बसंत

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वसंत की याद

वसंत की याद✒️ अक्षुण्ण यौवन की सरिता में,पानी का बढ़ आनाकमल-कमलिनी रास रचायें,खग का गाना गाना;याद किया जब बैठ शैल पर,तालाबों के तीरेमौसम ने ली हिचकी उठकर,नंदनवन में धीरे।नाद लगाई पैंजनियों ने,चिट्ठी की जस पातीझनक-झनक से रति शरमायी,तितली गाना गाती;जगमग-जगमग दमक उठा जब,रवि किंशुक कुसुमों सामानस, आभामं



पाठशाला (Paathshala )- रंग दे बसंती

रंग दे बसंती फिल्म से पाथशाला गीत नरेश अय्यर, मोहम्मद असलम और ब्लेज़ द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत एआर रहमान द्वारा रचित है और गीत प्रसून जोशी द्वारा लिखे गए हैं।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )पाठशाला (Paathshala ) की लिरिक्स (Lyrics Of Paathshala )लूसे कण्ट्रोलन कोई पढ़ने वालान कोई सीखने वालान



पाठशाला (Paathshala )- बे अ रिबेल

पाथशाला - रंग दे बसंती से एक विद्रोही गीत बनें: यह एआर रहमान द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ ब्लेज़, मोहम्मद असलम और नरेश अय्यर द्वारा एक बहुत अच्छा गाया गया गीत है। पाथशाला के गीत - एक विद्रोही बनें प्रसाद जोशी द्वारा खूबसूरती से लिखा गया है।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )पाठशाला (Paathshala



मोहे रंग दे बसंती (Mohe Rang De Basanti )- टाइटल सांग

मोहे रंग दे बसंती फिल्म रंग दे बसंती के गीत गालर मेहंदी और चित्र द्वारा गाए जाते हैं, इसका संगीत एआर रहमान द्वारा रचित है और गीत प्रसून जोशी द्वारा लिखे गए हैं।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )मोहे (Mohe Rang De Basanti ) टाइटल सांगकी लिरिक्स (Lyrics Of Mohe Rang De Basanti )डिंग डिंग डिंग डिंग डि



लुका चुप्पी (Luka Chuppi )- रंग दे बसंती (२००६)

रंग दे बसंती से लुका चुपपी गीत: यह लता मंगेशकर और एआर रहमान द्वारा एआर रहमान द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ एक बहुत अच्छा गाया गया गीत है। लुका चुप्पी के गीत खूबसूरती से जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए हैं।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )लुका चुप्पी (Luka Chuppi ) (२००६)की लिरिक्स (Lyrics Of Lu



खून चला (Khoon Chala )- रंग दे बसंती

रंग दे बसंती (2006) के खून चाला गीत प्रसाद जोशी द्वारा लिखे गए हैं, यह एआर रहमान द्वारा रचित है और मोहित चौहान द्वारा गाया गया है।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )खून चला (Khoon Chala ) की लिरिक्स (Lyrics Of Khoon Chala )कुछ कर गुजरने को खून चलाखुली-सी चोट लेकरबड़ी सी टीस लेकरआहिस्ता.. आहिस्ता..सवाल



एक ओंकार (Ek Onkar )- रंग दे बसंती

रंग दे बसंती से एक ओन्कर गीत फिल्म में इस्तेमाल की जाने वाली प्रार्थना है और एआर रहमान द्वारा रचित है।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )एक ओंकार (Ek Onkar ) की लिरिक्स (Lyrics Of Ek Onkar )इक ओंकार सैट नाम करता पुरख निर्भयसोचय सोच न होवेजे सोची लख वारचुप्पै चुप्प न होवैजे लाये रहा लिवतारभुखिया भुख न



खलबली है खलबली (Khalbali Hai Khalbali )- रंग दे बसंती

Khalbali Hai Khalbali Lyrics of Rang De Basanti (2006) is penned by Prasoon Joshi, it's composed by A. R. Rahman and sung by A. R. Rahman, Mohammad Aslam and Nacim.रंग दे बसंती (Rang De Basanti )खलबली है खलबली (Khalbali Hai Khalbali ) की लिरिक्स (Lyrics Of Khalbali Hai Khalbali )खलबली है खलबलीखलब



