बातें

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श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें | https://ptvktiwari.blogspot.com/2018/09/blog-post_43.html



तुम अच्छी हो - श्रेष्ठ औरों से

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रिक्त पात्र - शून्य

रिक्त पात्र – शून्य क्या करना है पूर्ण पात्र का, उसका कोई लाभ नहीं है |रिक्त पात्र हो, तो उसमें कितना भी अमृत भर जाना है ||1||सकल सृष्टि है टिकी शून्य पर, और शून्य से आच्छादित है |शून्य से है पाता प्रकाश जग, पूर्ण हुआ तो अन्धकार है |क्या करना है आच्छादन का, मुझको तो प्रक



मेरे मानस का शुभ्रहंस

मैंनेदेखा खिड़कीकी जाली के बीच से आती रेशमकी डोर सी प्रकाश की एक किरण को मुझ तकपहुँचते ही जो बदल गई एकविशाल प्रकाश पुंज में औरलपेट कर मुझे उड़ा लेचली एक उन्मुक्त पंछी की भाँतिउसी प्रकाश-किरणके पथ से / दूर आकाश में जहाँकोई अनदेखा भर रहाथा वंशी के छिद्रों में / अलौकिक सुरों के आलाप जहा



शत शत नमन

घर घर में दीप जलाने हित जो खुद जलताथा हर एक पल वो दीप आज बुझ गया, मगर ज्योतित कर ये संसार गया |||भारत की अतुलित वाणी की गोदी सूनी होगई आज कर अटल सत्य का वरण आज वह परमतत्व मेंलीन हुआ || माँ भारती के वरद पुत्र - शत शत नमन काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ हा



कजरारी बरसात

रात भर से रुकरुक कर बारिश हो रही है - मुरझाई प्रकृति को मानों नए प्राण मिल गए हैं... वो बातअलग है कि दिल्ली जैसे महानगरों में तथा दूसरी जगहों पर भी - जहाँ आबादी बढ़ने केसाथ साथ “घरों” की जगह “मल्टीस्टोरीड अपार्टमेंट्स” के रूप में कंकरीट के घनेजंगलों ने ले ली है... बिल्डिंग



रात भर छाए रहे बादल

रात भर छाए रहे बादल / प्रतीक्षा में भोर की और उनसे झरती नेह रस की हलकी हलकी बूँदें भिगोती रहीं धरा बावली को नेह के रस में...बरखा की इस भीगी रुत में पेड़ों की हरी हरी पत्तियों / पुष्पों से लदी टहनियों के मध्य से झाँकता सवेरे का सूरज बिखराता है लाल गुलाबी प्रकाश इस धरा पर..



हरी भरी प्रकृति

एकाग्रता, प्रेम, शान्ति, आशा, उत्साह और उमंग – जीवन जीने के लिए इन्हीं सबकीआवश्यकता होती है – और हरितवर्णा प्रकृति हमें यही उपहार तो देती है... आइये अपनीइस प्रेरणास्रोत हरि भरी प्रकृति का स्वागत करना अपना स्वभाव बनाएँ...



मित्रता दिवस

शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखनेके लिए स्वस्थ सामाजिक सम्बन्ध और घनिष्ठ मित्र अत्यन्त आवश्यक हैं...मित्रता – अर्थात हम किसी अन्य व्यक्ति को अथवावातावरण को अथवा किसी पशु को, पक्षी को, समूची चराचर प्रकृति को भी उतना ही महत्त्व देते हैं जितना स्वयं को देतेहैं,



लहरों का या खेल

लहरों का या खेल अनोखा, लहरों कायह खेल |एक लहर इस तट को जाती, दूजी उसतट को है जाती कभी कभी पथ में हो जाता है दोनोंका मेल ||अनगिन नौका और जलयान यहाँ हैंलंगर डाले रहते और अनगिनत राही इस उस तट परनित्य उतरते रहते |इसी तरह तो वर्ष सदी और कल्पयहाँ हैं बीते जाते पर न कभी रुकने पाता है ऐसाअद्भुत खेल ||एक सना



मैं और मेरा शहर

मैं और मेरा शहर सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नमूना शोरगुल भरें, चकाचौंध करते जातपात, धर्म वाद से परे पर अर्थ वाद की व्यापकता बचपन की यादों से जुडा मेरी पहचान का वो हिस्सा जानकर भी अनजान बने रहते आमने सामने पड जाते तो कलेजा उडेल देते प्रदूषण, शोर, भीड़ भरा शहर ना पक्षियों की चहचहाहट भोर होने का एहसास करात



“गीतिका” हो इजाज़त आप की तो दिल कि बातें बोल दूँ

मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२ समांत- ओल पदांत- दूँ“गीतिका” हो इजाज़त आप की तो दिल कि बातें बोल दूँ बंद हैं कमरे अभी भी खिड़कियों को खोल दूँ उस हवा से जा कहूँ फिर रुख इधर करना कभी दूर करना घुटन मंशा जगह दिल अनमोल दूँ॥ खिल गई है रातरानी महक लेकर बाग की हर दिशा गुलजार करती रंग महफि



पिता हमारे वट वृक्ष समान........

“पिता हमारे वट वृक्ष समान” किसी ने सही ही कहा हैं कि ‘पिता न तो वह लंगर होता हैं जो तट पर बांधे रखे, न तो लहर जो दूर तक ले जाएँ. पिता तो प्यार भरी रौशनी होते हैं,जो जहाँ तक जाना चाहों,वहां तक राह दिखाते हैं.’ऐसे ही मेरे पिता हैं,जो चट्टान की तरह दिखने वाले पर एहसास माँ की तरह.घर-परिवार का बोझ



ग़ज़ल (सपनें खूब मचलते देखे) - Sahityapedia

ग़ज़ल (सपनें खूब मचलते देखे)सपनीली दुनियाँ मेँ यारों सपनें खूब मचलते देखेरंग बदलती दूनियाँ देखी ,खुद को रंग बदलते देखासुबिधाभोगी को तो मैनें एक जगह पर जमते देख़ाभूखों और गरीबोँ को तो दर दर मैनें चलते देखादेखा हर मौसम में मैनें अपने बच्चों को कठिनाई मेंमैनें टॉमी डॉगी शेरू को



वो शायर था, वो दीवाना था, दीवाने की बातें क्यूँ

वो शायर था, वो दीवाना था, दीवाने की बातें क्यूँकवि:- शिवदत्त श्रोत्रियमस्ती का तन झूम रहा, मस्ती मे मन घूम रहामस्त हवा है मस्त है मौसम, मस्ताने की बाते क्योइश्क किया है तूने मुझसे, किया कोई व्यापार नहीसब कुछ खोना तुमको पाना, डर जाने की बाते क्योबड़ी दूर से आया है, तुझे बड़ी दूर तक जाना हैमंज़िल देखो



03 सितम्बर 2015


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