महिला मताधिकार की जनक : कामिनी रॉय (बांग्ला : য়ামিন রায়)

जी हां, कामिनी रॉय जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था । आज 12 अक्टूबर को उनकी 155वीं जयंती है । कामिनी पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ब्रिटिश इंडिया में ऑनर्स में ग्रेजुएशन की थी । कामिनी एक एक्टिविष्ट, शिक्षाविद् होने के साथ ही एक



5 अक्टूबर से चलने वाली 'वंदे भारत एक्सप्रेस' है माता के भक्तों के लिए खास, जानिए 10 खूबियां

आधुनिक भारत में बहुत सारी चीजें बदल रही हैं, चीजें डिजिटल हो रही हैं। हर जगह आधुनिकता ही काम हो रहे हैं, रेलवे हो या सिनेमाहॉल जगह डिजिटल भारत अपना परचम लहरा रहा है। अब तक लोगों को जानकारी थी कि अगर लंबी दूरियां तय करनी है तो फ्लाइट का सहारा लिया जाता है लेकिन अगर दिल्ली से वैष्णों देवी जाना है तो



स्वच्छ भारत

स्वच्छ भारत सोच रही हूँ मैं सुबह से, स्वच्छ भारत पर क्या लिखूँ🤔 ये अरमान है प्रधानमंत्री का, या फर्ज है हम सब का🤔 अपना घर साफ करते हम, कूड़ा उठाकर बाहर डाल देते हम🤦🏻‍♀ जैसे अपना घर ही अपना है😇 बाकी का भारत बस पी एम का सपना है.. 🤷🏻‍♀ नगरपालिका आएगी तो ये करेगी😛, नगरपालिका आयेगी तो वो करेगी,🧐



October 2019- List of Hindu Festivals and Holidays in October Month

इस बार अक्टूबर का पूरा महीना व्रत-त्यौहार के नाम है. हिन्दू पंचांग के अनुसार इस महीने में बड़े-बड़े त्यौहार और व्रत मनाये जायेगे. इस महीने में बड़े पर्व में नवरात्रि, दशहरा, दीपावली जैसे त्यौहार है. महीने के शुरुआती दिनों में ही माँ दुर्गा के नवरात्री उत्सव मना रहे है. नवरात



जयंती विशेष: ईश्वर चंद्र विद्यासागर के निधन पर रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा कही यह बात आज भी महत्वपूर्ण

आज भारत के महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर को उनकी 200वीं जयंती पर याद किया जा रहा है। विद्यासागर 19 वीं सदी के एसे महान भारतीय व्यक्ति थे जो आज भी समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद के रूप में याद किये जाते हैं। प्रोफेसर ईश्वर चंद्र विद्



गुस्सा, आशिकी और सादगी.....जीवन के हर रंग को जीते थे जवाहरलाल नेहरू

200 साल गुलामी झेलने के बाद जब भारत ने आजादी हासिल की थी। ये पूरे देश के लिए बहुत खुशी का पल था और उन आत्मा को शांति भी प्राप्ति हुई होगी जिन्होंने अपने जन्म से हर सांस आजादी के लिए लगा दी। बहुत से क्रांतिकारियों ने अपने प्राण गवां दिये क्योंकि भारत को आजाद करना था। फ



'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य आज भी है क्यों कायम? जानिए इनका जीवन-परिचय

भारत देश यूही महान नहीं माना जाता, यहां पर कई वीर ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी की हर सांस देश के नाम कर दी थी। आजादी से पहले, आजादी के बाद या फिर आजादी के समय बहुत से ऐसे स्वंतत्रता सेनानी रहे हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया और आज उनका इतिहास में नाम है। उन्हीं स्वतंत्रता से



अटल पेंशन योजना

अटल पेंशन योजना (या एपीवाई, जिसे पहले स्वावलंबन योजना के रूप में जाना जाता था) भारत सरकार समर्थित एक पेंशन योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को ध्यान में रख कर निर्धारित किया गया है। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई को कोलकाता में लॉन्च



जीवनी : देश के बंटवारे के समय महात्मा गांधी का हुआ था कुछ ऐसा हाल

Mahatma Gandhi Biography- भारत के राष्ट्रपिता के रूप में पहचाने जाने वाले महात्मा गांधी का दर्जा आज भी बहुत ऊंचा है। भारतीय मुद्रा हो या फिर कोई सड़क का नाम हर जगह महात्मा गांधी को आज भी सम्मान दिया जाता है। उनकी तस्वीरें सरकारी भवनों में नजर आती हैं और इसके अलावा 15



"रविवार का सृजन (टूटता परिवार)"

