ब्रह्माण्ड

शब्द ऊर्जा है

दिल-नशीं हर्फ़सुनने कोबेताब हो दिलकान कोसुनाई देंज़हर बुझे बदतरीन बोलक़हर ढाते हर्फ़नफ़रत के कुँए सेनिकलकर आते हर्फ़तबाही का सबबबनते हर्फ़भरा हो जिनमेंख़ौफ़ और दर्पतोकुछ तो ज़रूर करोगे.....कान बंद करोगे ?बे-सदा आसमान सेकहोगे-निगल जाओ इन्हेंयाभाग जाओगेसुनने सुरीला रागवहाँजहाँबाग़



विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता

संसार की प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई निर्माता होता है तभी वह बनती है। इतने बड़े विश्व का भी कोई न कोई निर्माता होना चाहिए। सृष्टि की विभिन्न वस्तुओं में से प्रत्येक में अपने-अपने नियम क्रम पाये जाते हैं। उन्हीं के आधार पर उनकी गतिविधियां संचालित होती हैं। यह नियम न होते तो सर्वत्र अस्त-व्यस्तता और अ



ब्रह्माण्ड

 ब्रह्माण्ड से पहले अंतरिक्ष नहीं, आकाश भी नही था, छिपा था क्या कहाँ,किसने देखा था?अनेको प्रश्न है जिनका कोई  एक निश्चिंत रूप से  उत्तर देने वाला ठोस  सिद्धांत अभी तक सामने नही आया है| पर कहा जाता है की सृष्टि की उत्त्पति आज भी रहस्य है । ब्रह्मांड का आकर अण्डाकार है,ब्रह्माण्ड से पहले कुछ भी नही था





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