मन का निग्रह :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर मनुष्य सभी प्राणियों पर आधिपत्य करने वाला महाराजा है , और मनुष्य पर आधिपत्य करता है उसका मन क्योंकि मन हमारी इंद्रियों का राजा है | उसी के आदेश को इंद्रियां मानती हैं , आंखें रूप-अरूप को देखती हैं | वे मन को बताती हैं और मनुष्य उसी के अनुसार आचरण करने लगता है | कहने का आशय यह है कि समस



पिता

💖💖💖पिता💖💖💖एषणाओं के भंवरजाल मेंउलझ व्यर्थ हीं,व्यथित हो इहजगत् कोन बँधु झुठलाओ।तुममें है हुनर एवम्है अदम्य सामर्थ्य,अजपाजप गह'सबका मालिक एककह नित महोत्सव मनाओ।।हर साल "फादर्स डे" मना एक दिन३६४ भूल जाते आखिर क्यों (?) तुम!"पित्रि यज्ञ महामंत्र" नित्य उचर कर,आशीर्वाद भरपूर बटोर करसदगति रे मन पा



मृत्यु:---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमपिता परमात्मा ने इस समस्त सृष्टि में जीवों की रचना की , जीवन देने के बाद जीवात्मा को एक निश्चित समय के लिए इस पृथ्वी लोक पर भेजा | जिस जीवात्मा का समय पूर्ण हो जाता है वह किसी न किसी बहाने से इस धरा धाम का त्याग कर देता है | नश्वर श



प्रेम

भगवान् "प्रेम" का हीं दुजा नाम है।न वो मूरत में या फिर मकान में है।।उसे चाहते हो बँधु गर तुम पाना,प्रेम का रास्ता बहुत हीं आसान है।अंतरजगत में तीर्थाटन जो करता,वही साघक सिद्ध और महान है।।🙏 🙏 🙏निर्मल🙏 🙏 🙏🙏👣ह👣रि👣प👣द👣🙏



शुद्ध स्वर

बांस की डाल चुन गुहा बनाईसात छिद्र कर होठों से लगाईसा-रे-ग-म-प-ध-नी★ सुर से हटी तन्हाईप्रिय बाँसुरिया तक राधा के हाथों में थमाईतंत्र साधना की जटिल गुत्थी सहज सुलझाईपर राधा थी कि बस कृष्ण नाम की रट लगाईनिर्मल★संगीत के सात शुद्धस्वर:---षड्ज (सा)ऋषभ (रे)गंधार (ग)मध्यम (म)पंचम (प)धैवत (ध)निषाद (नी)स्वर



महाशिवरात्रि

★★★★★शिवरात्रि के शुभ अवसर पर★★★★★★शिव का रहस्यमयी एवम् गौरवमयी इतिहास★2020 ई. में 21 फरवरी को यह शुभ दिन आ रहा है।ऋग्वेद लगभग 15 (पंद्रह) हजार वर्ष पूर्व रचित होना प्रारम्भ हुआ था। अनुमानतः सात हजार वर्ष पूर्व प्रथम महासंभुति तारक ब्रह्म भगवान शिव इस धरा धाम पर मानव के रूप में अवतरित हुए थे।वह समय



मौनी अमावस्या :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव शरीर ईश्वर की विचित्र रचना है , इस शरीर को पा करके भी जो इसके महत्व को न जान पाये उसका जीवन निरर्थक ही है | मानव शरीर में वैसे तो प्रत्येक अंग - उपांग महत्वपूर्ण हैं परंतु सबसे महत्वपूर्ण है मनुष्य की वाणी | वाणी के विषय में जानना बहुत ही आवश्यक है , प्राय: लोग बोले जाने वाली भाषा को ही वाणी म



मनुष्य के वास्तविक बंधु - बांधव :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर मनुष्य माता के गर्भ से जन्म लेता है उसके बाद वह सबसे पहले अपने माता के द्वारा अपने पिता को जानता है , फिर धीरे-धीरे वह बड़ा होता है अपने भाई बंधुओं को जानता है | जब वह बाहर निकलता है तो उसके अनेकों मित्र बनते हैं , फिर एक समय ऐसा आता है जब उसका विवाह हो जाता है और वह अपने पत्नी से पर



मेरा अपना

सुबह हो या फिर शाम होलबों पे बस तेरा नाम होहर काम में हम साथ होसपनों के तुम राजदार होलोगबाग तुझे भले महाकौल कहें,तुम बस एक मेरे श्याम होडॉ. कवि कुमार निर्मल



शंखनाद्

शंखनाद्शुभदिन आज भी आह्लादित कर जाएगापरम अराध्य का सामिप्य मन पा जाएगाप्रचण्ठ तृष्णा- सानिध्य की एषणा गहराई,सद्गुरु कृपा से सांजुज्य पा यह भक्त तर जाएगामैली चादर मन की धुल, आभा से भर जाएगाडॉ. कवि कुमार निर्मल