*गुम हो गए संयुक्त परिवार**एक वो दौर था* जब पति, *अपनी भाभी को आवाज़ लगाकर* घर आने की खबर अपनी पत्नी को देता था । पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे । बाऊजी की बातों का.. *”हाँ बाऊजी"* *"जी बाऊजी"*' के अलावा दूसरा जवाब नही होता था ।*आज बेटा बाप से बड़ा हो गया



कश्मीर अपना सा लगने लगा|

कश्मीर अपना सा लगने लगा| था देश कभी एक, भारत को टुकड़ो में बाटा गया|करके टुकड़ो में हमें, एक बार नहीं, कई बार लूटागया|ब्यापार जब से शुरू हुआ, हम लूटते ही रहे...|अकबर धान,पान, केला, लाया, अयोध्या में मस्जिद बनवाया|कर अमीरों से सौदा, ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारतमें बन गई|कर किसानो का दोहन, किसा



हिंदी दिवस

अनपढ़ नही हूँ साहब"हिंदी" में लिखना उतना ही अच्छा लगता हैजितना "माँ के हाथों का खाना"हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं



चीन के सामने ...

https://duniaabhiabhi.com/now-new-preparations-in-front-of-china-2041-2/



Mahabharat Katha ऐसी जानकारियां जिसे आपने नहीं सुनी होंगी पूरी कथा

mahabharat katha महाभारत की रचना महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने की है, लेकिन इसका लेखन भगवान श्रीगणेश ने किया है.. महाभारत ग्रंथ में चंद्रवंश का वर्णन है.mahabharat katha में न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्



चंद्रयान 2

भारत का चंद्रयान 2 मिशन फेल रहा परन्तु यदि यह सफल होता तो इससे आम आदमी को क्या लाभ होता।क्या वह चांद पर जाकर रह सकता था ?क्या वह चांद पर घर खरीद सकता था ?या फिर यह सब झूठी शान दिखाने या नेताओं और पूंजीपतियों द्वारा गरीबों के पैसे पर चांद पर अयाशी करने का माध्यम बनता औ



टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम की वो 10 मजेदार कहानियां जानते हैं आप?

भारतीय टीम इंडिया के सिर पर जितना प्रेशर होता है वो लोग उतना ही लाइफ को मजे के साथ लेते हैं। ऐसा आज से नहीं बल्कि दशकों से होता आया है। अगर टीम इंडिया के सिर पर मैच का ज्यादा स्ट्रेस रहता है तब भी वे अपने हर पल को अच्छे से व्यतीत करते हैं। कुछ ऐसा ही किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं जब टीम इंडिया ने



कर्ण का अंतिम संस्कार

कर्ण का अंतिम संस्कार महाभारत के युद्ध में जब कर्ण को अर्जुन ने मृत्युशय्या पर लिटा दिया तो श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को महात्मा का भेस धारण करके आने को कहा और वह दोनो महात्मा के भेस में कर्ण के समीप पहुंचे श्री कृष्ण



91 साल पहले आई देश की पहली AC कोच वाली ट्रेन कैसे रहती थी ठंडी ?

आज के दौर में तकनीक ने हर क्षेत्र में अपनी जगह बना ली है और ट्रेन तो बस सुपरफास्ट होती ही जा रही है। ट्रेन में सफर करना बहुत आसान हो जाता है और हमें एक रिजर्व सीट मिल जाती है जिसपर हम सोकर बैठकर अपनी उस जगह पर पहुंच जाते हैं जहां पर भी हम जाना चाहते हैं। AC कोच में बैठकर हम ठंडी हवा लेकर हम अपनी मनप



हॉकी का जादूगर राष्ट्रप्रेम से राष्ट्रीयखेल तक ! भारत रत्न एक विश्लेषण एक खोज ?

कोई विशिष्ट स्थान अथवा व्यक्ति से संबंध नहीं आप कई प्रकार की लाभान्वित व्यक्तित्व की श्रेणियों से इसे प्रायोजित कर सकते हैं,उदाहरण के लिए कोई राजनीतिक संगठन के श्रीमान जो हर आयोजन को निज-स्वार्थ प्रयोजन में परिवर्तित कर कुछ जड़शब्दों को चेतन भाव के अभाव में प्राकृतिक पुष्पांजलि अर्पित कर जनता समूह क



कर्ण

महान कर्णमहाभारत के युद्ध में अर्जुन और कर्ण के बीच घमासान युद्ध चल रहा था अर्जुन का तीर लगने पे कर्ण का रथ 25-30 हाथ पीछे खिसक जाता और कर्ण के तीर से अर्जुन का रथ मात्र सिर्फ 2-3 हाथ हि खिसकता।इससे अर्जुन को अपने बाहुबल पर अभिमान होने लगा और वह कहने लगा देखा प्रभु मेरे प्रहारो



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