नारीशक्ति



क्या सचमुच गलती फेयरनेस क्रीम की है ?

कुछ दिनों से क्रीम्स में जुड़े फेयरनेस शब्दको लेकर लोगों में एक नाराजगी देख रही हूं और कंपनी ने भी अपनी इस क्रीम से इस तरह के शब्द को हटाने काफैसला किया है, लेकिन कई क्रीम में सीधे सीधेफेयर शब्द नहीं जुड़ा है ग्लो या शाइन देने वाली बात कहकर भी अप्रत्यक्ष रुप सेगोरेपन को ही तव्वजोह दी जाती रही है।रह



जंगल सुंदरी

ये कौन ? फिरंगी! हाय राम... जिन्होंने हमारे देश को गुलाम बनाया था। सतीश की 80साली दादी बोली।सतीश “अरे अंग्रेजों को भारत छोड़े हुए कई साल बीत चुके है वो तो बस घुमने फिरनेआते है हमारे देश में, जैसे कि हम उनके देशों की सैर करने जाते हैं." ये हमारेगांव में क्या कर रहा है ? "



ऑनलाइन लव – प्यार या धोखा ?

अचानक विजय के पास स्मृति का फोन आयाकहने लगी मुझे तुम एयरपोर्ट तक छोड़ दो ना।तब विजय चौंककर बोला “आजअचानक मुझे क्यों कॉल कर रही हो क्या तुम्हारे माता पिता नहीं छोड़ सकते हैतुम्ह



सुनो जैसी हो वैसी ही रहना।

“चलो यार ज़रा कैंची लाना मैं इसके सामने के थोड़े से बालकाट दूं.”“रेडीहो ना ? पीछे के बाल लंबे ही रहेंगे बस सामने से थोड़ा स्टाइलिशलुक आ जाएगा। क्या है आपका फ़ेस थोड़ा पतला है तो भरा भरा लगेगा.”“बहुत ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ा बहुत ज़रुरी है मेक-अप भी,काजल की पतली धार, हल्क



दहेज या प्यार ?

श्याम गहरे सांवले रंग का लड़का था जिसका कद 5फीट 8 इंच था और उसकी काठी मध्यम थी, शायद उसके सांवले सलौने और मनोहर रुप के चलते ही उसके माता-पिताने उसका ये नाम रखा था। वो अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की की तरफ काफी आकर्षित था,जो कि एक प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। मध्यम कद का



सदा सुहागन

मनीषा औरविकास की ज़िंदगी यूं तो बहुत अच्छे से चल रही थी, घर में किसी सुविधा की कमी नहींथी। फिर भी मनीषा को एक अकेलापन हमेशा खाए जाता, विकास भी हाई सैलरी वाली जॉब कररहा था तो वहीं मनीषा एक प्राइमरी स्कूल में प



भोला

ठीक 30 बरस की उम्रमें हैजे से उसकी मौत हो गई, गांव से शहर ले जाया गया उसे। इससे पहले कि उसेअस्पताल ले जाया जाता, यमराज ने उसकी जीवन यात्रा को स्वर्ग तक मोड़ दिया, शायदवहीं गया



कड़वी हकीकत - बेस्टसेलर किताब

सुरेश की उम्र करीब तीस साल और कद 5 फीट 4 इंचथा, सामने से सिर पर बाल थोड़े कम हो रखे थे, एक लंबा कुर्ता और खादी का झोला,हमेशा यही लुक था उसका। ज्यादातर उन विषयों पर लिखना पसंद करता था जिस पर लोगध्यान ही नहीं द



औरत का किरदार

अपने स्टील के डब्बेमें रखे कुछ गुलाब जामुन में से एक को निकालकर प्रीति ने अनिमेष के हाथ मेंजबर्दस्ती थमा दिया। उसके बाद अपने दो साल के बच्चें को खिलाने के बाद अपने पति केजबरन मुंह में ठूंस दिया। ऐसी मिठाई खाकर भी ख़ुश नहीं महसूस कर रहा था अ



कोख का अधिकार

संगीता के विवाह को 6 साल हो चुके थे उसकी 4 साल की एकबेटी थी, वो फिर एक बार मां बनने वाली थी।उसने ये खबर सबसे पहले अपने पति को सुनाई फिर अपनी सासको, जैसे ही उसकी सास ने ये खबर फोन पर सुनी वो बेहद ख़ुश हुई, संगीता गर्मियों कीछुट्टियों में अपनी बेटी को लेकर अपने मायके जबलपुर



अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

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#क्या वाकई निर्भया?