मेरी जिद्द

"मेरी जिद्द"जिद्द है- मन बनाया है- तुझे पाउँगादिल के एक कोने में छुपा- बिठाउँगागुफ़्तगू में लम्बी रातें- मैं बिताउँगासिकवा-शिकायत रोज सुलझाउँगाखासमखास बन- मयपन मिटाउँगातुझसे आया- तुझमें समा जाउँगाजिद्द है- मन बनाया है- तुझे पाउँगादिल के एक कोने में छुपा- बिठाउँगाडॉ. कवि कुमार निर्मल



अध्यात्मवाद्

⚜️⚜️⚜️🔱⚜️⚜️⚜️''नव चक्रों'' का गूढ़ रहस्यजब मानव समझ पाएगा।अनादि - अनंत परम - सत्ता लख आह्लादित हो जाएगा।।"ब्रह्म" है सत्य"- शास्रोक्तिजगत् को ''सापेक्षिक सत्य''समझ प्रेम सुधा बरसायेगा।पाप-पुण्य का अंतर जानमुक्ति-मोक्ष सहज पायेगा।।⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️⚜️डॉ. कवि कुमार निर्मल



धार्मिक विश्वास और त्याग भावना

धार्मिक विश्वास और त्याग भावना हम प्रायः दो शब्द साथ साथ सुनते हैं– संस्कृति और धर्म | संस्कृति अपने सामान्य अर्थ में एक व्यवस्था का मार्ग है, औरधर्म इस मार्ग का पथ प्रदर्शक, प्रकाश नियामक एवं समन्वयकारी सिद्धान्त है | अतःधर्म वह प्रयोग है जिसके द्वारा संस्कृति को जाना जा सकता है | भारत में आदिकाल स



अध्यात्म

अध्यात्मपरक मन:चिकित्सामनःचिकित्सक अनेक बार अपने रोगियों के साथ सम्मोहन आदि कीक्रिया करते हैं | भगवान को भी अपने एक मरीज़ अर्जुन के मन का विभ्रम दूर करकेउन्हें युद्ध के लिये प्रेरित करना था | अतः जब जब अर्जुन भ्रमित होते – उनके मनमें कोई शंका उत्पन्न होती – भगवान कोई न कोई झटका उन्हें दे देते | यही क



अध्यात्म और मनश्चिकित्सा

अध्यात्म और मनश्चिकित्साअर्जुन ने जब दोनों सेनाओं में अपने ही प्रियजनों को आमनेसामने खड़े देखा तो उनकी मृत्यु से भयाक्रान्त हो श्री कृष्ण की शरण पहुँचे “शिष्यस्तेऽहंशाधि मां त्वां प्रपन्नम् |” तब भगवान ने सर्वप्रथम एक कुशल वैद्य औरमनोवैज्ञानिक की भाँति उनके मन से मृत्यु का भय दूर किया | मृत्यु को अवश



मानव जीवन की गरिमा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*चौरासी लाख योनियों में मानव जीवन को देव दुर्लभ कहा गया है | मनुष्य जन्म बड़े भाग्य से मिलता है क्योंकि मनुष्य को छोड़कर अन्य सभी योनियाँ भोग योनि होती हैं | इस संसार में दो प्रकार की योनियों का वर्णन मिलता है एक भोगयोनि दूसरी कर्मियोनि | मनुष्य के अतिरिक्त अन्य योनियों को भोग योनि कहा गया है क्योंक



मृत्यु का भय :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमात्मा की बनाई यह सृष्टि निरन्तर क्षरणशील है | एक दिन सबका ही अन्त निश्चित है | सृष्टि का विकास हुआ तो एक दिन महाप्रलय के रूप में इसका विनाश भी हो जाना है , सूर्य प्रात:काल उदय होता है तो एक निश्चित समय पर अस्त भी हो जाता है | उसी प्रकार इस सृष्टि में जितने भी जड़



ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना

ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना :ध्यान के अभ्यास के लिए आपने अपने लिएउचित स्थान और अनुकूल समय का निर्धारण कर लिया तो समय की नियमितता भी हो जाएगी |अब आपको स्वयं को तैयार करना है ध्यान के अभ्यास के लिए | इस विषय में क्रमबद्धरूप से तैयारी करनी होगी | इसी क्रम में...प्रथम चरण – ध्यान



साधक कैसे बनें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *इस धरती पर अनेकों जीव विचरण कर रहे हैं इनमें सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य को कहा गया है | चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव योनि कही गई है | साधारण से दिखने वाले मनुष्य में इतनी शक



भरहिं निरन्तर होंहिं न पूरे :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य ने अपनी कार्यकुशलता से अनहोनी को भी होनी करके दिखाया है | अपनी समझ से कोई भी ऐसा कार्य न बचा होगा जो मनुष्य ने कपने का प्रयास न किया हो | संसार में समय के साथ बड़े से बड़े घाव , गहरे से गहरे गड्ढे भी भर जाते हैं | समुद्र के विषय में बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस में लिखा है



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x