आसमान

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हे आकाश

मैं भी छूना चाहता हूँ उस नीले आकाश को.… जो मुझे ऊपर से देख रहा है, अपनी और आकर्षित कर रहा है, मानों मुझे चिढ़ा रहा हो, और मैं यहाँ खड़ा होकर… उसके हर रंग निहार रहा हूँ, ईर्ष्या भाव से नज़रें टिका कर, उसके सारे रंग देख रहा हूँ, अनेक द्वंद मेरे मन में..... कैसे पहुँचु मैं उसके पास एक बार, वो भी इठला कर,



"गज़ल"उड़ा अपना तिरंगा है लगा आसमान का तारातिरंगा शान है जिसकी वो हिंदुस्तान का प्यारा

वज़्न- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ काफ़िया-आन रदीफ़- का आरा"गज़ल"उड़ा अपना तिरंगा है लगा आसमान का तारातिरंगा शान है जिसकी वो हिंदुस्तान का प्याराकहीं भी हो किसी भी हाल में फहरा दिया झंडाजुड़ी है डोर वीरों से चलन इंसान का न्यारा।।किला है लाल वीरों का जहाँ रौनक सिपाही कीगरजता शेर के मान



बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर

नमस्कार दोस्तों, !! बधाई हो !!बसंत पंचमी आई है ! आसमान में पतंगे छाई हैं !! मुबारक हो सब को यह त्यौहार ! मिले सभी को खुशियों का हार !! !! धन्यवाद !!



एक आम लड़की -कविता

सपने बुनतीआसमान छूने केग़म में मुस्कुरातीएक आम लड़कीकुछ कहती कुछ सुनतीअपनों को खुश रखतीकभी सहम जाती तेज हवाओ सेकभी तूफ़ान से जूझतीएक आम लडकीदुनिया की भीड़ मेंअसहाय, लड़खडाई-सीउठकर गिरी, आन्सू छलकातीगिरकर उठी, ज्वाला बनतीएक आम लड़कीअमीरो जेसी शानदौलत नहीं चाहतीथोडा प्यार थोड



पतंगों की बेला

आई पतंगों की बेलाहैचहुं ओर पतंगों कारेला हैमौसम नई ख्वाहिशों का हैमाँ-बाप ने करदी ढीली जेबें निकले शौकीन ले बहुरंगीपतंगेंचाइनीज हो या डोरबरेली आई-बो----ओ सुनता रोजबोर हो या संध्या का दौरउड़ा रहे सब मचाकरशोरकेजरीवाल, राहुल याहों मोदीनहीं दिखती इनमें फूटपरस्ती मोहल्ला-मोहल्ला बस्ती-बस्तीउड़ाते इन्हें



किसानो को मुवावजा

अभी अन्नदाता का दर्द कम नही हुआ था कि  आज फिर से आसमान मेँ बादलों ने डेरा जमा लिया है अन्नदाता का कलेजा फिर से तेज धङकने लगा है क्योंकि उसकी साल भर की कमाई खेतों मे पङी है लेकिन यही बादल कुछ लोगों को सुहाना लग रहा होगा सरकार किसानो को मुवावजे के नाम पर धोका दे रही है





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