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एक आधुनिक पौराणिक कहानी

एक “आधुनिक” पौराणिक कहानीआप सभी नेपौराणिक कहानियों मेंपढ़ा हीहोगा किदेवताओं औरदानवों काबार बारयुद्ध होताथा, औरबार बारदेवता हारतेहुए, भगवान् (अर्थात भगवान् विष्णु ) के दरबारमें गुहारलगते थे–त्राहि माम,त्राहि माम.भगवान् फिरकिसी नएदेवी यादेवता कीरचना करकेदेवताओं कोशक्ति प्रदानकरते थे.देवता विजयीहोते थेऔ



शब्द ऊर्जा है

दिल-नशीं हर्फ़सुनने कोबेताब हो दिलकान कोसुनाई देंज़हर बुझे बदतरीन बोलक़हर ढाते हर्फ़नफ़रत के कुँए सेनिकलकर आते हर्फ़तबाही का सबबबनते हर्फ़भरा हो जिनमेंख़ौफ़ और दर्पतोकुछ तो ज़रूर करोगे.....कान बंद करोगे ?बे-सदा आसमान सेकहोगे-निगल जाओ इन्हेंयाभाग जाओगेसुनने सुरीला रागवहाँजहाँबाग़



विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता

संसार की प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई निर्माता होता है तभी वह बनती है। इतने बड़े विश्व का भी कोई न कोई निर्माता होना चाहिए। सृष्टि की विभिन्न वस्तुओं में से प्रत्येक में अपने-अपने नियम क्रम पाये जाते हैं। उन्हीं के आधार पर उनकी गतिविधियां संचालित होती हैं। यह नियम न होते तो सर्वत्र अस्त-व्यस्तता और अ



महान ब्रह्मावर्त

हमारा ब्रह्मावर्त महान !श्री विष्णु ने नाभि कमल से ब्रह्मा को जन्माया,करो सृष्टि रचना बिठूर में उत्तम क्षेत्र बताया,ब्रह्माजी ने यज्ञ शक्ति से किया सृष्टि निर्माण Iहमारा ब्रह्मावर्त महान !अखिल विश्व का केंद्र बिंदु यह ब्रह्मावर्त कहाता,गड़ी जहाँ ब्रह्मा की खूंटी, जन-जन शीश झुकाता,निकट इसी के आरक्षित



ब्रह्माण्ड

 ब्रह्माण्ड से पहले अंतरिक्ष नहीं, आकाश भी नही था, छिपा था क्या कहाँ,किसने देखा था?अनेको प्रश्न है जिनका कोई  एक निश्चिंत रूप से  उत्तर देने वाला ठोस  सिद्धांत अभी तक सामने नही आया है| पर कहा जाता है की सृष्टि की उत्त्पति आज भी रहस्य है । ब्रह्मांड का आकर अण्डाकार है,ब्रह्माण्ड से पहले कुछ भी नही था





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