आती

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"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



तुम्हें बच्चों की, याद नहीं आती है ,

वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,



“कुंडलिया” आती पेन्सल हाथ जब, बनते चित्र अनेक।

“कुंडलिया”आती पेन्सल हाथ जब, बनते चित्र अनेक। रंग-विरंगी छवि लिए, बच्चे दिल के नेक॥ बच्चे दिल के नेक, प्रत्येक रेखा कुछ कहती। हर रंगों से प्यार, जताकर गंगा बहती॥ कह गौतम हरसाय, सत्य कवि रचना गाती। गुरु शिक्षक अनमोल, भाव शिक्षा ले आती॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



वरखा बहार आई . ...........

वरखा बहार आई. .................. घुमड़-घुमड़ बदरा छाये, चम-चम चमकी बिजुरियां,छाई घनघोर काली घटाएं, घरड-घरड मेघा बरसे, लगी सावन की झड़ी,करती स्वागत सरसराती हवाएं........ लो,सुनो भई,बरखा बहार आई...... तपती धरती हुई लबालव, माटी की सौंधी खुश्बू,प्रफुल्लित बसुन्धरा से संदेश कहती, संगीत छे



लाल गुलाब कब्र में सोई अनजान लड़की के नाम

लाल गुलाब कब्र में सोयी अनजान लड़की के नाम डॉ शोभा भारद्वाज “यह प्यार था या खुदगर्जी जिसमें माँ बाबा का प्यार गौण हो गया |हर वैलेंटाइ



जगदम्बा हरि आन ,शठ चाहत कल्याण पार्ट - 1

'जगदम्बा हरि आन, शठ चाहत कल्याण' पार्ट -1 डॉ शोभा भारद्वाज रामलीला के मैदानों मे प्रति वर्ष तीन पुतले जलाए जाते हैं प्रमुख रावण उसके दोनों ओर





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