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हे आकाश

मैं भी छूना चाहता हूँ उस नीले आकाश को.… जो मुझे ऊपर से देख रहा है, अपनी और आकर्षित कर रहा है, मानों मुझे चिढ़ा रहा हो, और मैं यहाँ खड़ा होकर… उसके हर रंग निहार रहा हूँ, ईर्ष्या भाव से नज़रें टिका कर, उसके सारे रंग देख रहा हूँ, अनेक द्वंद मेरे मन में..... कैसे पहुँचु मैं उसके पास एक बार, वो भी इठला कर,



तू कविता हैं मुझ बंजारे की

तू कविता हैं मुझ बंजारे की, सुबह की लाली, शाम के अँधियारे की, वक्त के कोल्हू पे रखी, ईख के गठियारे की, हर पल में बनी स्थिर, नदियों के किनारे की, सूरज की, धरती की, टमटमाते चाँद सितारे की, हान तू कविता है मुझ बंजारे की। तू कविता हैं मुझ बंजारे की, रुके हुए साज पर, चुप्पी के इशारे की, इस रंगीन समा में



गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर की एक रचना का अंश

मै अनेक वासनाओं को प्राणपन से चाहता हूँ;तूने मुझे उनसे वंचित रख, बचा लिया.तेरी यह निष्ठुर दया मेरे जीवन के कण कण में व्याप्त है.तूने आकाश, प्रकाश, देह, मन, प्राण बिना मांगे दिए हैं.प्रतिदिन तू मुझे इस महादान के योग्य बना रहा है;अति इच्छा के संकट से उबार कर...मित्रों , अर्थात अपने आप को अति इच्छा के



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



बस मैं और तू - आकाशवाणी

आधार मुख्य और तू आकाशवाणी के गीत: बेस मेन और तु 2013 बॉलीवुड फिल्म आकाशवाणी से एक सुंदर हिंदी गीत है। यह गीत हितेश सोनिक द्वारा रचित है। निखिल डिसोजा ने इस गीत को गाया है। इसके गीत लव रंजन द्वारा लिखे गए हैं। हमारे पास आपके लिए 'बेस मेन और तु वीडियो' भी है।आकाशवाणी (AkaashVani )दिया धक्का रात कोऔर ह



आकाशवाणी (AkaashVani )

'आकाशवाणी' एक 2013 हिंदी फिल्म है जिसमें प्रमुख भूमिकाओं में कार्तिकेय तिवारी और नुष्त भारुचा हैं। हमारे पास 3 गाने के गीत, 2 वीडियो गाने और आकाशवाणी के एक ट्रेलर हैं। हितेश सोनिक ने अपना संगीत बना लिया है। निखिल दुसूजा, शालमली खोल्गेड, थॉमसन एंड्रयूज, सुनिधि चौहान और केय ने इन गीतों को गाया है जबकि



“गज़ल” आकाश उठाकर तुम जब वापस आओगे

वज़्न- २२१ १२२२ २२१ १२२२ काफ़िया- अ रदीफ़ आओगे “गज़ल” आकाश उठाकर तुम जब वापस आओगेअनुमान लगा लो रुक फिर से पछताओगेहर जगह नहीं मिलती मदिरालय की महफिल ख़्वाहिश के जनाजे को तकते रह जाओगे॥ पदचाप नहीं सुनता अंबर हर सितारों का जो टूट गए नभ से उन परत खिलाओगे॥इक बात सभी कहते हद में रह



26 /6/1975 देश में आपत्काल की घोषणा

26 जून 1975 देश में आपतकाल की घोषणा डॉ शोभा भारद्वाज 26 जून 1975 ,आकाशवाणी से न्यूज रीडर के बजाय तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिराजी ने आठ बजे की न्यूज में स्वयं आपतकाल की घोषणा की ‘भाईयो और बहनों राष्ट्रपति महोदय ने आपतकाल की घोषणा की है इससे आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है’ |ब





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