बच्चों

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चोर की परिभाषा ?

चोर की परिभाषा ?डॉ शोभा भारद्वाजएक प्रसिद्ध चैनल में गरमा गर्म बहस चल रही थी सभी उत्साहित थे ‘भारत सरकार की कूटनीतिक विजय’ पाकिस्तानी आतंकी मसूर अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया चीन ने अपना वीटो वापिस ले लिया |बीच –बीच में नारे लगाये जा रहे थे है हरेक उत्साहित था भारत की कूटनीतिक विजय बहस खत्म



पहली बार मां बनने वाली ध्यान दें, ऐसे करें बच्चों की देखभाल - Baby Care Tips In Hindi

Baby Care Tips In Hindi- मां बनना हर महिला के लिए एक सौभाग्य की बात होती है और शादी के बाद ही उनसे एक अपेक्षा की जाती है. महिला के मन में भी मां बनने का ख्याल शादी के बाद से ही उमड़ने लगता है, फिर वो समय आता है जिसका उन्हें इंतजार होता है और वे प्रेग्नेंसी के उन 9 मही



बच्चों की देखभाल के आसान तरीके || Child Health Care In Hindi

बच्चे भगवान का रूप होते हैं मगर उन्हें अच्छे-बुरे की कोई समझ नहीं होती है. इसलिए उनकी केयर करना बहुत जरूरी हो जाता है क्योंकि उन्हें अपने लिए क्या करना है क्या नही इसके बारे में पता नहीं होता. माता-पिता अपने बच्चों को बहुत प्यार करते हैं और उनके लिए वे कुछ भी कर जाते हैं क्योंकि पैरेंट अपने बच्चों क



24 जनवरी 2019

हर दिन समय निकलना, वो करने के लिए जिससे आपको प्यार हैं।

हमारे दिन अक्सर उन चीज़ों से भरे होते हैं जो हमें करने पड़ते हैं, और हम जो कुछ करते हैं उससे तनाव और थकावट से खुद को तसल्ली देते हैं… इसलिए हम जो करना चाहते हैं उसे खत्म कर देते हैं।उस बारे में एक सेकंड के लिए सोचें: हमारे दिन चीजों से भरे होते हैं, और आराम करने वाले सामान होते हैं। उन चीजों के लिए



फिट रहने के लिए बच्चों को बनाएं अपना एक्सरसाइज पार्टनर

खुद को चुस्त व तंदरूस्त बनाए रखने के लिए एक्सरसाइज करना बेहद आवश्यक है। व्यायाम सिर्फ वजन कम करने का ही काम नहीं करता, बल्कि इससे शरीर को अन्य कई तरह के लाभ होते हैं। जैसे बाॅडी की स्टेंथ व स्टेमिना बढ़ता है और शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते हैं। आमतौर पर देखने में आता है कि लोग शुरूआत में तो



तुम्हें बच्चों की, याद नहीं आती है ,

वृद्ध दंपति द्वारा आत्महत्या... दुर्भाग्यपूर्ण घटना –हल्द्वानी...2018…( भाव= काल्पनिक )जैसे-जैसे आज शाम ढलने लगी, रोज़ की तरह दीपक की, लौजलने लगी,पत्नी की एकटक आँखें, डब- डबा रही थी,घर की एक-एक चीज़, आँखों में उतर-आ रही थी, दोनों नेमिलकर जाने कैसा , अभागा निर्णयले लिया,



प्रकृति और हम ( बच्चों केलिए )

कविता को हमेशा इंसान को जीना चाहिए और उनसे कुछ ना कुछ सीखना चाहिए। यहां पर मैंने जो कविता लिखी है वो उनके लिए है जो दिल और दिमाग से पूरे बच्चे हैं।, जिन्होंने स्वयं के अंदर स्वयं का बचपन जीवित रखा है। अपने आपको इन कविता से जोड़कर देखिए



बाल दिवस पर जानिये नेहरू जी के बारे में

1.स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित करने वाले (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ।2. हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 191



मकान की ऊपरी मंज़िल पर - गुलज़ार

मकान की ऊपरी मंज़िल पर अब कोई नहीं रहतावो कमरे बंद हैं कबसेजो 24 सीढियां जो उन तक पहुँचती थी, अब ऊपर नहीं जातीमकान की ऊपरी मंज़िल पर अब कोई नहीं रहतावहाँ कमरों में, इतना याद है मुझकोखिलौने एक पुरानी टोकरी में भर के रखे थेबहुत से तो उठाने, फेंकने, रखने में चूरा हो गएवहाँ एक बालकनी भी थी, जहां एक बेंत



फिल्मी पर्दा करे बेपर्दा



भाषा-व्यक्तित्व का आईना

भाषा-व्यक्तित्व का आईना डा. वेद प्रकाश भारद्वाज भाषा एक आईने की तरह होती है। हम जैसी भाषा बोलते हैं या लिखते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व होता है जो भाषा के आईने से सबके सामने आ जाता है। इस दृष्टि से यदि हम आज के युवाओं और बच्चों की भाष



अंकों और विषय चयन का दबाव ज़रूरी

कहानी के माध्यम से संदेशयुक्त लेख ****बच्चों पर पढ़ाई और अंकों का दबाव न डालें । ****** पिताजी की इच्छा है कि रोहन दसवीं में कॉमर्स विद् मैथ्स ले ……। रोहन का दसवीं का परीक्षा परिणाम निकलने वाला है । घर में सन्नाटा छाया हुआ है । नेट पर परिणाम की घोषणा हो चुकी है । रोहन घर आता है । माँ पूछती है… रो



अभिभावक बनें बच्चों के सहयोगी और दिशा निर्देशक

लेख **अभिभावक बनें बच्चों दोस्त और दिशा निर्देशक** अभिभावक के रूप में हम सभी बहुत निष्ठुरऔर स्वार्थी होते हैं । बच्चे पास हुए नहीं कि हम सभी अपनी-अपनी सोच अभिलाषाएँ उन पर डाल देते हैं । माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे वही बने जिसका सपना उन्होंने देखा है यहाँ पर आकर हम इतने स्वार्थी हो जाते हैं कि हम



लेख--ये तो उत्तम प्रदेश बनने की निशानी नहीं

गोरखपुर के चर्चे सियासी गलियारों में तेज़ है। तो उसी गोरखपुर के चर्चे जनमानस के जुबां पर भी है। अगस्त महीने के शुरुआती दौर में 60 बच्चों की मौत ने लोंगो को अचंभित कर दिया था। अब जब महीने के आखिर में भी 42 मौत हो गई । तो जनता के पैर के नीचे से जमीं खिसक रहीं है। इसके अलावा वह हतप्रभ, और व्याकुल हो उठी



एक वसीयत बच्चों के नाम ...

बहुत सोचा एक वसीयत लिख दूँ अपने बच्चों के नाम ...घर के हर कोने देखे छोटी छोटी सारी पोटलियाँ खोल डालीं आलमीरे में शोभायमान लॉकर भी खोला ....... अपनी अमीरी पर मुस्कुराई !छोटे छोटे कागज़ के कई टुकड़े मिले गले लगकर कहते हुए - सॉरी माँ,लास्ट गलती है अब नहीं दुहराएंगे ... हँस दो माँ 'अपनी खिलखिलाहट सुनाई





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