बेटी

बिहार में जन्मीं देश की ये बेटी बनीं अमेरिकी सीनेटर, कहा- मुझे अपने देश पर गर्व है

दुनियाभर में भारतीय प्रतिभा अपना लोहा मनवा रही है। बड़ी कंपनियों के महत्वपूर्ण पदों से लेकर कई देशों की सरकारों में भी यहां के लोग शामिल हैं। ज़ाहिर है किसी और देश में जाकर चुनौतियों का सामना करते हुए ख़ास मुकाम बनाना बेहद कठिन होता है। खासकर बात जब महिलाओं की हो तो उनके लिए रास्ते और भी मुश्किल भरे हो



मोदी सरकार की बड़ी योजना 250 रूपये जमा करने पर बेटी को मिलेंगे 6 लाख से अधिक

भारत में लिंगानुपात का लगातार गिरना एक चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिसके लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं बनाई गयी हैं।कन्या समृद्धि योजना भारत सरकार कन्याओं के सुनहरे भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लेकर आयी है। बता दें कि देश में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफ़ी कम है,जिसकी वजह से सरकार महिल



"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" पर हिंदी की 11 सर्वश्रेष्ट कवितायेँ - Top 11 Hindi poems empowering Beti Bachao Beti Padhao aandolan

भारत में “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” (Beti Bachao Beti Padhao) एक अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दा है | बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं पर कविताओं और नारों के जरिए न केवल सरकार बल्कि आम आदमी भी अपनी बात को लोगों के समक्ष रख रहे है, जिससे समाज में फ़ैली कुरीतियां जैसे कन्याभ्रूण हत्य



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

ये कविता बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यकर्म के अंतर्गत दूरदर्शन हिसार में काव्य पथ कार्यकर्म में प्रस्तुत हुई है. ज्यादा से ज्यादा सुने शेयर करे और अपने दोस्तों को सुनाये . यूट्यूब पर ही सुने. धन्यवाद् आपके सुझाव का स्वागत है



अगर पुरानी मम्मी होतीं...

https://amitnishchhal.blogspot.com/?m=1 मकरंदअगर पुरानी मम्मी होतीं... ✒️बैठी सोच रही है मुनिया, मम्मी की फटकार कोदुखी बहुत है कल संध्या से, क्या पाती दुत्कार वो?अगर पुरानी मम्मी होतीं...अगर पुरानी मम्मी होतींक्या वो ऐसे डाँट सुनातीं?बात-बात पर इक बाला कोकह के क्या वह बाँझ बुलातीं?पापा जो अब च



KBC 10: ठेला चलाकर बेटी को बनाया टीचर, अमिताभ ने पिता को किया सलाम

पटना: कौन बनेगा करोड़पति के 10वें सीजन की शुरुआत 3 स‍ितंबर से हो चुकी है. हर बार की तरह इस बार भी शो में नए प्रत‍ियोगी द‍िलचस्प कहान‍ियां और प्रेरणा देने वाले किस्सों के साथ मौजूद हैं. शो में तीसरे द‍िन (5 सि‍तंबर) हॉट सीट पर एक ऐसी कंटेस्टेंट बैठेगी, ज‍िसके संघर्ष की कहा



आज है करवा चौथ सखी - बहु बेटी

Aaj Hai Karwa Chauth Sakhi Lyrics from the movie Bahu Beti is sung by Asha Bhosle, its music is composed by Ravi and lyrics are written by Sahir Ludhianvi.बहु बेटी (Bahu Beti )आज है करवा चौथ सखी रीमांग ले सुख का दान होआज है करवा चौथ सखी रीमांग ले सुख का दान होअपने सपनों के स्वामी काधर कर मन में ध्या



सब में शामिल हो मगर - बहु बेटी

बहू बेटी (1 9 65) के सब मी शमी हो मगर गीत: यह जॉय मुखर्जी, माला सिन्हा, अशोक कुमार और मेहमूद अभिनीत बहू बेटी का एक प्यारा गीत है। इसे मोहम्मद रफी द्वारा गाया जाता है और रवि द्वारा रचित किया जाता है।बहु बेटी (Bahu Beti )सब में शामिल हो मगरसबसे जुदा लगती होसब में शामिल हो मगरसबसे जुदा लगती होसिर्फ हमस



जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है - बहु बेटी

Jiyo To Aise Jiyo Jaise Sab Tumhara Hai Lyrics from the movie Bahu Beti is sung by Mohammad Rafi, its music is composed by Ravi and lyrics are written by Sahir Ludhianvi.बहु बेटी (Bahu Beti )जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा हैजियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा हैमारो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ भी न



