ईरानी खानम मुझे जीना सिखा गयी

ईरानी खानम मुझे जीना सिखा गयी पार्ट - 2 डॉ शोभा भारद्वाज इंकलाब ने हमारे सपने तोड़ दिए ईरान में बदअमनी फैल रही थी योरोपियन डाक्टरपहले ही जा चुके थे पाकिस्तानी डाक्टर जाह्दान के रास्ते अपने देश लौट गये भारतीयडाक्टरों के लिए उनके सिफारतखाने ने एक साथ निकालने का इंतजाम किया डाक्टर साहबसबसे बाद में



गाल मिट्ठी मिट्ठी - ऐषा सांग

फिल्म ऐशा -2010 से गॉल मिठी मिथी गीत के साथ पढ़ें और गाएं जो टोची रैना द्वारा गाया जाता है। आप ऐशा से अन्य गाने और गीत भी प्राप्त कर सकते हैं।ऐसा (Aisha )[गाल मिट्ठी मिट्ठी बोलबजने दे ताशे ढोल]गाल मिट्ठी मिट्ठी बोलरस कानों विच घोलबजने दे ताशे ढोलमस्ती में तू वि दोलमन दे नैना तू खोल.. [खोल.. खोल.. ]च



ऐसा (Aisha )

'ऐशा' एक 2010 हिंदी फिल्म है जिसमें मसूद अख्तर, समीर मल्होत्रा, साइरस साहकर, सोनम कपूर, अमृता पुरी, एमके रैना, यूरी सूरी, अभय देओल, अनुराधा पटेल, आनंद तिवारी, विधाशी मेहरा, अरुणोदय सिंह, लिसा हेडन और ईरा हैं। मुख्य भूमिका में दुबे। हमारे पास और ऐशा के एक गीत गीत हैं। अमित त्रिवेदी ने अपना संगीत बना



वे जो पार्टी (एवरीडे) - ऐसा यह जहां - डॉ पलाश सेन

हम फिल्म एसा ये जहां से फिल्म जाओ (रोज़ाना) गीत अभिलाषा सिन्हा, किनशुक सेन, डीजे भदुरी और डॉ पलाश सेन द्वारा गाए जाते हैं और गीत दहलिया सेन - ओबेरॉय द्वारा लिखे जाते हैं।ऐसा यह जहां (Aisa Yeh Jahaan )एवरीबॉडी!नींदों को कह दो न आनारातों को कह दो न जानाजो न करना ाओ वह कर लेंपास तो ा लैब छू लेंबाहों मे



ऐसा यह जहां (Aisa Yeh Jahaan )

"Aisa Yeh Jahaan" is a 2015 hindi film which has Dr. Palash Sen, Ira Dubey, Prisha Dabbas, Kymsleen Kholie, Yashpal Sharma, Saurabh Pandey, Tinu Anand, Micky Makhija, Carol Gracias, Bishnu Kharghoria, Rina Bora and Rabijita Gogoi in lead roles. We have one song lyrics and one video song of Aisa Yeh



कविता

डा हिमेन्दर बाली हिम



ग़ज़ल गंगा: ( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरतसजा  क्या खूब मिलती है किसी   से   दिल  लगाने  की तन्हाई  की  महफ़िल  में  आदत  हो  गयी   गाने  की  हर  पल  याद  रहती  है  निगाहों  में  बसी  सूरत  तमन्ना  अपनी  रहती  है  खुद  को  भूल  जाने  की  उम्मीदों   का  काजल   



बाबा आएगा

बचपन में हम अपनों की गोद में छुपा के सर खुद सुकून से सो जाते थे .......जब कोई कहता बाबा आएगा और उठाकर ले जाएगा आज अपने ही चमन में जब अपनों के सताने से आती नहीं है नीद हमें तो बाबा के पास जाते है और दिखा कर हाथ कहते है बड़े कष्ट में है हम बाबा ले लो तुम हमको अपनी शरण .......



ऐसा क्यों लगता है?

ऐसा क्यों लगता है? की कहीं निकल चलें और चलते-चलते, वहां तक जा पहुंचें जहाँ रस्ते ही चुक जाते हैं। या फिर उन पर चलें जहां आम लोग नहीं जाते हैं। या फिर वहाँ तक जाएँ, लौटें और पुनः वहीं जाएँ। इस तरह जाने और आने का, एक क्रम बनाएँ। कई बार ऐसा भी, उन प्रश्नो को, बार-बार दोहराएँ, माथा फ



प्यार की अभिव्यक्ति

मै तुझसे पयार नहीं करता पर सायद ऐसा कोई दिन है क्या जब याद टूजी तेरी बातो को सौ सौ बार नहीं करता





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