्व मनाया जाता है। एशिया में वर्ष का सातवाँ महीना, घोस्ट धरती पर



कोई रोता है।

क्यों मुझको ऐसा लगता है?, दूर कहीं कोई रोता है।कौन है वो? ,मैं नही जानता, पर मुझको ऐसा लगता है,दूर कोई अपना रोता है। क्योंमुझको ऐसा लगता है?दूर कहीं कोई रोता है। 2पर्वत की हरी-भरी वादियाँ



किरायेदार

लघुकथाकिरायेदार" भैया ये छह पाईप हैं जो पास की दूकान पर ले चलने हैं , ले चलोगे ? " मैंने ई - रिक्शे वाले को रोककर कहा ।" जी, ले चलेंगे । "" बताओ किराया क्या लोगे ? " " सत्तर रुपए लगेंगे ।"" भैया , पचास लो । सत्तर का काम तो नहीं है । "" ठीक है , पचास दे दीजिएगा ।"" तो फिर लाद लो । "वो अपने काम पर



आजमा के देख गीदड़ ( चाइना)

अब मैं ना खाऊंगा धोखा बार बार,बहुत हो गया अब तेरा विश्वासघात ;बहुत सह लिया, अब ना सहूंगा, तेरा ये दुस्साहसी विस्तारवाद;यह 1962 का नहीं है भारत,अब है भारत देश का मजबूत राष्ट्रवाद।हमारी सेना का मनोबल तुझसे



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