आर्ट

फ्रीलांस मेकअप आर्टिस्ट बनकर जीवन को दे एक नया रंग

दुनिया में आखिर ऐसा कौन होगा, जिसे सजने-संवरने का मन नहीं करता। अमूमन माना जाता है कि सिर्फ महिलाएं ही मेकअप करती हैं या सुदंर दिखना चाहती हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। बात चाहे पुरूष की हो या स्त्री की, खूबसूरत लगना तो हर किसी को भाता है और व्यक्ति को खूबसूरत दि



आपकी सफलता में सलाहकार की भूमिका

संजय कुमार सुमन sk.suman379@gmail.comदोस्तो सलाहकार ये ऐसा सब्द है, जो कि हम सब के जीवन मे लागू होता है।ऐसा कोई व्यक्ति नही जिसे अपने जीवन मे किसी की सलाह की आवश्यकता नही पड़ी हो। कभी अपने व्यापार संबंधी या फिर अपने निजी जीवन संबंधी हमे



आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस विश्व महाशक्ति – किसका नेतृत्व, कौन दावेदार

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स्पेनिश पेंटर बार्तोंलोम एस्टेबान मुरिलो (जानकारी... जरा हटके. ..)

आजगूगल ने स्पेनिश पेंटर बार्तोंलोम एस्टेबान मुरिलो (Bartolomé EstebanMurillo) का ‘गूगल-डूडल’बनाकर उन्हें विशेष रूप से याद किया है । ‘गूगल’ उनकी 400 वाँ जन्मदिन मना रहा है । ‘गूगल’ ने खास अंदाज में मुरिलोको याद किया है । ‘डूडल’ में मुरिलो कीप्रतिष्ठित पेंटिंग्स में से



समूह वाली मानसिकता (लेख) #ज़हन

प्राकृतिक और सामाजिक कारणों से हम सभी की पहचान कुछ समूहों से जुड़ जाती है। उदाहरण के लिए एक इंसान की पहचान कुछ यूँ - महिला, भारतीय, अच्छा कद, गेहुँआ रंग, शहरी (दिल्ली निवासी), प्रौढ़, सॉफ्टवेयर क्षेत्र में काम करने वाली, हिन्दू (दलित), मध्यमवर्गीय परिवार आदि। अब पूरा जीवन इन समूहों और उनसे निकले उप-सम



एक और कॉलेबोरेटिव पेंटिंग

कलाकार ज्योति सिंह के साथ साझा किये विचार से बनी नई पेंटिंग . हाल ही में एक इवेंट की खबर में हमारी कुछ पुरानी पेंटिंग्स भी फीचर हुई द हिन्दू अखबार में .



संविधान से परे की 'राष्ट्रभक्ति'

जेल में जाने से कोई अपराधी नहीं हो जाता जबतक न्यायालय उसे दोषी न ठहराए. अपराध सिध्द होने तक हम कथित तौर पर गिरफ्तार अभियुक्तों को चोर, हत्यारा, आतंकवादी या देशद्रोही कहते हैं. विशेष रूप से इन शब्दों का इस्तेमाल कोर्ट और पत्रकारिता में किया जाता है. लेकिन हमारे देश में तो न्यायालय के फैसले से पहले ह



पुस्तक समीक्षा : खुनी जंग ( कारवां )

कुछ अरसे पहले याली ड्रीम्स क्रिएशन की होरर ग्राफिक नॉवेल ‘’कारवाँ ‘’ रिलीज हुयी थी जिसे काफी चर्चा मिली थी , उसकी सफलता से प्रेरित होकर उसका हिंदी रूपांतरण भी किया गया ,जो मेरे व्यग्तिगत विचार से अंग्रेजी से भी बेहतर बनी थी l चूँकि मैंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों पढ़ी हुयी है तो तुलनात्मक रूप से यदि कह





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