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' डॉ फारुख अब्दुल्ला का खुद को भारतीय मानने से परहेज ,कश्मीरी चीन के शासन में रहने को तैयार ?

'डॉ फारुख अब्दुल्ला का खुद को भारतीय मानने से परहेज ?’ 'कश्मीरी, चीन के शासन में रहने को तैयार हैं’? डॉ शोभाभारद्वाज 'आजतक तीन परिवारों एवं अलगाववादियों नेकश्मीरियों को बरगला कर अपने ही घर भरे हैं स्वर्गीय शेख अब्दुल्ला स्वयं एवं अपनेवंशजो की कश्मीर को जायदाद मानते थे. इस परिवार में स्वर्गीय श



साधुओं की हत्या

वीर भूमि पर संतों की निर्मम हत्या के हृदय विदारक कुकृत्य पर इनके परशुराम व दुर्वासा जैसे रौद्र स्वरूप का आह्वान करता हूँ ताकि इन नीच प्रवृत्तियों के दानवों का संहार हो सके !! नियति इन क्रूर पापियों को उनके कृत्यों की प्रबल यातना से भी दुष्कर दंड दे व ईश्वर जूना अखाडे के दिवंगत साधुओं को अपने श्रीचरण



संस्कृति का सच और अश्लीलता पर हल्ला

(जो देश चांदतारों, मंगल पर पहुंच कर इठला रहे हैं,विज्ञान के नए-नए आविष्कार कर देश के लिए खुशियां समेट रहे हैं,उन की तुलना में हम कहां हैं ? पढ़ कर आप कीआंखें खुली की खुली रह जाएंगी ।)अधिकतरभारतीय जानते ही नहीं कि, संस्कृति है क्या ? जिसे वे अपनी संस्कृति बता रहेहैं, क



महिला होने का महत्व : Value of being a woman

महिला होने का महत्व : Value of being a woman स्त्री महिला अर्थार्थ दादी , माँ , पत्नि , बहन , बेटी, बुआ , मासी ,............आदि ..... आदि| इनके बिना घर केवल मकान होता है, घर नहीं। इनकी कमी का अहसास तब होता है, जब वे घर में नहीं होतीं या आपके साथ किसी स्त्री का सम्बंध



इश्क आज कल, इश्क सुभानल्ला जैसे सामाजिक नाटक के विपरीत एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म होगी: निर्माता धीरज कुमार | आई डब्लयू एम बज

अनुभवी टीवी अभिनेता और निर्माता धीरज कुमार नई ज़ी5 वेब श्रृंखला, इश्क आज कल की सफलता को लेकर काफी आशावादी हैं। उनका कहना है, ”होटल उद्योग की पृष्ठभूमि वाली यह रोमांटिक थ्रिलर, चल रहे लोकप्रिय ज़ी टीवी के शो इश्क सुभानल्लाह का एक तरह का वेब स्पिनऑफ़ है।” एक माध्यम से दूसरे



शोला नहीं, अंगार करो

शोला नहीं, अंगार करोएक नहीं अब सौ-सौ बार करो,प्रतिदिन ऐसे ही पलटवार करो।सारा पाकिस्तान भस्म हो जाए,रणनीति अब कोई ठोस तैयार करो।आज मत करना श्रृंगार की बातेंनहीं करना किसी सरकार की बातेंबंद आज सारे गीत मल्हार करोरणनीति अब कोई ठोस तैयार करो।ललकार है आ जाओ अब रण मेंमिला दो दुश्मन को कण-कण मेंखुद को शोला



2 साल की ये मासूम बच्ची बनी सबसे कम उम्र की अंगदाता, बचाई 6 ज़िंदगियाँ

भारत में एक दो साल के बच्चे ने वो कर दिखाया जिसे करने में बड़े बड़े लोग सोचते हैं। बता दें कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दो साल के बच्चे ने 6 ज़िंदगिया बचाई हैं, इसके साथ ये बच्चा सबसे कम उम्र का अंगदाता भी बन गया है. इस दो साल के बच्चे के ब्रेन डेड होने के बाद उसके परिवार ने उसके अंगों को दान करन



विश्व अंग दान दिवस

हर साल 13 अगस्त को अंग दान दिवसमनाया जाताहै| यह हर किसीके जीवन मेंएक महान अवसरप्रदान करता हैऔर अपने बहुमूल्यअंग दान करने के लिए लोगो को जागरूक भी करता है | अंग प्रत्यारोपण से जुड़े कुछ दिलचस्पआंकड़े :





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