"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



mera bacpan

Twoमई बचपन से से बहुत अच्छी लड़की हु क्यूको मैंने हमेस ही सबका अच्छा क है लाइफ मई म खेलना कूद बहुत पसंद टी क्युकी मैंने ा ज़िंदगी के पल पल वक्त बहुत अच्छी से बीतये मई उस व वक्त करीब 5 थी जब मैंन



“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज।

“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज। पीछे-पीछे भागते होकर हम निस्तेज॥ होकर हम निस्तेज कहाँ थे कहाँ पधारे। मुड़कर देखा गाँव आ गए शहर किनारे॥ कह गौतम कविराय चलो मत भागे-भागेकरो वक्त का मान न जाओ उससे आगे॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तान हमारा.सभी को हिदुस्तान की आज़ादी की बहुत बहुत बधाई.( आलिम)

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तान हमारा.सभी को हिदुस्तान की आज़ादी की बहुत बहुत बधाई.( आलिम)



राहुल गांधी जी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है

श्री राहुल गांधी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है ,डॉ शोभा भारद्वाज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान गरमागर्म बहस चल रही थी देश के दर्शक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के विचार सुनने के उत्सुक थे वह अक्सर बढ़ चढ़ कर बोलते थे जब वह सदन में भाषण देंगे जलजला आ जाएगा मोदी जी उनके सामने खड़े नहीं हो सक



“गीतिका”

छंद - दिग्पाल /मृदुगति (मापनी युक्त मात्रिक छंद )मापनी -221 2122 221 2122 “गीतिका” मौसम बहुत सुहाना मन को लुभा रहा है डाली झुकी लचककर फल फूल छा रहा है मानों गरम हवा यह गेसू सुखा रही हो कोयल सुना रही है भौंरा सुना रहा है॥ नव रंग आ रहे हैं घिर हर कली कली पर फ



शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैं

"ओ शहीद भगत सिंह हम---यह भी एक कविता है क्रांतिकारियों को याद करते करते ------कोई गुनगुनाए और गीत बनाए तो जानूँ---------------"ओ शहीद भगत सिंह हम तुम्हे याद करते हैंजो भुलाए तुम्हे, उनपर हम एतराज़ करते हैं ---------------------------------शहादत की एक परख अनोखी रच गया कुर्बानी के ज़ज़्बे को सबसे ऊँचा कर



बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता थासुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा है ||पहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ परया शहर के पुराने बाज़ार की किसी दुकान के काँच की दीवारों में कैदकिसी किताब को दिल दे बैठता था ||आजकल वो अपना दिल हथेली पर रख कर घूमता हैउसी सड़क



बहुत मुश्किल है अपने को हुबहू लिखना

बहुत मुश्किल होता है अपने को हुबहू लिखना लिखो, फाड़ो यही क्रम चलता है !एक अंतराल कुछ समाप्ति के बाद किसी बात का कोई महत्व नहीं रह जाता। समाप्ति के बाद लिखो, न लिखो कोई फर्क नहीं पड़ता पढ़नेवालों के लिए वह सिर्फ कहानी होती है होती है एक अर्थहीन भूमिका क्षणिक प्रभावित करते उपसंहार !जब तक लिखने का उत्साह



मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ?

मैं सौ साल तक कैसे जिऊँ? नीलम भागी मुझे आजकल एक ही चिंता हर समय सताती है, वो ये है कि मैं ऐसा क्या करुँ कि मेरी उम्र सौ साल हो। इसलिए आयु बढ़ाने के जितने भी नुस्ख़े, मुझे जहाँ से भी मिलते हैं, मैं उन्हे ले ले



व्यक्तित्व और जवाब में बहुत बड़ा अंतर होता है

पूर्वाभास तो रहा सत्य का पर ... होनी काहू बिधि ना टरै भी एक सत्य है और इसी सत्य में पूर्वाभास विलीन होता रहा !पूर्वाभास को सोचते हुए पछताते हुए रास्ते में कई सत्य औंधे पड़े मिले ज्योंही कन्धे पर हाथ रखा चिहुंक कर पूछा -"सत्य का आभास था तो अनजान क्यूँ रहे ?"निरुत्तर होकर भी मैंने जवाब दिया क्योंकि त



कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है - Open Books Online

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ हैअँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने परबिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किलख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी हैसमय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किलकहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हमजुबां से दिल की बात



कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है - Open Books Online

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ हैअँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने परबिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किलख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी हैसमय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किलकहने को तो कह लेते है अपन



कविता ,आलेख और मैं : कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ हैअँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल  ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है समय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किल कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम जुबां से दिल 



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