बीत रहा दशक

एक दशक बीतने वाला है, बहुत कुछ बदल गया है, बदल रहा है। अगले दशक में जाने से पहले एक नजर देख ले। ये दशक बेटियों की दहशत और आदमी की वहशीपन की आबादगी का रहा। 16की निर्भया और दुधमुंही बच्चियों के जिस्म को नोचने का रहा। नोटों से गांधी गायब नहीं हुआ, बस ये शुक्र रहा। नोट गायब करने की साजिशों का रहा। कितन



चंद्रयान 2

भारत का चंद्रयान 2 मिशन फेल रहा परन्तु यदि यह सफल होता तो इससे आम आदमी को क्या लाभ होता।क्या वह चांद पर जाकर रह सकता था ?क्या वह चांद पर घर खरीद सकता था ?या फिर यह सब झूठी शान दिखाने या नेताओं और पूंजीपतियों द्वारा गरीबों के पैसे पर चांद पर अयाशी करने का माध्यम बनता औ



बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ....!!

कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बालविवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस - असहाय मासूम। दूर - दूर तक कोईतुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को एक जगह ला खड़ीकरती है। 80 के दशक तक जबरन बाल विवाह की सूली पर लटका दिए गए नौजवानोंकी हालत बदहाल अर्थ व्यवस्था में



"गज़ल"आदमी भल फरज मापता रह गया

काफ़िया- आ स्वर रदीफ़- रह गया वज्न- २१२ २१२ २१२ २१२ फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन"गज़ल"आदमी भल फरज मापता रह गयाले उधारी करज छाँकता रहा गयाखोद गड्ढा बनी भीत उसकी कभीजिंदगी भर उसे पाटता रह गया।।दूर होते गए आ सवालों में सभीहल पजल क्या हुई सोचता रह गया।।उमर भर की जहमद मिली मुफ्त



आँखों में काजल है - दूसरा आदमी

Aankhon Mein Kajal Hai Lyrics of Doosra Aadmi (1977): This is a lovely song from Doosra Aadmi starring Rishi Kapoor, Neetu Singh, Rakhee and Deven Verma. It is sung by Lata Mangeshkar and Kishore Kumar and composed by Rajesh Roshan.दूसरा आदमी (Doosra Aadmi )आँखों में काजल है की लिरिक्स (Lyrics Of



चल कहीं दूर निकल जाएँ - दूसरा आदमी

Chal Kahin Door Nikal Jaayein Lyrics of Doosra Aadmi (1977): This is a lovely song from Doosra Aadmi starring Rishi Kapoor, Neetu Singh, Rakhee and Deven Verma. It is sung by Mohammad Rafi, Lata Mangeshkar and Kishore Kumar and composed by Rajesh Roshan.दूसरा आदमी (Doosra Aadmi )चल कहीं दूर निकल जाए



नज़रों से कह दो प्यार में - दूसरा आदमी

Nazron Se Keh Do Pyar Mein Lyrics of Doosra Aadmi (1977): This is a lovely song from Doosra Aadmi starring Rishi Kapoor, Neetu Singh, Rakhee and Deven Verma. It is sung by Lata Mangeshkar and Kishore Kumar and composed by Rajesh Roshan.दूसरा आदमी (Doosra Aadmi )नज़रों से कह दो प्यार में की लिरिक्स



दूसरा आदमी (Doosra Aadmi )

"Doosra Aadmi" is a 1977 hindi film which has Rishi Kapoor, Neetu Singh, Rakhee, Deven Verma, Yunus Parvez, Satyen Kappu, Beena, Shashi Kapoor and Gita Siddharth in lead roles. We have 3 songs lyrics and 3 video songs of Doosra Aadmi. Rajesh Roshan has composed its music. Lata Mangeshkar, Kishore K



क्या आदमी सच में आदमी है ?

'' आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आदमी में इंसानियत , मानवता जैसे भाव प्रचुर मात्र में भरे हैं ,ऐसा कहा जाता है किन्तु आदमी का एक दूसरा पहलु भी है और वह है इसका अन्याय अत्याचार जैसी बुराइयों से गहरा नात



#जागो रे अाम आदमी

किसी शायर ने कहा है - ''कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .'' भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ''असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गम



घी गेहूँ नहीं रोज़गार चाहिए साहब

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव किसी भी लोकतंत्र का महापर्व होते हैं ऐसा कहा जाता है। पता नहीं यह गर्व का विषय है या फिर विश्लेषण का कि हमारे देश में इन महापर्वों का आयोजन लगा ही रहता है । कभी लोकसभा कभी विधानसभा तो कभी नगरपालिका के चुनाव। लेकिन अफसोस की बा



आम आदमी की किडनी (व्यंग्य)

वैसे तो सभी अंग शरीर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. लेकिन किडनी को इतना तवज्जो क्यूँ देते हैं हम? शायद इसीलिए कि वह हमें आसानी से मिलती नहीं और मिलती भी है तो इतनी महंगी की सुनकर हार्ट फेल हो जाये! किडनी और कीमती के शब्दों में कोई ज्यादा फर्क नहीं है. किडनी तो इतनी कीमती है कि बङे पैमाने पर इसकी तस्करी



500 - 1000 के नोट बंदी को लेकर देहात क्षेत्रों में खासा परेशानी, आपबीती बताई

फेझत तो बड़ी हॉवे लागल हो। सरकार चाहे जेतना कैह लो आर सत्ता पक्ष भी चाहे झुठलाय दो, सच तो यहे लागो कि आदमी सब के बड़ी तफलिक होय रहल हो। हां , ई बात दोसर हो कि कुछ आदमी एकरा हंसके सहे रहलो तो कुछ कुढ़ करके, पर सहे तो दुयो रहल हो। दू दिन से एते एते आदमी के पास पैसा



आम आदमी का नाम लेकर सरकार को ललकारना बन्द करो

आम आदमी का नाम लेकर सरकार को ललकारना बन्द करो मैं एक आम आदमी हूँ और काफी समय से देश में जो चल रहा है उसे समझने की कोशिश कर रहा हूँ । सरकार द्वारा काला धन और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 1000 और 500 के नोट बन्द करने के फैसले से मुझे भ्रष्टाचार और काले धन से मुक्ति की उम्म



01 अक्तूबर 2015

मजबूरी

न चाहते हुए भी वो काम करवाती है ॥जो दिल को नही भाता॥न दिमाग को भाता ॥फिर भी मैं उसी डगर जाता हूँ ॥आखिर क्यूं? मोह मोहे जीने न दे॥किसका मोह ओर कैसा मोह॥यह दुनियादारी एक ऐसी मदारी॥बंदर की तरह जो मुझे नचा रही ॥रंगमंच ऐसा ,अभिनय करवा मुझसे, खाख में मिला रही॥



आज का विचार (१)

"बड़ा आदमी वह कहलाता है जिससे मिलने के बाद कोई स्वयं को छोटा न महसूस करे।"



विवादित राजनीति का स्थापित नाम

कांग्रेस की केंद्र सरकार के तमाम घोटालों के बाद जब अन्ना हज़ारे का जबरदस्त आंदोलन खड़ा हुआ तो उसकी तुलना जेपी द्वारा किये गए इमरजेंसी के दौरान आंदोलन से की गयी. इस आंदोलन के आउटपुट के रूप में देखा जाय 'अरविन्द केजरीवाल' ही दिखते हैं. व्यवस्था बदलने की इस लड़ाई से एकमात्र अरविन्द की उत्पत्ति ही हो सकी.



क्या हम मुफ्तखोर है?

मुफ्तखोरी किसे कहते है ये क्या आर एस एस और बीजेपी हमे सिखाएगी ? इस देश के 70% गरीब लोगों को मुफ्तखोर कहना उनका अपमान है बीजेपी ऐसा कहना बंद करे नहीं तो जनता उसे सबक सिखाएगी। गरीबों को उनका पूरा हक़ दे सरकार। जितना पैसा केंद्र और राज्यों से गरीबो के लिए आता है पाई पाई उसके पास पहुँचाने की व्यवस्था क



मन की बात नहीं जान की बात

प्रिये अरविन्द केजरीवाल जी इस प्रचंड बहुमत के लिए 'आप' और आपको बधाई। जिस भाजपा को ठीक 9 महीने पहले जनता ने प्रचंड बहुमत दिया था उसी जनता ने मोदी और बीजेपी को धूल चटा दिया। इसके कारणों की अगर समीक्षा करे तो केवल यही निष्कर्ष निकल कर आता है की जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होने वाली है। जिस 15



इसे कहते हैं आम आदमी की ताकत खडूस राजनीतिज्ञों

​ किसी शायर ने कहा है - ''कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता , एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .'' भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ''असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गमय''का ही सन्देश दिया है और क्रांति कभी स्वयं नहीं होती सदैव क्र



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