अपनी



फलादेश

69 वें "जन्म दिन" पर मेरा शुभकारी "फलादेशसूर्य में राहु का उपद्रव- 2020 के बाद सुधार💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐कहते सुना सबसे कि मैंने खोया हीं खोया।टघरते आँसुओं की धार- पीया हीं पीया।।दिल हुआ छलनी, वज़ूद ज़ार - ज़ार हुआ।सब खोया मगर, तेरा मैं तेरा "प्यार" हुआ।।शौहरत-दौलत की- कत्तई ख़्वाहिश न थी,आफ़ताब के आग



मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम

मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम : I'm right, The biggest fallacyमैं ही सही हूँ ""तस्वीरें दीवारों से ही नहीं, दिल से भी उतर जाती हैं उनकी , जिन्हें अपने पर खुदा होने का गुरुर होता है। बस जाती हैं यादें दिलों में उनकी , जिन्होंने दिलों को फ़तेह किया होता है। न रहता है ता



गुजरा हुआ ज़माना आता नहीं दुबारा, हाफ़िज़ खुदा तुम्हारा

गुज़रा हुआ ज़माना आता नहीं दुबारा , हाफ़िज़ खुदा तुम्हारा********************************आज रविवार का दिन मेरे आत्ममंथन का होता है। बंद कमरे में, इस तन्हाई में उजाला तलाश रहा हूँ। सोच रहा हूँ कि यह मन भी कैसा है , जख्मी हो हो कर भी गैरों से स्नेह करते रहा है।*************



ओ दूर के मुसाफिर हमको भी साथ लेले रे

ओ दूर के मुसाफ़िर हम को भी साथ ले ले रे******************** मैं छोटी- छोटी उन खुशियों का जिक्र ब्लॉग पर करना चाहता हूँ, उन संघर्षों को लिखना चाहता हूँ, उन सम्वेदनाओं को उठाना चाहता हूँ, उन भावनाओं को जगाना चाहता हूँ, जिससे हमारा परिवार और हमारा समाज खुशहाली की ओर बढ़े । बिना धागा, बिना माला इन बिख



व्याकुल पथिकः

आपके कर्मों की ज्योति अब राह हमें दिखलायेगी-----------------------------------------कुछ यादें कुछ बातें, जिनकी पाठशाला में मैं बना पत्रकार***************************एक श्रद्धांजलि श्रद्धेय राजीव अरोड़ा जी को***********************किया था वादा आपने कभी हार न मानेंगे ,बनके अर्जुन जीवन रण में जीतेंगे हा



ऐसा सुंदर सपना अपना जीवन होगा ...

ऐसा सुंदर सपना अपना जीवन होगा *************************** मैं तो बस इतना कहूँगा कि यदि पत्नी का हृदय जीतना है , तो कभी- कभी घर के भोजन कक्ष में चले जाया करें बंधुओं , पर याद रखें कि गृह मंत्रालय पर आपका नहीं आपकी श्रीमती जी का अधिकार है। रसोईघर से उठा सुगंध आपके दाम्पत्य जीवन को निश्चित अनुराग से भ



अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले..

अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले...***********************पशुता के इस भाव से आहत गुलाब पंखुड़ियों में बदल चुका था और गृह से अन्दर बाहर करने वालों के पांव तल कुचला जा रहा था। काश ! यह जानवर न आया होता, तो उसका उसके इष्ट के मस्तक पर चढ़ना तय था। पर, नियति को मैंने इतना अधिकार नहीं दिया है कि वह मु



किसी का दर्द मिल सके , तो ले उधार ...

किसीका दर्द मिल सके तो ले उधार ****************************** अब देखें न हमारे शहर के पोस्टग्रेजुएट कालेज के दो गुरुदेव कुछ वर्ष पूर्व रिटायर्ड हुये। तो इनमें से एक गुरु जी ने शुद्ध घी बेचने की दुकान खोल ली थी,तो दूसरे अपने जनरल स्टोर की दुकान पर बैठ टाइम पास करते दिखें । हम कभी तो स्वयं से पूछे क



मेरा प्यार कह रहा है,मैं तुझे खुदा बना दूँ

मेरा प्यार कह रहा है, मैं तुझे खुदा बना दूँ ***************************************** विडंबना यह है कि मन के सौंदर्य में नहीं बाह्य आकर्षक में अकसर ही पुरुष समाज खो जाता है। पत्नी की सरलता एवं वाणी की मधुरता से कहीं अधिक वह उसके रंगरूप को प्राथमिकता देता है ****************************************



