बोस

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" खुदीराम बोस - 18 वर्ष ८ महिने 8 दिन और फ़ासी " क्या देश भूल गया इस वलिदान को ?

वह केवल 18 वर्ष का था, जब उसे 1908 में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक हमले और तीन अंग्रेजों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। एक सदी बीत चुकी है, फिर भी खुदीराम बोस का नाम परछाइयों में है।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांत



OMG : 5 स्टार होटल में सिर्फ 2 केलों का बिल देखकर इस एक्टर के उड़ गए होश

जब हम किसी महंगे रेस्टोरेंट या होटल में जाते हैं तो वहां पर जिस चीज का जो प्राइज होता है वो अदा करना ही पड़ता है। मगर हैरत हर किसी को होती है क्योंकि जो चीज हमें बाहर 40 रुपये में ढेर सारा मिल जाता है लेकिन अगर यही हमें 400 से ज्यादा की कीमत में वो भी सिर्फ दो मिले तो होश उड़ना लाजमी है। ऐसा ही कुछ



आज भी सड़कों पर भीख मांगता है सुभाष चंद्र बोस के साथ देश की आजादी के लिए लड़ना वाला ये सिपाही

आज हम आज़ादी का मजा लेते हुए अपने घरों में बड़े-बड़े मुद्दों को बड़ी आसानी से बहस में उड़ा देते है, लेकिन कभी सोचा है कि जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश को आज़ाद कराया, उनमें से जो जिंदा हैं, वो किस हाल में हैं ?ये हैं झाँसी के रहने वाले श्रीपत जी, 93 साल से भी ज्यादा की उम्र पार कर चुके श्रीप



खुदीराम बोस शहीद दिवस

खुदीराम बोस (Khudiram Bose) (188 9 -1 90 8) एक भारतीयस्वतंत्रता सेनानी थे , भारतीयस्वतंत्रता आंदोलन में सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में सेएक थे | खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर जिले के बहावैनी गांव में 3 दिसंबर 1889 को हुआ था। उनके पिता त्रिलोक्यानथ बसु नद



नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के कुछ गुणों पर तुकबंदी

नमस्कार दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि 23 जनवरी 1897 को भारत की किस महान हस्ती का जन्म हुआ था ? है पता यदि आपको तो ठीक ! यदि नही तो न समझें अपनी मेमोरी वीक !! पता हो या न पता हो, हम बता देते हैं ! उनकी याद सभी को दिला देते हैं !!........ ‘नेताजी सु



नेताजी सुभाष चंद्र बोस

नेताजी से जुड़ी कुछ अन्य दिलचस्प बातें :नेताजी से जु़ड़े ऐसे तमाम दिलचस्प किस्से हैं. उन्हीं में से एक है नेताजी का कारों के प्रति खास लगाव. कुछ ही लोग जानते हैं कि नेताजी कारों के बेहद शौकीन थे, हालांकि दिलचस्प बात यह भी है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में कभी कोई कार नहीं खरीदी.नेताजी पर शोध करने वालो



कई सच छुपाए गए तो कई अधूरे बताए गए

कई सच छुपाए गए तो कई अधूरे बताए गए अपनी आजादी की कीमत तो हमने भी चुकाई है तुम जैसे अनेक वीरों को खो के जो यह पाई है। कहने को तो हमारे देश को 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली थी लेकिन क्या यह पूर्ण स्वतंत्रता थी? स्वराज तो हमने हासिल कर लिया था लेकिन उसे ' सुराज ' नहीं बना





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