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माँ के आशीष बिना जीत कहाँ होती है,I

माँजिस्म से रूह तक ,एक-एक रुआँ होती है,वो तो माँ है सारी, दुनियाँ से जुदा होती है, उसकी प्यारी सी, थपक आँख सुला देतीहै,माँ तो पलकों से, भर- भर के दुआ देती है ये जो दौलत है, बेखोफ़ जिगर, शौहरत, हैमाँ के आँचल की, हल्की सी हवा होतीहै I चाहे दुनियाँ ही, रुके, सांस भले थम जाये,माँ की मम



‘‘चीन’’ का नाम ‘‘क्यों’’ नहीं लिया ? भारतीय? राष्ट्रीय? कांग्रेस!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘अचानक’ ‘‘लेह’’ (लद्दाख) की 11000 फुट की उंचाई पर स्थित अग्रिम चौकी ‘‘नीमू’’ पंहुचकर सैनिकों के बीच ‘‘दम’’ भर कर सेना की हौसला अफजाई की। यह कहकर कि ‘‘बहादुरी और साहस शांति की जरूरी शर्ते है, दुश्मन ने हमारे जवान की ताकत व गुस्से को देखा है‘‘। उक्त दौरे के बाद कांग्रेस क



बिना महिष गौ कहाँ दही है

मापनी - १२१२२ 12122=============================समझ नहीं है यही सही है lबिना महिष गौ कहाँ दही है llकरें मिलावट जहाँ विदेशी -कहाँ सुखी वे , जगत वही है llगजल लिखूँ मैं कहाँ जहाँ में ,सखे सिखाते विधा यही है llमहा मिलन मन विधा सुसंगम ,सुरभि सुधा ऱस सकल मही है llनहीं लिखे हम कभी कलम से ,कहाँ सुभाषित धरा



मीर अली, अंकित राज के साथ & टीवी के मैं भी अर्धांगिनी में नजर आएंगे | आई डब्लयू एम बज

& टीवी शो मैं भी अर्धांगिनी में प्रमुख घटनाक्रम देखने को मिलेंगे और आई डब्ल्यू एम बज कहानी लाइन और कलाकारों में नए बदलावों के बारे में अपने पाठकों को अपडेट करने में सबसे आगे रहा है। हमने पहले ही शो में मुख्य अभिनेता अविनाश सचदेव की रिप्लेसमेंट की खबर दी थी। हां, हमें इसक



बिनान्स दे रहा है बिनान्स कॉइन पे छूट

लगभग २ सप्ताह पहले, लोकप्रिय क्रिप्टोकुरेंसी एक्सचेंज, बिनेंस को सिस्कोन (एसवाईएस) के संबंध में कुछ अनियमित ट्रेड के कारण १२ घंटों तक ट्रेड रोकना पड़ा जो की इंटरनल रिस्क मैनजमेंट सिस्टम द्वारा नोटिस किय



बिना किसी सारांश के …

हे कृष्ण तुझे पल पल जीने के लिए तेरे बाल स्वरुप को देखने की आशा में मैं हुई गोकुल तेरी बाँसुरी की धुन सुनने के लिए मैं हुई कदम्ब यमुना हुई तुझे छूने के लिए मटकी बनी माखन के लिए यशोदा मईया की धड़कन बनी देवकी की प्रतीक्षा बनी सुदामा की मित्रता बनी राधा के



शिक्षित होने का अर्थ, नहीं होने का अनर्थ

गिरिजा नंद झाहम नाहक ही इस बात को ले कर हकलान होते रहे हैं कि यह देश निरक्षरों का देश है। अनपढ़ और गंवारों का देश है। देश को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि यहां के ‘उच्चतम’ शिक्षा प्राप्त नौजवानों में किसी काम के छोटे या बड़े होने में भेद नहीं करते। शिक्षा अपनी जगह और काम अपनी जगह। शिक्षा इंसान को समझ



मैं बिना कलम का कवि हूं

मैं पतझड़ वाला मौसम हूं मैं अंधेरे से रोशन हूं मैं आसमां हूं बिन तारों का मैं मुरझाया इक गुलशन हूं मैं इक बंजर जमीं हूं मैं बिन रोशनी का रवि हूं मैं समंदर हुूं बिन पानी का मैं बिना कलम का कवि हूं... मैं बिना कलम का कवि हूं वो सपना भी बड़ा सस्ता है, जो मेरी आंखों में बसता है. कुछ हालत मेरी ऐसी है,





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