विलायती बोली-बनावटी लोग

विलायती बोलीः बनावटी लोग ****************************************** हमारे संस्कार से जुड़े दो सम्बोधन शब्द जो हम सभी को बचपन में ही दिये जाते थें , " प्रणाम " एवं " नमस्ते " बोलने का , वह भी अब किसमें बदल गया है, इस आधुनिक भद्रजनों के समाज में... *******************************************



मेरे खुदा कहाँ है तू ,कोई आसरा तो दे

मेरे खुदा कहाँ है तू , कोई आसरा तो दे ****************************** साहब ! यह जोकर का तमाशा नहीं , नियति का खेल है। हममें से अनेक को मृत्यु पूर्व इसी स्थिति से गुजरना है । जब चेतना विलुप्त हो जाएगी , अपनी ही पीएचडी की डिग्री पहचान न आएँगी और उस अंतिम दस्तक पर दरवाजा खोलने की तमन्ना अधूरी रह जाएगी।



हार के ये जीवन, प्रीत अमर कर दी

हार के ये जीवन , प्रीत अमर कर दी *************************** " तेरे मेरे दिल का, तय था इक दिन मिलना जैसे बहार आने पर, तय है फूल का खिलना ओ मेरे जीवन साथी..." यौवन की डेहरी पर अभी तो इस युगल ने ठीक से पांव भी नहीं रखा था। वे पड़ोसी थें, अतः बाली उमर में ही प्रेम पुष्प खिल उठा। बसंत समीर को कितने



एक अकेला इस शहर में, आशियाना ढूंढता है

एक अकेला इस शहर में,आशियाना ढूँढता है *********************************** मैं कुछ ठीक से समझ नहीं पा रहा हूँ कि ये यादों की पोटली मुझे संबल प्रदान करती है या जंजीर बन मेरे पांवों को जकड़ी हुई है यह **************************** " एक अकेला इस शहर में,रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशिय



एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह

.. कबाड़ बटोरते इन बच्चों का स्वाभिमान देखें, इनका रूप रंग नहीं -------------------- कभी आपने अपनी गलियों में या फिर सड़कों पर बिखरे कूड़ों के ढ़ेर में से कबाड़ बटोरती महिलाओं को देखा है , नहीं देखा , तो दरबे से बाह



अपने पे हँस कर जग को हँसाना , ग़म जब सताये सीटी बजाना

परिश्रम यदि हमने निष्ठा के साथ किया है, तो वह कभी व्यर्थ नहीं जाता। भले ही कम्पनी की नजरों में हम बेगाने हो, तब भी समाज हमारे श्रम का मूल्यांकन करेगा। किसी को धन , तो किसी को यश मिलेगा । **************** मिसाइल मैन डा0 एपीजे अब्दुल कलाम का एक सदुपदेश पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पढ़ा



जिंदा है जो इज्ज़त से , वो इज्ज़त से मरेगा

सुबह सड़कों पर एक जीवन संघर्ष दिखता है, इबादत, समर्पण और कर्मयोग दिखता है -------------------------------------------------------------------- " दुनियाँ में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन हैं अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा गिर गिर के मुसीबत में संभलते ही रहेंगे जल जाये मगर आग प़े चलते ही रहेंगे...."



भाषा

सादर नमस्कार , न जाने क्योंमेरे ह्रदय में यह सोचकर पीड़ा होती है कि कि आज कल क्यों हम भारतीय अपनी मात्र भाषा को भूलते जा रहे हैं| क्यों हम केवल और केवल अंग्रेजी पर ध्यान दे रहे हैं हम यह



साथी हाथ बढ़ाना ...

साथी हाथ बढ़ाना ... एक अकेला थक जाएगा , मिलकर बोझ उठाना ********************************************** पत्रकारिता में अपनों द्वारा उपेक्षा दर्द देती है, लेकिन गैरों से मिला स्नेह तब मरहम बन जाता है ********************************************* "आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे तीर-ए-नज़र देखेंगे ज़ख़



बाधाएं आती हैं आएं, कदम मिला कर चलना है

बाधाएं आती हैं आएं, कदम मिलाकर चलना है **************** अटल जी ऐसे राजनेता रहें , जिनका कर्मपथ अनुकरणीय है। उनके सम्वाद में कभी भी उन्माद की झलक नहीं दिखी *************************** राजनीति की यह दुनिया जहां मित्र कम शत्रु अधिक हैं । उसमें ऐसा भी एक मानव जन्म लेगा, जिसके निधन पर हर कोई नतमस



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