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आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद की राजनीति

आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद कीराजनीति वैशविक परिदृश्य में कुछ घटनाक्रम ऐसेहोते हैं जो अलग अलग स्थान और अलग अलग समय पर घटित होते हैं लेकिन कालांतर में अगरउन तथ्यों की कड़ियाँ जोड़कर उन्हें समझने की कोशिश की जाए तो गहरे षड्यंत्र सामने आतेहैं। इन तथ्यों से इतना तो कहा ही जा सकता है कि सामान्य से लगने



19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी जननायक “बिरसा मुंडा”

झारखण्ड यानी'झार' या 'झाड़'जो स्थानीय रूप में वन का पर्याय है और 'खण्ड' यानीटुकड़े से मिलकर बना है। अपने नाम के अनुरुप यह मूलतः एक वन प्रदेश है जो झारखण्ड आंदोलन के फलस्वरूप सृजित हुआ । प्रचुरमात्रा में खनिज की उपलबध्ता के कारण इसे भा





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