कभी न भूलने वाली रेल यात्रा

कभी न भूलने वाली रेलयात्रा डॉ शोभा भारद्वाज कपूरथला ,पंजाब मेंमामा जी के बेटे की बहू मेरी भाभी की मृत्यू हो गयी उनकी तेरही में हमे जाना थाअपने घर से मैं .माँ के घर मेरी छोटी बहन का प्रोग्राम बना . हमें सुबह शाने पंजाबगाड़ीकी टिकट मिल गयीं आराम से सफर कटा इस गाड़ी में एक परेशानी है रास्ते मेंकिन्नर चढ़त



विचित्र अहसास

बिचित्र अहसास डॉ शोभा भारद्वाज जीवन में कई बार बेहद रोमांचक घटित होता है . ईरान के खुर्दिस्तान प्रांत की राजधानी सन्नंदाज के आखिरी छोर के अस्पताल में मेरे पति डाक्टर एवं इंचार्ज थे बेहद ख़ूबसूरत घाटी थी .उन दिनों वहाँ ईरान इराक में युद्ध चलता रहता था ,कभी रुक जाता फि



‘‘गांधी‘‘ के ‘‘साथ‘‘व ‘‘गांधी‘‘ के ‘‘बिना‘‘ ही कांग्रेस का ‘‘अस्तित्व एवम नियति‘‘ है।

पूर्व में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की कांग्रेस हाई कमांड को लिखी गई ‘चिट्ठी’ पर सोनिया गांधी के ‘‘बुलावे’’ पर इन समस्त ‘‘तथाकथित असंतुष्टों‘‘ व नाराज नेताओं की एक चिंतन बैठक हुई। ‘चिंता’ की सीमा तक कांग्रेस की ‘‘चिंताजनक स्थिति‘‘ हो जाने के कारण बैठक को उपयोगी बनाने हेतु‘‘ चिंतन बैठक‘‘ का नाम देना तो



प्रकृति ने इंसान को आइना दिखाया

प्रकृति ने इंसान को आइना दिखाया मुफत में कोरोना भूकंप,बाढ़,आग,टिड्डी और बहुत कुछ...पहले कलयुगी मानव ने दुनिया को लालच दिया कि तुम एक खरीदों, हम तुम्हें दो देंगे....लेकिन प्रकृति ने अब उसे ऐसा करारा जवाब दिया कि एक के बाद एक कई विपत्तियां मुफत में मिलने लगी. प्रकृति की मार के आगे आज मनुष्य बेबस और ल



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ( संस्मरण )

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (संसमरण )डॉ शोभा भारद्वाजसिंगापूर के बाशिंदों को फिटनेस का बहुत शौक है वह हर वक्त लम्बी सैर करते या साईकिल चलाते नजर आते | कोरोना काल में भी उनका साइकिल चलता रहा मैं कुछ दिन सिंगा



परदेस ( ईरान के खुर्दिस्तान ) में करवाचौथ व्रत संसमरण

परदेस ईरान के “खुर्दिस्तान” मेंकरवाचौथ व्रत संसमरण डॉ शोभा भारद्वाज खुर्दिस्तान की राजधानी सननदाज से आठ किलोमीटरदूर सलवताबाद के अस्पताल में डाक्टर पति के साथ रही हूँ वर्षों रही हूँ | करवाचौथ केअवसर पर वहाँ की याद आते ही आँखें भीगजाती हैं लगभग दस करवाचौथ के व्रत मैनेयहीं रखे थे | बड़ी ही ख़ूबसूरत



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



mera bacpan

Twoमई बचपन से से बहुत अच्छी लड़की हु क्यूको मैंने हमेस ही सबका अच्छा क है लाइफ मई म खेलना कूद बहुत पसंद टी क्युकी मैंने ा ज़िंदगी के पल पल वक्त बहुत अच्छी से बीतये मई उस व वक्त करीब 5 थी जब मैंन



“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज।

“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज। पीछे-पीछे भागते होकर हम निस्तेज॥ होकर हम निस्तेज कहाँ थे कहाँ पधारे। मुड़कर देखा गाँव आ गए शहर किनारे॥ कह गौतम कविराय चलो मत भागे-भागेकरो वक्त का मान न जाओ उससे आगे॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तान हमारा.सभी को हिदुस्तान की आज़ादी की बहुत बहुत बधाई.( आलिम)

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तान हमारा.सभी को हिदुस्तान की आज़ादी की बहुत बहुत बधाई.( आलिम)



राहुल गांधी जी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है

श्री राहुल गांधी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है ,डॉ शोभा भारद्वाज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान गरमागर्म बहस चल रही थी देश के दर्शक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के विचार सुनने के उत्सुक थे वह अक्सर बढ़ चढ़ कर बोलते थे जब वह सदन में भाषण देंगे जलजला आ जाएगा मोदी जी उनके सामने खड़े नहीं हो सक



“गीतिका”

छंद - दिग्पाल /मृदुगति (मापनी युक्त मात्रिक छंद )मापनी -221 2122 221 2122 “गीतिका” मौसम बहुत सुहाना मन को लुभा रहा है डाली झुकी लचककर फल फूल छा रहा है मानों गरम हवा यह गेसू सुखा रही हो कोयल सुना रही है भौंरा सुना रहा है॥ नव रंग आ रहे हैं घिर हर कली कली पर फ



शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैं

"ओ शहीद भगत सिंह हम---यह भी एक कविता है क्रांतिकारियों को याद करते करते ------कोई गुनगुनाए और गीत बनाए तो जानूँ---------------"ओ शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैंजो भुलाए तुम्हे, उनपर हम एतराज़ करते हैं ---------------------------------शहादत की एक परख अनोखी रच गया कुर्बानी के ज़ज़्बे को सबसे ऊँचा कर



बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता थासुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा है ||पहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ परया शहर के पुराने बाज़ार की किसी दुकान के काँच की दीवारों में कैदकिसी किताब को दिल दे बैठता था ||आजकल वो अपना दिल हथेली पर रख कर घूमता हैउसी सड़क



बहुत मुश्किल है अपने को हुबहू लिखना

बहुत मुश्किल होता है अपने को हुबहू लिखना लिखो, फाड़ो यही क्रम चलता है !एक अंतराल कुछ समाप्ति के बाद किसी बात का कोई महत्व नहीं रह जाता। समाप्ति के बाद लिखो, न लिखो कोई फर्क नहीं पड़ता पढ़नेवालों के लिए वह सिर्फ कहानी होती है होती है एक अर्थहीन भूमिका क्षणिक प्रभावित करते उपसंहार !जब तक लिखने का उत्साह



मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ?

मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ? नीलम भागी मुझे आजकल एक ही चिंता हर समय सताती है, वो ये है कि मैं ऐसा क्या करुँ कि मेरी उम्र सौ साल हो। इसलिए आयु बढ़ाने के जितने भी नुस्ख़े, मुझे जहाँ से भी मिलते हैं, मैं उन्हे ले ले



व्यक्तित्व और जवाब में बहुत बड़ा अंतर होता है

पूर्वाभास तो रहा सत्य का पर ... होनी काहू बिधि ना टरै भी एक सत्य है और इसी सत्य में पूर्वाभास विलीन होता रहा !पूर्वाभास को सोचते हुए पछताते हुए रास्ते में कई सत्य औंधे पड़े मिले ज्योंही कन्धे पर हाथ रखा चिहुंक कर पूछा -"सत्य का आभास था तो अनजान क्यूँ रहे ?"निरुत्तर होकर भी मैंने जवाब दिया क्योंकि त



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