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लो हो गयी भोर

सांझ ढलने को थी जब उसकी ऑख खुली थी । उसने अपनी नजर को कमरे के चारों ओर घुमाया, ये उसका कमरा नहीं था । सामने खिडकी खुली थी और सामने खूबसूरत पहाडियां नजर आ रही थी । आकाश में पंछियों के झॅुड अपने घरोंदो की ओर जा रहे थे । जिस बिस्‍तर पर वो लेटी थी वो शायद किसी अस्‍पताल का





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