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गर्भावस्था में बेबी की मूवमेंट कब होती है?

गर्भवती महिला के लिए वह पल बेहद खास होता, जब उसे अपने गर्भधारण का पता चलता है। यह ख़ुशी तब और बढ़ जाती है, जब उसे गर्भ में पहली बार अपने शिशु की हलचल बार बार महसूस होती है। शिशु जब पहली बार पेट में लात मारता है, तो उसे समझने के लिए गर्भवती महिला को उस पर थोड़ा ध्यान द



जय श्री राम

त्याग का पर्याय प्रतीक शौर्य का पुरुषों में उत्तम संहर्ता क्रौर्य का परहित प्रियता भ्राताओं में ज्येष्ठ कर्तव्य परायण नृप सर्वश्रेष्ठ शरणागत वत्सल हैं आश्रयदाता दशरथ नंदन भाग्य विधाता भजे मुख मेरा तेरा ही नाम जय सिया राम जय श्री राम :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परिचय:-नाम-



साहित्य के संकट

संकट साहित्य पर है बड़ा ही घनघोर धूर्त बना प्रकाशक लेखक बना है चोर भूखे हिंदी के सेवक रचनाएं हैं प्यासी जब से बनी है हिंदी धनवानों की दासी नकल चतुराई से कर रहा कलमकार हतप्रभ और मौन है सच्चा सृजनकार प्रकाशन होता पैसों से मिलता छद्म सम्मान लेखक ही होते पाठक करते मिथ्याभिमान :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परि



दान का महत्त्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में प्रत्येक व्यक्ति को धर्म का पालन करने का निर्देश बार - बार दिया गया है | धर्म को चार पैरों वाला वृषभ रूप में माना जाता है जिसके तीन पैरों की अपेक्षा चौथे पैर की मान्यता कलियुग में अधिक बताया गया है , धर्म के चौथे पैर को "दान" कहा गया है | तुलसीदास जी मामस में लिखते हैं :-- "प्रगट चार



क्यों है लॉकडाउन की मजबूरी

समाज की उत्पति से लेकर आजतक विश्व एक हीथ्यूरी पर चल रहा है कि समाज में वर्चस्व किस का होगा। जंगलराज को नकेल डालकर कुछव्यवस्थाएं स्थापित हो गईं लेकिन जिनके साथ अन्याय होता था उन्होंने प्रतिरोध जारीरखा। वर्तमान युग में विश्व की ओर से फेस की जा रही समस्याओं का मुख्य कारण पश्चिमजगत और उनका अंधानुकर



पलायन का जन्म

हमने गरीब बन कर जन्म नहीं लिया था हां, अमीरी हमें विरासत में नहीं मिली थी हमारी क्षमताओं को परखने से पूर्व ही हमें गरीब घोषित कर दिया गया किंतु फिर भी हमने इसे स्वीकार नहीं किया कुदाल उठाया, धरती का सीना चीरा और बीज बो दिया हमारी मेहनत रंग लाई, फसल लहलहा उठी प्रसन्नता नेत्रों के रास्ते हृदय में पहुं



गाँव का महत्त्व ::-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत गांवों का देश हमारे देश के प्राण हमारे गांव हैं , आवश्यकतानुसार देश का शहरीकरण होने लगा लोग गाँवों से शहरों की ओर पलायन करने लगे परंतु इतने पलायन एवं इतना शहरीकरण होने के बाद आज भी लगभग साठ - सत्तर प्रतिशत आबादी गांव में ही निवास करती है | गांव का जीवन शहरों से बिल्कुल भिन्न होता है



आपत्तिकाल में धैर्य को परखिये :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते है



प्रकृति

विध्वंसक धुंध से आच्छादितदिख रहा सृष्टि सर्वत्र किंतु होता नहीं मानव सचेत कभी प्रहार से पूर्वत्र सदियों तक रहकर मौन प्रकृति सहती अत्याचार करके क्षमा अपकर्मों को मानुष से करती प्यार आती जब भी पराकाष्ठा पर मनुज का अभिमान दंडित करती प्रकृति तब अपराध होता दंडमान पशु व पाद



सनातन में समाजिक दूरी की मान्यता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म पूर्ण वैज्ञानिकता पर आधारित है , हमारे पूर्वज इतने दूरदर्शी एवं ज्ञानी थे कि उन्हेंने आदिकाल से ही मानव कल्याण के लिए कई सामाजिक नियम निर्धारित किये थे | मानव जीवन में वैसे तो समय समय पर कई धटनायें घटित होती रहती हैं परंतु मानव जीवन की दो महत्त्वपूर्ण घटनायें होती हैं जिसे जन्म एवं मृत्य



प्रसवपूर्व देखभाल क्या है? प्रसवपूर्व देखभाल के दौरान डॉक्टर के पास कब जाएँ ?

