जातियां और आज का भारत

आज के भारत में जातियां अस्तित्वहीन हो चुकी है। परन्तु राजनीति बांटने और वोट बैंक बनाने के लिये आज भी इसका भरपूर प्रचार कर रही हैं। इसे रोका जाना चाहिये। भारत सरकार को अब सरकारी फार्मों आदी से जाति का कॉलम हटा देना चाहिये। इसके स्थान पर केवल वर्ग जैसे - साम



बूंदें

आसमां से धरती तक पदयात्रा करती हरित पर्ण पर मोती सी चमकती बूंद बूंद घट भरे बहती बूंदे सरिता बने काली ने संहार कर एक एक रक्त बूंद चूसा बापू ने रक्त बूंद बहाये बिना नयी क्रांति का आह्वान किया बरसती अमृत बूंदें टेसू पूनम की रोगी काया को निरोगी करे मन को लुभाती ओस की बूंदें क्षणभंगुर सम अस्तित्व का ज



अस्तित्व

** युवावस्था ** युवावस्था आये और सपनों की फसल न उगे ऐसा सम्भव नही इसलिए हमारी नवयुवा पीढी की आँखे भी सपनो की फसलों से लहलहा रही है बल्कि हमारी आज की युवा पीढी के पास अगर बड़े



आखिर क्यों खत्म हो रहा वन का अस्तित्व

हमारे देश में इस ऐसी क्रान्ति आयी है जिसमें वन को काटा जा रहा है लोग वन को झाली कहते हैं पक तनिक नहीं सोचते कि इसको काटने के बाद क्या होगा क्या श्वास लेंगे किसके छाये में बैठेंगे उन्हें तो सिर्फ शो बाजी से मतलब है ये सब उनकी समझ से बाहर है उन्हें इस बात को समझना होगा 





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