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मुस्कुराहट भाग-४

कल्पना को फिर सपने की वह लाल साड़ी और कुर्ता याद आया। कल्पना ने धीर से काम की दुनिया से छुट्टी ली मंगलवार की। आज कल्पना ने अपनी मामी को फोन करके रोहतक आने के लिए कह दिया। वह अपने आस पास के तीन चार बाजार में गयी। कल्पना साड़ी, कुर्ता पजामा पसंद करना चाहती थी। यह चाह धीर और सपना के लिए थी। नवरात्



हिंदी

में हिंदी हू कही माला को बनाने वाला धागा हू में, तो कही माथे की बिंदी हू में हिंदी हू ! में पहले थी , अब हू ,और कल भविश्य हू ! है में कालजयी हू ,में हिंदी हू ! नीत नई खोजो की सीढिया चढ़ती में तो कभी न थकती !



“मुक्तक” हिंदी सिर बिंदी सजी, सजा सितंबर माह।

हिन्दी दिवस के सुअवसर पर आप सभी को दिल से बधाई सह शुभकामना, प्रस्तुत है मुक्तक....... ॐ जय माँ शारदा......!“मुक्तक”हिंदी सिर बिंदी सजी, सजा सितंबर माह। अपनी भाषा को मिला, संवैधानिक छाँह।चौदह तारिख खिल गया, दे दर्जा सम्मान- धूम-धाम से मन रहा, प्रिय त्यौहारी चाह॥-1बहुत बधाई आप को, देशज मीठी बोल। सगरी





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