चिन्तन

1


मोक्ष :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म मैं चार प्रकार के पुरुषार्थ बताए गये हैं :- धर्म , अर्थ , काम एवं मोक्ष | जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना होता है | गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस में लिखा है :- "साधन धाम मोक्ष कर द्वारा ! पाइ न जेहि परलोक संवारा !! अर्थात चौरासी लाख योनियों में मानव योनि ही श्रेष्ठ है जिसे साधना



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻 *यह संसार जितना विचित्र है उतने विचित्र यहाँ के प्राणी हैं फिर इन प्राणियों सर्वश्रेष्ठ मनुष्य की विचित्रता की तो थाह ही नहीं लगायी जा सकती है | यहाँ लोग एक दूसरे प



अर्जुन के तीर

🔥⚜🔥⚜🔥⚜🔥⚜🌸⚜🔥 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🏹 *अर्जुन के तीर* 🏹🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻 *मानव जीवन में अपने जीवन को उच्चता प्राप्त कराने के लिए मनुष्य की मानसिकता एवं भावना भी उच्चकोटि की होनी परम आवश्यक है ! क्योंकि मनुष्य की मानसिकता ही जीवन की दिशा



गोत्र :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म इतना दिव्य एवं महान है कि इसकी प्रत्येक मान्यताएं अपने आप में अलौकिक हैं | जिस प्रकार सनातन की प्रत्येक मान्यता समस्त मानव जाति के लिए कल्याणकारी है उसी प्रकार सनातन धर्म में व्यक्ति की पहचान कराने के लिए गोत्र की व्यवस्था बनाई गई थी | सनातन धर्म में गोत्र



मुखिया :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही मानव समाज में समाज को दिशा दिखाने के लिए मुखिया का चयन होता रहा है | किसी भी समाज या परिवार को मुखिया के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है | जिस प्रकार हमारे देश में पूर्वकाल में राजाओं का शासन हुआ करता था वही राजा पूरे देश का मुखिया कहा जाता था और अपने परिवार को , अपने राष्ट्र को निरंतर



आत्मसंयम :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर जन्म लेने के बाद मनुष्य एक लंबे समय तक जीवन जीता है और इस जीवन काल में जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए मनुष्य को अनेक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है | जितनी आवश्यकता मनुष्य को भौतिक संसाधनों की पड़ती है उतनी ही आवश्यकता आंतरिक संसाधनों की भी होती है , मात्र भौतिक संसाधनों के बल पर इस ज



हमारा संविधान :--+ आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीनकाल में हमारे देश भारत में राजाओं का शासन होता था , जो कि कुल परंपरा के अनुसार चला करता था | राजा के चुनाव में प्रजा का कोई अर्थ नहीं होता था | आदिकाल से लेकर के अंग्रेजों के शासन तक यही परंपरा चलती रही जिसे राजतंत्र कहा गया है , परंतु जब हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अथक परिश



हमारा गणतन्त्र दिवस :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*किसी भी परिवार , समाज एवं राष्ट्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियम एवं संविधान की आवश्यकता होती है , बिना नियम एवं बिना संविधान के समाज एवं परिवार तथा कोई भी राष्ट्र निरंकुश हो जाता है | इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजों की दासता से १५ अगस्त सन १९४७ को जब हमारा देश भारत स्वतंत्



गाँधी तेरा सत्य ही मेरा दर्पण

गाँधी तेरा सत्य ही मेरा दर्पण**********************" हम कोई महात्मा गाँधी थोड़े ही हैं कि समाजसेवा की दुकान खोल रखी है। किसी दूसरे विद्यालय में दाखिला करवा लो अपने बच्चे का.." पिता जी के स्वभाव में अचानक



पथिक ! जो बोया वो पाएगा

पथिक ! जो बोया वो पाएगा------. अंतराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर********************* बारिश में भींगने के कारण पिछले चार-पांच दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ हूँ। स्थिति यह है कि बिस्तरे पर से कुर्सी पर बैठन





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x