सच कहाँ हैं?

सच कहाँ हैं?कब्रिस्तानमे राख़ नहीं मिलती, मिट्टी-मिट्टी मे दफन हो जाती हैं लाशे।समशान मे हैंराख़,एक चिंगारी सेआग लगकर शांत हो जाती चिताए। लौट जाते हैंवह लोग, ख्वाबोंके समुंदर मे भ्रमित गोते लगाते हुए।दफन हो जाना, भसम हो जाना,ताबबूतों मे सिमट कर रह जाना अंत हैं।यह सारा दृश्य, आंखो की पालको को भिंगोते ह



@झिनकू भैया के प्रपंची आँसू"

"झिनकू भैया के प्रपंची आँसू" एक आँख से विनाशक बाढ़ व दूसरी आँख से फसलों को सुखाने वाला हृदय विदारक सूखा देखकर झिनकू भैया की आँखे पसीजने लगी जो चौतरफा दृश्य परिवर्तन के तांडव को देखकर छल-छल बहने की आदी तो हो ही गई है, अब तो उसे जीना और पीना भी है। बड़े ही भावुक और चिंतनशील आदमी हैं झिनकू भैया, जब धारा



"गीतिका"यह कैसा आया पहरा हैघर-घर में आँसू पसरा है

१६-८-१८ राष्ट्र के अनन्य भक्त लोकतंत्र के जीवंत प्रतिमूर्ति माँ भारती के महानतम सपूत माँ वीणा धारिणी के वरदपुत्र सर्व समाज के अभिवावक परम सम्माननीय पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न व पद्मविभूषण स्वर्गीय श्रीमान अतल बिहारी बाजपेयी जी कोसादर नमन भावपूर्ण श्रद्धांजलि स्वरूप समर्





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