चर्चा



भक्ति स्वतंत्र सकल गुन खानी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में भक्ति का बहुत बड़ा महत्व है | भक्ति क्या है ? इसका विश्लेषण हमारे शास्त्रों में बहुत ही विधिवत किया गया है | वैसे तो भक्ति नौ पिरकार की कही गयी है परंतु मुख्यत: भक्ति दो प्रकार की बताई गई हैं :- साध्य भक्ति एवं साधन भक्ति | साध्य भक्ति क्या है ? इसके व



ज्ञान का प्राकाश कैसे हो :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमात्मा ने सुंदर सृष्टि का निर्माण किया और इस समस्त सृष्टि को ज्ञान से परिपूर्ण कर दिया | उस ज्ञान को कण कण में पहुंचाने के लिए प्रकृति में अनेकों उदाहरण भी भर दिए | फिर मनुष्य की रचना करके इस धरती पर अनेकों महापुरुष तो भेजे ही साथ ही समय-समय पर स्वयं अवतार लेकर के उस ज्ञान का प्रसार मानव मात्र मे



वर्तमान को सुधारें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*यह सृष्टि निरंतर गतिशील है , आज जो समय है कल वह भूत बन जाता है | काल गणना की सुविधा की दृष्टि से समय को तीन भागों में बांटा गया है जिसे भूतकाल वर्तमान काल एवं भविष्य काल कहा गया है | ध्यान देने वाली बात है भूत एवं भविष्य दोनों के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसे कहा जाता है "कल" | अंतर सि



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥⚜️ ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻 *जिस प्रकार एक जौहरी अनजाने में हीरे को कांच समझ बैठता है और बाद में पछताता हैं उसी प्रकार आज के कुछ लोग सनातन धर



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६५

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *विश्राम - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौंसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६४

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तिरसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६३

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *तिरसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*बासठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६२

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *बासठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*इकसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*तुलसीदास सदा हरि चे



परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में जितना महत्व पूजा - पाठ , साधना - उपासना का है उससे कहीं अधिक महत्त्व परिक्रमा का है | परिक्रमा करने से अनेकों जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं | हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है :- "यानि कानि च पापानि , जन्मांतर कृतानि च ! तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदिक्षण पदे पदे !! अर्थात :- अनेक



आंतरिक शत्रु :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर आने के बाद मनुष्य अनेकों कृत्य करता रहता है जिसके कारण वह इस संसार में किसी को अपना शत्रु तो किसी को अपना मित्र मानने लगता है | यदि हमारे सनातन शास्त्रों की बात की जाय तो मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु मनुष्य के मानसिक विकार हैं जिन्हें काम , क्रोध , मद , लोभ , मोह , अहंकार की उपमा दी गई ह



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग ६१

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *इकसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*साठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जो य पढ़े हनुमान चाल



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ६०

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *साठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*उनसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*यह सत बार पाठ कर जोई



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ५९

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *उनसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*अट्ठावनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय जय जय हनुमान ग



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ५८

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *अट्ठावनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सत्तावनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय जय जय हनुमा



हनुमान चालीसा !(तात्विक अनुशीलन) भाग ५७

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सत्तावनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छप्पनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*संकट कटै मिटै सब प



त्याग

*मनुष्य इस धरा धाम पर आने के बाद अपने जीवन में संतोष प्राप्त करना चाहता है पर मनुष्य को संतोष नहीं प्राप्त हो पाता | कोई ना कोई कमी जीवन भर उसे शूल की तरह चुभती रहती है | जीवन में यदि संतोष प्राप्त करना तो हमारे सनातन धर्म के रहस्य को समझना होगा | संतोष प्राप्त होता है त्याग से | हमारा देश भारत आदिक



हनुमान चालीसी !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५६

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *छप्पनवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पचपनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*और देवता चित्त ना ध



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५५

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पचपनवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौवनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*अंतकाल रघुबर पुर जाई



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५४

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तिरपनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*तुमरो भजन राम को



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५३

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *तिरपवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*बावनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*राम रसायन तुम्हरे



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