गर्भावस्था के दौरान माँ व बच्चे की सुरक्षा के लिए नियमित जांच व देखभाल प्रसवपूर्व देखभाल कहलाती है। प्रेगनेंसी के समय बहुत-सी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान प्रसवपूर्व देखरेख आपको और आपके गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करती है। भारत प्रेग



अज्ञात शत्रु से बचाव :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में अनेकों प्रकार की एवं मित्र बना करते हैं कुछ शत्रु तो ऐसे भी होते हैं जिनके विषय में हम कुछ भी नहीं जानते हैं परंतु वे हमारे लिए प्राणघातक सिद्ध होते हैं | शत्रु से बचने का उपाय मनुष्य आदिकाल से करता चला आया है | अपने एवं अपने समाज की सुरक्षा करना मनुष्य का प्रथम कर्तव्य है , अपने इस क



भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में जिस प्रकार निडरता का होना आवश्यक है उसी प्रकार समय समय पर भय का होना परम आवश्यक है | जब मनुष्य को कोई भय नहीं जाता तब वह स्वछन्द एवं निर्द्वन्द होकर मनमाने कार्य करता हुआ अन्जाने में ही समाज के विपरीत क्रियाकलाप करने लगता है | भयभीत होना कोई अच्छी बात नहीं है परंतु कभी कभी परिस्थितिया



समय को पहचानें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस समस्त सृष्टि में वैसे तो बहुत कुछ है जो मनुष्य को प्रभावित करते हुए उसके जीवन में महत्वपूर्ण हो जाता है परंतु यदि आंकलन किया जाय तो मनुष्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है समय | इस संसार में एक से बढ़कर एक बलवान हुए हैं परंतु उनका बल भी समय के आगे व्यर्थ ही हो गया है अत: यह सिद्ध हो जाता है कि सम



प्रकृति का अंग है मनुष्य :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर ने सृष्टि के रचनाक्रम में पंचतत्वों (भूमि , जल , वायु , अग्नि एवं आकाश) की रचना की फिर इन्हीं पंचतत्वों के सहारे जीवों का सृजन किया | अनेक प्रकार के जीवों के मध्य मनुष्य का सृजन करके उसको असीमित शक्तियाँ भी प्रदान कीं | मनुष्य की इन शक्तियों में सर्वश्रेष्ठ ज्ञान एवं बुद्धि को बनाया , अपनी बु



बहन

दिखती है जिसमें मां की प्रतिच्छवि वह कोई और नहीं होती है बान्धवि जानती है पढ़ना भ्राता का अंतर्मन अंतर्यामी होती है ममतामयी बहन है जीवन धरा पर जब तक है वेगिनी उत्सवों में उल्लास भर देती है भगिनी :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परिचय:-नाम- आलोक कौशिकशिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)पेशा- पत्रकारिता एवं



एकता में शक्ति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संपूर्ण विश्व में हमारा देश भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अनेक धर्म , संप्रदाय के लोग एक साथ निवास करते हैं | धर्म , भाषा एवं जीवनशैली भिन्न होने के बाद भी हम सभी भारतवासी हैं | किसी भी संकट के समय अनेकता में एकता का जो प्रदर्शन हमारे देश में देखने को मिलता है वह अन्यत्र कहीं दर्शनीय नहीं है | हमें



अनोखी देशसेवा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य जिस स्थान / भूमि में जन्म लेता है वह उसकी जन्म भूमि कही जाती है | जन्मभूमि का क्या महत्व है इसका वर्णन हमारे शास्त्रों में भली-भांति किया गया है | प्रत्येक मनुष्य मरने के बाद स्वर्ग को प्राप्त करना चाहता है क्योंकि लोगों का मानना है कि स्वर्ग में जो सुख है वह और कहीं नहीं है परंतु हमारे शास्



कोरोना (साववधानी ही बचाव) :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म शास्वत तो है ही साथ ही दिव्य एवं अलौकिक भी है | सनातन धर्म में ऐसे - ऐसे ऋषि - महर्षि हुए हैं जिनको भूत , भविष्य , वर्तमान तीनों का ज्ञान था | इसका छोटा सा उदाहरण हैं कविकुल शिरोमणि परमपूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी | बाबा तुलसीदास जीने मानस के अन्तर्गत उत्तरकाण्ड में कलियुग के विषय में ज



नालायक़ बेटा

रामानंद बाबू को अस्पताल में भर्ती हुए आज दो महीने हो गये। वे कर्क रोग से ग्रसित हैं। उनकी सेवा-सुश्रुषा करने के लिए उनका सबसे छोटा बेटा बंसी भी उनके साथ अस्पताल में ही रहता है। बंसी की मां को गुजरे हुए क़रीब पांच वर्ष हो चुके हैं। अपनी मां के देहावसान के समय बंसी तक़रीबन बीस वर्ष का था। सुबह के आठ बज



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