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[Photos] सबसे अलग जोड़ी: रित्विक धजानी और आशा नेगी | आई डब्लयू एम बज

[Photos] सबसे अलग जोड़ी: रित्विक धजानी और आशा नेगी | आई डब्लयू एम बज



शरमन (जोशी) शरारती है: आशा नेगी

आशा नेगी ने ऑल्ट बालाजी सीरीज बारिश की शूटिंग के अपने अनुभव के बारे में बात कीप्रतिभाशाली और खूबसूरत अभिनेत्री आशा नेगी एक कलाकार के रूप में फिर से जादू बुनने के लिए तैयार हैं, और इस बार, यह वेब पर है।आशा, जो पवित्रा रिशता (ज़ी टीवी) में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, को ऑल्ट बालाजी की बारिश में एक महत्



'भव-सागर'

भव सागर, यह संसार है जीवन, सागर मझधार हैघोर, गहन विपदा है घेरेजीवन में है, तेेरे और मेरे झंझावत ढेरों पारावार हैलहरों से उठती, हुँकार है आशा और निराशा इसमेंजीवन की दो पतवार है निराशा से होता कहाँ ?जन-जीवन का उद्धार हैआशा से ही लगती यहाँनौका तूफानों से पार हैभव-स



85 की हुई सुरों की मल्लिका आशा भोसले

सुरों की मल्लिका, मशहूर गायिका आशा भोसले का कल जन्मदिन था , महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव सांगली में 8 सितम्बर 1933 को जन्मी आशा भोसले को शायद कभी इस बात का अंदाजा भी नही रहा होगा कि वो इतनी बड़ी गायिका बनेगी और सारी दुनिया उनको सलाम करेगी । आशा नौ साल की थीं, जब परिवार पुणे से बंबई आ गया. उन्होंने



आशा कल की

जीवन में घोर निराशा हो काले बादल जब मँडरायेंथक हार के जब हम बैठ गयेंकोई मन्जिल ना मिल पायेतब आती धीरे से चलतीछोटी -छोटी , हल्की-हल्की मैं आशा हुँ , तेरे कल की।। रात्री का विकट अंधेरा हो कुछ भी नजर ना



जब मैं तुम्हे लिखने चली

जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थीअच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गयाहमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गयाजीतना ही सिखाया हारने की मन में न लाने दीतो क्यों एक पल भी जीने की मन में न आने दीहिम्मत बांधी सबको और खुद ही खो दीदूर कर ली खुदा ने हमसे माँ कि गोदीदिल था तुम



काश

काश भ्रष्टाचार न होता ,फिर भलों का दिल न रोताकानून ढंग से काम करता, काश भ्रष्टाचार न होता। लोकतंत्र भ्रष्ट न होता, रिश्वत का तो नाम न होता संसद ढंग से काम करता काश भ्रष्टाचार न होता।होता चहुँ और निष्पक्ष विकासफैलता स्वतं



"चरखा" 'कविता'

हे ! वरदानीतुम आनबसो !मेरे अंदर वो प्राण भरो ! कायर होता,मैंमन ही मनवीर सा तुमउत्कर्ष भरो ! हे ! मानव रक्षकअभिमानीविश्वास भरो !आभास भरो ! चित्त को पावन अब कर दो ! तुम अमृत वाणी ! कुछ कहके तुमजीवन का मार्गप्रशस्त्र करो !हे ! वरदानीतुम आनबसो !मेरे अ



मैं वापिस आऊंगा - सूरज बड़त्या

मैं वापिस आऊंगा - सूरज बड़त्या जब समूची कायनातऔर पूरी सयानात की फ़ौजखाकी निक्कर बदल पेंट पहन आपकी खिलाफत को उठ-बैठ करती-फिरती होअफगानी-फ़रमानी फिजाओं के जंगल मेंभेडिये मनु-माफिक दहाड़ी-हुंकार भरे....आदमखोर आत्माएं, इंसानी शक्लों में सरे-राह, क़त्ल-गाह खोद रहे होंसुनहले सपनों की केसरिया-दरियाबाजू खोल बुला



यत्र, तत्र, सर्वत्र

. यत्र, तत्र, सर्वत्रयदि तुम बिखेर दो स्वयं कोयत्र, तत्र, सर्वत्रपुष्पों की तरह !यदि तुम महकने लगोयत्र, तत्र, सर्वत्रगुलाबों की तरह !यदि तुम छाया दो हर पथिक कोवृक्षों की तरह !शीतलता के लिए बहोहवा के झोंकों की तरह !चहको, चिड़ियों की तरह।चमको, चाँद-तारों की तरह !कुछ नहीं, सिर्फ मनोबल दोदीन-दुखियों कोसं



अभी उनसे

अभी उनसे इश्क का इज़हार बाकी है|यूं तो हो चुकी है निगाहों की बयानबाजी, अब तो बस जबानी करार बाकी है| ये मौसम-ए-इश्क का मिजाज ही तो है,दिलों मे धड़कन,जिन्दगी मे रफ्तार बाकी है| वो दिल मे मेरे दे चुके हैं दस्तक अपनी,उनके जिन्दगी मे आने का इन्तजार बाकी है|





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