चाटुकारिता

1


शब्द ......!

शब्द .....माेती भी हैं और पत्थर भी ,आरोप- प्रत्यारोप भी, हमेशा घिरे रहते हैं हम इनसे....,सीमाएँ बाँध कर भी ,जाे सीमित नहीं, वे ही ताे हैं शब्द, कभी उदास मन -में सूर्य की प्रथम किरण- सी ताज़गी और उमंग भर देते हैं ,ताे कहीं किसी की चीत्कार काे वहशी बन दबा देते हैं... काेई इन्हें ताेड़ -मरोड़ कर,



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x