बेटी

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” कविता - “Beti Bachao Beti Padhao” Poems in Hindi

Beti Bachao Beti Padhao Poems in Hindi “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”- “Beti Bachao Beti Padhao” योजना भारत सरकार के द्वारा एक प्रयास है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर यह हिंदी कवितायेँ (poems) एक प्रयास है, जिससे समाज में फ़ैली कुरीतियां जैसे कन्याभ्रूण हत्या , बाल- विवाह इत्यादि को रोका जाए।ताकि बेटी को एक सुरक्षि



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

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अगर पुरानी मम्मी होतीं...

https://amitnishchhal.blogspot.com/?m=1 मकरंदअगर पुरानी मम्मी होतीं... ✒️बैठी सोच रही है मुनिया, मम्मी की फटकार कोदुखी बहुत है कल संध्या से, क्या पाती दुत्कार वो?अगर पुरानी मम्मी होतीं...अगर पुरानी मम्मी होतींक्या वो ऐसे डाँट सुनातीं?बात-बात पर इक बाला कोकह के क्या वह बाँझ बुलातीं?पापा जो अब च



KBC 10: ठेला चलाकर बेटी को बनाया टीचर, अमिताभ ने पिता को किया सलाम

पटना: कौन बनेगा करोड़पति के 10वें सीजन की शुरुआत 3 स‍ितंबर से हो चुकी है. हर बार की तरह इस बार भी शो में नए प्रत‍ियोगी द‍िलचस्प कहान‍ियां और प्रेरणा देने वाले किस्सों के साथ मौजूद हैं. शो में तीसरे द‍िन (5 सि‍तंबर) हॉट सीट पर एक ऐसी कंटेस्टेंट बैठेगी, ज‍िसके संघर्ष की कहा



आज है करवा चौथ सखी - बहु बेटी

Aaj Hai Karwa Chauth Sakhi Lyrics from the movie Bahu Beti is sung by Asha Bhosle, its music is composed by Ravi and lyrics are written by Sahir Ludhianvi.बहु बेटी (Bahu Beti )आज है करवा चौथ सखी रीमांग ले सुख का दान होआज है करवा चौथ सखी रीमांग ले सुख का दान होअपने सपनों के स्वामी काधर कर मन में ध्या



सब में शामिल हो मगर - बहु बेटी

बहू बेटी (1 9 65) के सब मी शमी हो मगर गीत: यह जॉय मुखर्जी, माला सिन्हा, अशोक कुमार और मेहमूद अभिनीत बहू बेटी का एक प्यारा गीत है। इसे मोहम्मद रफी द्वारा गाया जाता है और रवि द्वारा रचित किया जाता है।बहु बेटी (Bahu Beti )सब में शामिल हो मगरसबसे जुदा लगती होसब में शामिल हो मगरसबसे जुदा लगती होसिर्फ हमस



जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है - बहु बेटी

Jiyo To Aise Jiyo Jaise Sab Tumhara Hai Lyrics from the movie Bahu Beti is sung by Mohammad Rafi, its music is composed by Ravi and lyrics are written by Sahir Ludhianvi.बहु बेटी (Bahu Beti )जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा हैजियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा हैमारो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ भी न



रंगीन फ़िज़ा है - बहु बेटी

बहू बेटी फिल्म से रेंजन फिजा है गीत महेंद्र कपूर और आशा भोसले द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत रवि द्वारा रचित है और गीत साहिर लुधियानवी द्वारा लिखे गए हैं।बहु बेटी (Bahu Beti )रंगीन फ़िज़ा हैयह किसकी सदा हैतेरी भी है यह मेरी ही आवाज़ नहीं हैतेरी भी है यह मेरी ही आवाज़ नहीं हैए जान-इ-तमन्ना यह कोई प्यार



बहु बेटी (Bahu Beti )

'बहू बेटी' 1 9 65 की हिंदी फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिका में जॉय मुखर्जी, माला सिन्हा, अशोक कुमार, मेहमूद, आशीष कुमार, मुमताज, धूमल और मुखरी हैं। हमारे पास बहू बेटी के 4 गाने गीत और 4 वीडियो गाने हैं। रवि ने अपना संगीत बना लिया है। आशा भोसले, महेंद्र कपूर और मोहम्मद रफी ने इन गीतों को गाया है जबकि सा



बेटी को बेटा कहना उसका अपमान

बेटी को बेटा कहना उसका अपमान है की नहीं यह एक विचारणीय विषय है . हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते न की हम किस जगह पर रह रहे हैं.और कहाँ की बात कर रहे हैं. सबसे पहले तो मैं अपने आप को खुशकिस्मत मानती हूँ की आज मुझे यह अवसर मिला है की जो मैं



मन का भंवर

अकस्मात मीनू के जीवन में कैसी दुविधा आन पड़ी????जीवन में अजीव सा सन्नाटा छा गया.मीनू ने जेठ-जिठानी के कहने पर ही उनकी झोली में खुशिया डालने के लिए कदम उठाया था.लेकिन .....पहले से इस तरह का अंदेशा भी होता तो शायद .......चंद दिनों पूर्व जिन खावों में डूबी हुई थी,वो आज दिवास्वप्न सा लग रहा था.....



