चलकर

‘‘पर्रिकर’’ ‘‘वाद’’ को ढूँढता मेरा देश। ‘व’’ ‘‘गांधीवाद’’ से चलकर ‘‘पर्रिकरवाद’’ तक पहुंचने का सुखद अहसास!

देश के प्रथम आई.आईटी शिक्षा प्राप्त (गोवा के) मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षामंत्री डॉ. मनोहर गोपाल कृष्ण प्रभु पर्रिकर लम्बी बीमारी से अदम्य आत्मबल के साथ लड़ते हुये अब इस दुनिया में नहीं रहे और ‘‘स्वर्गवासी’’ हो गये। याद कीजिये! विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते समय उनका वह चेहरा, जो चिकित्सकीय उप



"गज़ल" दिल मचलकर रहा फिसलता रह गया।।

मापनी- २१२ २१२ २१२ २१२ काफ़िया- आ (स्वर) रदीफ़- रह गया"गज़ल" कुछ मिला भी नही ढूढता रह गयावक्त आ कर गया देखता रह गयाथी निशा भी खिली दिल सजाकर गईऋतु झलक कर गयी झाँकता रह गया।।रात थी ढल गई चाँदनी को लिएसच पलट कर सुबह सोचता रह गया।।रात रानी खिली थी कहीं बाग मेंपहर की ताजगी महकता





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