रंगीन फ़िज़ा है - बहु बेटी

बहू बेटी फिल्म से रेंजन फिजा है गीत महेंद्र कपूर और आशा भोसले द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत रवि द्वारा रचित है और गीत साहिर लुधियानवी द्वारा लिखे गए हैं।बहु बेटी (Bahu Beti )रंगीन फ़िज़ा हैयह किसकी सदा हैतेरी भी है यह मेरी ही आवाज़ नहीं हैतेरी भी है यह मेरी ही आवाज़ नहीं हैए जान-इ-तमन्ना यह कोई प्यार



बहु बेटी (Bahu Beti )

'बहू बेटी' 1 9 65 की हिंदी फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिका में जॉय मुखर्जी, माला सिन्हा, अशोक कुमार, मेहमूद, आशीष कुमार, मुमताज, धूमल और मुखरी हैं। हमारे पास बहू बेटी के 4 गाने गीत और 4 वीडियो गाने हैं। रवि ने अपना संगीत बना लिया है। आशा भोसले, महेंद्र कपूर और मोहम्मद रफी ने इन गीतों को गाया है जबकि सा



बेटी को बेटा कहना उसका अपमान

बेटी को बेटा कहना उसका अपमान है की नहीं यह एक विचारणीय विषय है . हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते न की हम किस जगह पर रह रहे हैं.और कहाँ की बात कर रहे हैं. सबसे पहले तो मैं अपने आप को खुशकिस्मत मानती हूँ की आज मुझे यह अवसर मिला है की जो मैं



मन का भंवर

अकस्मात मीनू के जीवन में कैसी दुविधा आन पड़ी????जीवन में अजीव सा सन्नाटा छा गया.मीनू ने जेठ-जिठानी के कहने पर ही उनकी झोली में खुशिया डालने के लिए कदम उठाया था.लेकिन .....पहले से इस तरह का अंदेशा भी होता तो शायद .......चंद दिनों पूर्व जिन खावों में डूबी हुई थी,वो आज दिवास्वप्न सा लग रहा था.....



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

यह nara सुनने में ही कितना सुखद लगता है और जोश से भर denदेने वाला प्रतीत होता है . हर स्थान पर यही नारा जिससे की यह आभास होता है की हमारा समाज कितना हम बेटियों को बचाएंगे भी विकसित हो रहा है. है न हम बेटियों को बचाएंगे भी और पढ़ाएंगे भी



बेटी और बेटी (बुआ)

°°°°°°°°°°°°°°°°°°कल फोन आया था,एक बजे ट्रेन से आ रही है..! किसी को स्टेशन भेजने की बात चल ऱही थी ।सच भी था... आजरिया ससुराल से दूसरी बार दामाद जी के साथ.. आ रही हैं; घर केमाहौल में उत्साह सा महसूस हो रहा हैं ।इसी बीच .....एक तेज आवाज आती हैं ~"इतना सब देने की क्या ज



''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

'' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारीख दर तारीख अदालत के सामने गुहार लगाने के बावजूद कुछ नहीं कर पाए ,क्या वकील साहब अब कहीं इंसाफ नहीं है ? " रोते रोते उसने मेरे सामने अपनी बहन की दहेज़ हत



...क़त्ल कर देता .

अगर बिन दर्द के अपने मुझे तू क़त्ल कर देता , खुदा अपने ही हाथों से ये तेरी सांसें ले लेता , जन्म मेरा ज़मीं पर चाहा कब कभी किसने जुनूनी कोई भी बढ़कर कलम ये सर ही कर देता . ................................................................ दिलाओ मुझको हर तालीम हवाले फिर कहीं कर



बेटे की चाहत में,घर बर्बाद कब तक !

ये कैसी विडंबना है कि नारी का समाज में इतने योगदान के बाद भी वो सम्मान नहीं मिला, जितनी की वो हकदार है, इसके पीछे शायद नारी ही दोषी है, जब हम बेटी होते है तो अपने हक के लिए लड़ते है, शादी के बाद जब मां बनने वाले होते है तो ' बेटे की चाह ' रखते है, ऐसा क्यों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,



बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की कहानी

शहर के अस्पताल में अजय का उपचार चलते-चलते 15-16 दिन हो गएँ थे|लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार देखने को मिल रहा था| आईसीयू वार्ड के सामने परेशान दीपक लगातार इधर से उधर चक्कर पर चक्कर लगा रहे थे |कभी बेचैनी में आसमान की तरफ दोनों हाथ जोड़ कर भगवान से अपने बेटे की जिन्दगी की भ



बेटी है नभ में जब तक

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियबेटी तुम्हारे आँचल में जहां की खुशियां भर देती हैतुम्हारी चार दीवारों को मुकम्मल घर कर देती है ॥बेटी धरा पर खुदा की कुदरत का नायाब नमूना हैबेटी न हो जिस घर में, उस घर का आँगन सूना है ॥बेटी माँ से ही, धीरे-धीरे माँ होना सीखती जाती हैबेटी माँ को उसके बचपन का आभास कराती है ॥बेटी



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