जो दिखाई देता है, हम सभी जानते हैं कि वह हमेशा सत्य नहीं होता है किन्तु फिर भी हम कुछ ऐसी मिट्टी के बने हुए हैं कि तथ्यों की जांच परख किए बगैर दिखाए जा रहे परिदृश्य पर ही यकीन करते हैं और इसका फायदा भले ही कोई भी उठाता हो लेकिन हम अपनी भावुकतावश नुकसान में ही रहते है



देश और समाज के विकास में महिलाओं का योगदान अहम्

-स्वाति आनंदनारी ईश्वर की उत्कृष्ट सृष्टि है । कहते है कि नारी को देवी का रूप मन जाता है।देश के सम्पूर्ण विकास में इस देवी की भागीदारी अनिवार्य है। किसी भी समाज या देश के विकास में नारी का योगदान महत्वपूर्ण होता है। किसी भी राष्ट्रनिर्माण या समाज के विकास में जब तक न



मिसालः सरपंच ने की अनोखी शादी, फैसला सुन दूल्हे का चेहरा देखती रह गई दुल्हन, मां-बाप भी हैरान

देश के एक सरपंच ने बेहद अनोखी शादी करके मिसाल पेश की। ऐन मौके पर दूल्हे का फैसला सुनकर दुल्हन उसका चेहरा ही देखती रह गई, वहीं मां बाप और गांव वाले भी हैरान हैं।हरियाणा में रोहतक जिले के कलानौर क्षेत्र के तैमूरपुर गांव के सरपंच ने अपनी शादी में कन्या भ्रूण हत्या न करने का भी संदेश दिया। शादी में सात



गोद में बच्चा लेकर रिक्शा चलाती है यह मां,इसके जज्बे के आगे पुरुषों की हिम्मत भी जवाब दे जाएगी

मां. एक ऐसा शब्द है जो दिल को बेहद सुकून देता है। घर संभालने के लिए मां दिन-रात एक कर देती है। 24 घंटे ड्यूटी होती है इनकी। सुबह उठकर खाना बनाना, काम पर जाना, घर की छोटी सी छोटी बातों का ख्याल रखना..ऐसा सिर्फ मां ही कर सकती है। मां के जज्बे



इस पीपल के पौधे को इतनी इज़्ज़त और सुरक्षा क्यों मिलती है, जिसकी आधी भी सुरक्षाऔर इज़्ज़त हमारे देश की बेटियों को नहीं मिलती

भारत कहने को तो एक महान देश है, पर मैं नहीं मानती... क्यों क्योंकि जिस देश में बड़े-बड़े मंचों पर, चुनावी रैलियों में, महिला सशक्तिकरण की डिबेटों में, तो एक औरत को देवी का दर्ज़ा दिया जाता है, उसी देश में उसकी सुरक्षा मुद्दा नहीं बनता, बल्कि उसकी सुरक्षा से ज़्यादा एक पीपल के



लिज्जत पापड़ के सफलता की कहानी : 7 औरतों ने 80 रुपये उधार लेके की थी शुरुआत

15 मार्च 1959 को साउथ मुंबई की 7 औरते ने मिलकर एक ऐसा बिसनेस शुरू किया, जिसके बारे में किसीने सोचा भी नहीं था। इन औरतो ने पापड़ बनाने का काम शुरू किया ताकि को खुद भी कुछ पैसे कमा सके, पहले दिन पापड़ बेचकर जिन्होंने सिर्फ 50 पैसे की कमाई की थी आज वो उसी पापड़ की कंपनी की कमाई 1600 करोड हैं। 7 औरतों न



हाई डिमांड "बहू-बेटी जैसी"????

आकांक्षा श्रीवास्तव। .....?????"बहू बेटी जैसी चाहिए???? क्या हुआ आप भी भौचक्के रह गए न ,भइया आजकल अलग अलग तरह कि डिमांड शुरू हो गयी है। यह सुनते मेरे मन मे भी लाखों प्रश्न उमड़ते बादलों की तरह गरजने लगे कि ये कैसी डिमांड??? बहू- बेटी जैसी.???आख़िर एक स्त्री पर इतना बड़ा प्रहार क्यों???? आख़िर एक बहू को



World Breastfeeding Week 2018: पार्लियामेंट हाउस हो या रैम्प, जब ब्रेस्टफीडिंग करती माओं की ये तस्वीरें हुईं Viral

ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) को बढ़ावा देने के लिए हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है. इस साल ब्रेस्टफीडिंग वीक की थीम है "Breastfeeding: Foundation for Life". वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक नवजात बच्चे के शुरुआती 6 महीने सिर्फ उन्हें मां का



एक ख़त हर ‘मर्द’ के लिए, जिसने राह चलते, बस में, मेट्रो में, ऑटो में मर्ज़ी के बग़ैर मुझे छुआ

कुछ दिनों पहले की बात है... यही कोई 7:30 बजे मैं दफ़्तर से निकली. मेट्रो लेट चल रही थी तो घर पहुंचते-पहुंचते 9:15 बज गए. बरसात के कारण स्ट्रीट पर लगी लाइटें भी ख़राब थी. मैं घर से तकरीबन 1 मिनट की ही दूरी पर थी कि एक बाइक की आवाज़ पीछे से सुनाई दी.मैंने अपना लैपटॉप बैग पी



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