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

यह nara सुनने में ही कितना सुखद लगता है और जोश से भर denदेने वाला प्रतीत होता है . हर स्थान पर यही नारा जिससे की यह आभास होता है की हमारा समाज कितना हम बेटियों को बचाएंगे भी विकसित हो रहा है. है न हम बेटियों को बचाएंगे भी और पढ़ाएंगे भी



बेटी और बेटी (बुआ)

°°°°°°°°°°°°°°°°°°कल फोन आया था,एक बजे ट्रेन से आ रही है..! किसी को स्टेशन भेजने की बात चल ऱही थी ।सच भी था... आजरिया ससुराल से दूसरी बार दामाद जी के साथ.. आ रही हैं; घर केमाहौल में उत्साह सा महसूस हो रहा हैं ।इसी बीच .....एक तेज आवाज आती हैं ~"इतना सब देने की क्या ज



''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

'' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारीख दर तारीख अदालत के सामने गुहार लगाने के बावजूद कुछ नहीं कर पाए ,क्या वकील साहब अब कहीं इंसाफ नहीं है ? " रोते रोते उसने मेरे सामने अपनी बहन की दहेज़ हत



...क़त्ल कर देता .

अगर बिन दर्द के अपने मुझे तू क़त्ल कर देता , खुदा अपने ही हाथों से ये तेरी सांसें ले लेता , जन्म मेरा ज़मीं पर चाहा कब कभी किसने जुनूनी कोई भी बढ़कर कलम ये सर ही कर देता . ................................................................ दिलाओ मुझको हर तालीम हवाले फिर कहीं कर



बेटे की चाहत में,घर बर्बाद कब तक !

ये कैसी विडंबना है कि नारी का समाज में इतने योगदान के बाद भी वो सम्मान नहीं मिला, जितनी की वो हकदार है, इसके पीछे शायद नारी ही दोषी है, जब हम बेटी होते है तो अपने हक के लिए लड़ते है, शादी के बाद जब मां बनने वाले होते है तो ' बेटे की चाह ' रखते है, ऐसा क्यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की कहानी

शहर के अस्पताल में अजय का उपचार चलते-चलते 15-16 दिन हो गएँ थे|लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार देखने को मिल रहा था| आईसीयू वार्ड के सामने परेशान दीपक लगातार इधर से उधर चक्कर पर चक्कर लगा रहे थे |कभी बेचैनी में आसमान की तरफ दोनों हाथ जोड़ कर भगवान से अपने बेटे की जिन्दगी की भ



बेटी है नभ में जब तक

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियबेटी तुम्हारे आँचल में जहां की खुशियां भर देती हैतुम्हारी चार दीवारों को मुकम्मल घर कर देती है ॥बेटी धरा पर खुदा की कुदरत का नायाब नमूना हैबेटी न हो जिस घर में, उस घर का आँगन सूना है ॥बेटी माँ से ही, धीरे-धीरे माँ होना सीखती जाती हैबेटी माँ को उसके बचपन का आभास कराती है ॥बेटी



मैं वर्तमान की बेटी हूँ

यह रचना "बेटियाँ" प्रतियोगिता में सम्मलित की गयी है। इस पर वोट करने के लिए इस रचना के अंत में दिए गए वोट के बटन पर क्लिक करें।रचनाकार- Ravindra Singh Yadavविधा- कविता बीसवीं सदी में,प्रेमचंद की निर्मला थी बेटी ,इक्कीसवीं सदी में,



" बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ "

समस्त बेटियों को समर्पित ....जब हुयी प्रस्फुटित वह कलिकाकोई उपवन ना हर्षायाउसकी कोमलता को लख करपाषाण कोई न पिघलाया!वह पल प्रति पल विकसित होतीइक दिनचर्या जीती आईबच बच एक एक पग रखती वहशैशव व्यतीत करती आई!जिसने था उसका सृजन कियाउसने न मोल उसका जानावह था जो उसका जनक स्वयम् उसने न मोह उससे बाँधा !



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