बचाओ

1


A Hindi poetry on International women day - क्यों ; अर्चना की रचना

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी कविता क्यों क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ?क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है?क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है ?क्यों भीड़ चीरती अपना आप खुद लिखती ए



EK AWAJ (एक आवाज) | The voice of all rape victims

एक आवाजवो जान सी अनजान,वो रोती रही आज,वो मांगे कई माफ़ी,वो लड़ती रही आज,हर इक साँस,कस्ती हुयी,आँखे बंद,ढलती हुयी,पर न ख़तम हुयी आस,वो न शांत,हर इक जान की आवाज,वो भी कह रही आज,



Archana Ki Rachna: Preview "मैं हूँ नीर "

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीरमैं सुनाने को अपनी मनोवेदनाहूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीरजब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से ,मैं थी धवल, मैं थी निश्चलमुझे माना तुमने अति पवित्रमैं खलखल बहती जा रही थीतुम लोगों के पापों को धोती जा रही थीपर तुमने मेरा सम्मान न बनाये रक्खाऔर मुझे



बिहार में जन्मीं देश की ये बेटी बनीं अमेरिकी सीनेटर, कहा- मुझे अपने देश पर गर्व है

दुनियाभर में भारतीय प्रतिभा अपना लोहा मनवा रही है। बड़ी कंपनियों के महत्वपूर्ण पदों से लेकर कई देशों की सरकारों में भी यहां के लोग शामिल हैं। ज़ाहिर है किसी और देश में जाकर चुनौतियों का सामना करते हुए ख़ास मुकाम बनाना बेहद कठिन होता है। खासकर बात जब महिलाओं की हो तो उनके लिए रास्ते और भी मुश्किल भरे हो



"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" पर हिंदी की 11 सर्वश्रेष्ट कवितायेँ - Top 11 Hindi poems empowering Beti Bachao Beti Padhao aandolan

भारत में “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” (Beti Bachao Beti Padhao) एक अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं पर कविताओं और नारों के जरिए न केवल सरकार बल्कि आम आदमी भी अपनी बात को लोगों के समक्ष रख रहे है, जिससे समाज में फ़ैली कुरीतियां जैसे कन्याभ्रूण हत्य



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

ये कविता बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यकर्म के अंतर्गत दूरदर्शन हिसार में काव्य पथ कार्यकर्म में प्रस्तुत हुई है. ज्यादा से ज्यादा सुने शेयर करे और अपने दोस्तों को सुनाये . यूट्यूब पर ही सुने. धन्यवाद् आपके सुझाव का स्वागत है



पेड लगाओ जीवन बचाओ

सभी को अपने पुरे जीवन में अधिक से अधिक पेड लगाने चाहिए।जिससे आने वाला भविष्य सुरक्षित होगा



" बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ "

समस्त बेटियों को समर्पित ....जब हुयी प्रस्फुटित वह कलिकाकोई उपवन ना हर्षायाउसकी कोमलता को लख करपाषाण कोई न पिघलाया!वह पल प्रति पल विकसित होतीइक दिनचर्या जीती आईबच बच एक एक पग रखती वहशैशव व्यतीत करती आई!जिसने था उसका सृजन कियाउसने न मोल उसका जानावह था जो उसका जनक स्वयम् उसने न मोह उससे बाँधा !



नन्ही सी बिटिया!

नन्ही सी बिटिया,बांधे छोटी सी चुटिया,साईकिल पर है सवार,हंसते- खेलते जाने को स्कूल है तैयार,निकल पड़ी हैं, ऊँची-नीची राह पर,सबसे लोहा लेने को है तैयार,पढ़-लिख कर ये बिटिया करेगी,सबके सपने साकार,इक दिन, ये बिटिया बड़ी हो जायेगी,अपने परिवार का नाम रोशन करवाएगी,समाज में अपनी पहचान बनाएगी,शादी कर अपने ससुरा



नन्ही सी बिटिया!

नन्ही सी बिटिया,बांधे छोटी सी चुटिया,साईकिल पर है सवार,हंसते- खेलते जाने को स्कूल है तैयार,निकल पड़ी हैं, ऊँची-नीची राह पर,सबसे लोहा लेने को है तैयार,पढ़-लिख कर ये बिटिया करेगी,सबके सपने साकार,इक दिन, ये बिटिया बड़ी हो जायेगी,अपने परिवार का नाम रोशन करवाएगी,समाज में अपनी पहचान बनाएगी,शादी कर अपने ससुरा





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x