1


अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ ये तो नहीं......

<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC



हम जुबां

हिंदी है हम वतन है। अपनी अभिव्यक्ति कहने का जतन है, अपनी संस्कृति का न हो पतन, बस यही जतन है। हिंदी है हम वतन है। जुबानें बेहिसाब है जहां में, हम वतन के, खुद के आजाद ख्यालात की, जुबान है हिंदी... अपनेपन का अहसास, खुद के शब्दों की परवाज़ है हिंदी, कोयल की जुबान है हिंदी। हिंदी है हम वतन है...



गाँधी जी की स्वतंत्रता

गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता को पूर्ण स्वतंत्रता क्यों नहीं माना? कारण बहुत सरल है, लेकिन बहुत सारे लोग इसे बहुत जटिल बनाते हैं, लोगों को भ्रमित करते हैं। देश की स्वतंत्रता वास्तविक स्वतंत्रता नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता वास्तविक स्वतंत्रता है। बोलने की स्



ये हे भारत की अभिव्यक्ति

ये होती हें अभिव्यक्ति की आज़ादी ये आज जनता को सुप्रीमकोर्ट ने बता दिया की एक व्यक्ति की अभिव्यक्ति को पूर्ण करने के लिया सुप्रीमकोर्ट ने एक पूर्ण समाज या ये कहे पूरा हिन्दू समाज की ( भावनाओं को ठेस ) पहुचना अच्छा लगा आज उन सब को भी बहुत अच



ये धुआं कहां से उठता है...

जुड़ सकूं, ऐसा कोई गुर तलाशती हूं,सन्नाटों के बिंदास सुर तलाशती हूं...हूं भी या माजी की शादाब मुहर भर हूं,किससे पूछूं, उसको अक्सर पुकारती हूं...रोने के सुकूं से जब घुट जाती हैं सांसें,मुस्कुराहट का अदद दस्तूर तलाशती हूं...फलक-ओ-जमीं से फुर्कत का सबब लेती हूं,लिपट के उससे रोने के बहाने तलाशती हूं...खु



अभिव्यक्ति की आजादी.... विसंवादी सुर !!!

कई बार किसी को अपशब्द कहना, इसेअभिव्यक्ति की आजादी मान लिया जाए तो, आम जीवन में चर्चा का उग्र माहौल पैदा हो जाताहै और अनेक बार मामला गाली-गलौच तक पहुँच जाता है । दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में संसद और राज्योंकी विधान सभाओं में चर्चा के स्थान पर, आपेक्षवादी परम्परा, शाब्दिक तकरार के साथ-साथअनेक बा



&quot;अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक है?&quot;

"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक है?" अति उत्तम, अति गंभीर व चिंतनशील विषय है "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक"। वाणी, प्रकृतिप्रदत्त एक ऐसा अनमोल खजाना है जिससे मानव सहित हर प्राणी अपने मन की भवनाओं को व्यक्त करता है। जन्म से ही इसका प्रादुर्भाव रोने से शुरू होता है औ



समय के साथ | दिव्यांश

https://diwyansh.wordpress.com/2015/06/26/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5/



आतंकी संगठन का खतरनाक 'वैश्विक' उभार

अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दक्षता के बावजूद यदि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ़्रांस जैसे देश आतंकियों के निशाने पर आ जाएँ तो विश्व के दुसरे विकासशील देशों में भय का माहौल उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है. आतंक के शिकार अब तक तीसरी दुनिया के देश ही हुआ करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस ट्रेंड ने विकसित



बड़प्पन के बिना बड़े

~ मेरे मन की भावन ​गूगल+ पर मेरा पन्ना - मेरी रचनाएं, मेरे विचार



...........मर्दों के यूँ न कटें पर .

फिरते थे आरज़ू में कभी तेरी दर-बदर , अब आ पड़ी मियां की जूती मियां के सर . ............................................................. लगती थी तुम गुलाब हमको यूँ दरअसल , करते ही निकाह तुमसे काँटों से भरा घर . ........................................................ पहले हमारे फाके निभाने क



प्यार की अभिव्यक्ति

मै तुझसे पयार नहीं करता पर सायद ऐसा कोई दिन है क्या जब याद टूजी तेरी बातो को सौ सौ बार नहीं करता





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x