रुबरु रौशनी (Rubaru Roshni )- रंग दे बसंती

रंग दे बसंती फिल्म से रूबरू रोशनी गीत एआर रहमान और नरेश अय्यर द्वारा गाए जाते हैं, इसका संगीत एआर रहमान द्वारा रचित है और गीत प्रसुष जोशी द्वारा लिखे गए हैं।रंग दे बसंती (Rang De Basanti )रुबरु रौशनी (Rubaru Roshni ) की लिरिक्स (Lyrics Of Rubaru Roshni )ए सलाअभी अभी हुआ यकीनकी आग है मुझ में कहींह



रंग दे बसंती (Rang De Basanti )

"Rang De Basanti" is a 2006 hindi film which has Aamir Khan, Siddharth, Sharman Joshi, Atul Kulkarni, Kunal Kapoor, R Madhavan, Soha Ali Khan, Alice Patten, Om Puri, Waheeda Rehman, Kirron Kher, Anupam Kher, Mohan Agashe, Cyrus Sahukar, Manmeet Singh, K K Raina and Chandan Roy Sanyal in lead roles.



“गीत” ऋतु बसंती रूठ कर जाने लगी

छंद- आनंदवर्धक (मापनीयुक्त) मापनी- २१२२ २१२२ २१२“गीत”ऋतु बसंती रूठ कर जाने लगी कंठ कोयल राग बिखराने लगीदेख री किसका बुलावा आ गया छाँव भी तप आग बरसाने लगी मोह लेती थी छलक छवि छाँव की लुप्त होती जा रही प्रति गाँव कीगा रहे थे गीत गुंजन सावनी अब कहाँ रंगत दिवाली ठाँव की॥हो च



“मुक्तक” ऋतु बसंत मदमस्त पल रीति प्रीति अनुसार॥

“मुक्तक”रे प्रीतम मधुमास की छवि छटा एकाधिकार। डाल रंग या छोड़ दें फागुन को स्वीकार। पिया रहूँगी पाश में मत फेरों तुम नैन- खुली किवाड़ी साजना पर मेरे अधिकार॥-१साजन शिर सिंदूर है दे रहा सर्वाधिकार। होली में गोरी चली छटा रंग उपहार। कोरे कोरे गाल पर मल प्रिय लाल गुलाल।



बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर

नमस्कार दोस्तों, !! बधाई हो !!बसंत पंचमी आई है ! आसमान में पतंगे छाई हैं !! मुबारक हो सब को यह त्यौहार ! मिले सभी को खुशियों का हार !! !! धन्यवाद !!



बसंत बहार

बसंत बहार बागो में कलियों पे बहार जब आने लगे, खेत-खलिहानों में फसले लहलाने लगे !गुलाबी धूप पर भी निखार जब आने लगे, समझ लेना के बसंत बहार आ गयी !!भोर में रवि की किरण पे आये लालीकोयल कूक रही हो अमवा की डालीपेड़ो पर नई नई कोपले निकलने लगेऔर आँगन में भी गोरैया चहकने लगे



आया ऋतुराज बसंत

शिशिर का प्रकोप ढलान पर आया ऋतुराज बसंत दालान परखेत-खलिहान / बाग़ -बग़ीचे पीलिमा का सुरभित आभामंडल, गुनगुनी धूप पुष्प-पत्तों ने पहने ओस के कुंडल। सरसों के पीले फूल गेंहूँ-जौ की नवोदित बालियां / दहकते ढाक - पलाश, सृष्टि का साकार सौंदर्य मोहक हो



बसंत

सुबह उठा तो देखा  कि बात आज क्या है ? पत्ते खनक  रहे हैं, चिड़िया चहक रहे है । सूरज की तेज से मैं पूछा कि राज क्या है ? भोर के महक का एहसास आज क्या है। अमराईयों के झुरमुट कोई बुला रहा है   बहक गया है कोयल और गीत गा रहा है  सरसों के फूल से मैं पूछा कि राज क्या है? संगीत की समां का अहसास आज क्या है । 



हे माँ शारदे कुछ ऐसी कृपा कर दे।।

हे माँ शारदे कुछ ऐसी कृपा कर दे, हाथ उठा अपना हमें भारतीय बना दे। पूत सोवे तेरे उन्हें अंग्रेजीयत भावे, वरदान दे माँ कुछ ऐसी कृपा कर माँ, तेरा ही गुण गावे अंग्रेजीयत भगावें। हे माँ शारदे कुछ ऐसी कृपा कर दे।। तुम ही जगदम्बा तुम ही माँ काली, तुम ही माँ शारदा सबकी रखबाली। इस बंसन्त उत्सव कुछ ऐस





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