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आँख में उम्र कैद

आँख में उम्र कैद बल्ब की रोशनी लकड़ी की मेज मे पड़ रही थी, मेज के ऊपर एक किताब जिसके मुख्यप्रष्ठ मे उभरता शब्द शहर की तरफ ले गया शहर नदी के किनारे बसा परछाई को उसके पानी मे पाता हैं| दिन की रोशनी और रात की रोशनी मे अलग-अलग दिखता| इन दोनों की परछाई मे एक बस्ती शामिल थी जिसकी परछाई नदी मे डूबी रहती|



आँखों की कमजोरी का इलाज-Aankhon Ki Kamjori Ka Ilaj

आँखों की कमजोरी का इलाजआँखे हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये हमारे शरीर सबसे संवेदनशील अंग हैं। आँखों का कमजोर होना आजकल आम बात हो गई। हर व्यक्ति,बच्चा दिनभर फोन,टीबी,कम्पूयटर और टैबलेट में आंखे गढ़ाए रहता हैं। बालों में कलरऔर तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट करना। अनियमित जिवनशैली। तनाव भरा



यह चीजे खायेगें तो उतर जाएगा आंखो का चश्मा, जाने कैसे

Third party image referenceआजकल हर व्यक्ति आंखो की रोशनी को लेकर चिंतित है । आवश्यकता से अधिक दिमाग की मेहनत, तेज रोशनी वाली वस्तुओं को ज्यादा निकट से देखना, जरूरत से अधिक मोबाइल का प्रयोग और मस्तिष्क व स्नायु की कमजोरी से भी आंखों की रोशनी जल्दी कम हो जाती है । लेकिन प्रकृति में अपने आप से बहुत सी



आंखों की घटती रोशनी के कारणों को एक बार जरूर जान लेना चाहिए

विटामिन ए की मनुष्य के शरीर को बहुत आवश्यकता होती है । विटामिन ए को ही कैरोटीन कहा जाता है । शरीर में विटामिन ए की कमी होने से काफी हानि भी हो सकती है । अगर इसकी कमी हो ही जाये तो इसे पूरा करने के दो तरीके है एक खाने पीने की कुछ चीजे और दूसरा विटामिन ए की गोलियां और सप्लीमेंट आदि । शरीर को विटामिन ए



तुम्हें बच्चों की, याद नहीं आती है ,

वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,



सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है - पियूष मिश्रा

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में हैवक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँहम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में हैसरफ़रोशी की...देख फाँसी का ये फंदा ख़ौफ़ से है काँपताउफ़्फ़ कि जल्लादों की हालत भी बड़ी मुश्किल में हैनर्म स्याही से लिखे शेरों की बातें चुक गईंइ



“गीत” बंद कर लो आँख तुम बेचैन दिल में आ बसे...... क्या सुनाऊँ आप को......

“गीत”क्या सुनाऊँ आप को जब आप दिल में आ बसेनैन तो कबसे विकल थे चैन दिल में आ बसे........ क्या सुनाऊँ आप को.....देखना जी इस गली में और भी गलियाँ बहुत रुक न जाना छोड़ राहें मोड़ भी मिलते बहुत क्या भला फरियाद होगी यह गली अंधेर मेंछाया न आती दिन बताने रैन दिल में आ बसे......क्या



कब नीर बहेगा आँखों में

सागर कब सीमित होगाफिर से वो जीवित होगाआग जलेगी जब उसके अंदरप्रकाश फिर अपरिमित होगा ||सूरज से आँख मिलाएगाकब तक झूमेगा रातों में ?कब नीर बहेगा आँखों में ?छिपा कहाँ आक्रोश रहेगादेखो कब तक खामोश रहेगाज्वार किसी दिन उमड़ेगा सीमाएं सारी तोड़ेगावो सच तुमको बतलायेगाबातों से आग लगायेगाएक धनुष बनेगा बातों काबात



“गजल” ख्वाब आँखों में दिखा तो भा गया

मापनी- 2122 2122 212 “गजल”ख्वाब आँखों में दिखा तो भा गयामौसम बिना बादलों के आ गयायाद तेरी थी घिरी घर छा गईनैन मेरे खुल गए तक ता गया॥खूब थी वो रात आ ढ़लने लगी भोर का है कारवाँ चलता गया॥लोग भी आकर मिले पादान पर पर न थी रौनक गिला बढ़ता गया॥ एक दिन वह शाम जब ढलने लगी दिख गया उनका महल कहता गया॥ क्या ह



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रस्तुत ब्लॉग में मैनें उन ग़ज़लों और रचनाओं को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया है , जिन्हें किसी पत्रिका ,मैग्जीन ,अखबार,संस्करण या किसी वेव साइट में शामिल किया गया है। आशा ही नहीं बल्कि पूरा बिश्वास





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