छोड़

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ईरानी खानम मुझे जीना सिखा गयी

ईरानी खानम मुझे जीना सिखा गयी पार्ट - 2 डॉ शोभा भारद्वाज इंकलाब ने हमारे सपने तोड़ दिए ईरान में बदअमनी फैल रही थी योरोपियन डाक्टरपहले ही जा चुके थे पाकिस्तानी डाक्टर जाह्दान के रास्ते अपने देश लौट गये भारतीयडाक्टरों के लिए उनके सिफारतखाने ने एक साथ निकालने का इंतजाम किया डाक्टर साहबसबसे बाद में



"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी। अकुलात जिया मन लागत का छड़ राजन काहुँ गए बहरी।

दुर्मिल सवैया ( वर्णिक )शिल्प - आठ सगण, सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा 112 112 112 112 112 112 112 112, दुर्मिल सवैया छंद लघु से शुरू होता है ।छंद मे चारों पंक्तियों में तुकांत होता है"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी।अकुलात



"भोजपुरी गीत" साँझे कोइलरिया बिहाने बोले चिरई जाओ जनि छोड़ी के बखरिया झूले तिरई....... साँझे कोइलरिया बिहाने बोले चिरई

भोजपुरी गीत, मात्रा भार-24, मुखड़ा समान्त- ए चिरई, अंतरा समान्त- क्रमशः खटिया,जनाना, जवानी,"भोजपुरी गीत"साँझे कोइलरिया बिहाने बोले चिरईजाओ जनि छोड़ी के बखरिया झूले तिरई....... साँझे कोइलरिया बिहाने बोले चिरईदेख जुम्मन चाचा के अझुराइल खटियाहोत भिनसारे ऊ उठाई लिहले लठियागैया तुराइल जान हेराइ गईल बछवाखो



"ग़ज़ल" सखा साया पुराना छोड़ आये वसूलों का ठिकाना छोड़ आये

वज़्न - 1222 1222 122, अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन, बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया -ज़माना (आना की बंदिश) रदीफ़ - छोड़ आये"ग़ज़ल" सखा साया पुराना छोड़ आयेवसूलों का ठिकाना छोड़ आयेन जाने कब मिले थे हम पलों सेनजारों को खजाना छोड़ आये।।सुना है गरजता बादल तड़ककरछतों पर धूप खाना छोड़ आये।।बहाना था



"गज़ल" छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहे झूठ के सामने सच छुपाते रहे

वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प



“मुक्तक” तुझे छोड़ न जाऊँ री सैयां न कर लफड़ा डोली में।

शीर्षक ---भाषा/बोली/वाणी/इत्यादि समानार्थक“मुक्तक”तुझे छोड़ न जाऊँ रीसैयां न कर लफड़ा डोली में। क्या रखा है इसझोली में जो नहीं तेरी ठिठोली में। आज के दिन तूँ रोकले आँसू नैन छुपा ले नैनों से-दिल ही दिल की भाषाजाने क्या रखा है बोली में॥-1 हंस भी मोती खाएगा, फिर एक दिन ऐसा आयेगा। कागा अपने रंग मेंआकर,



देश का सबसे बड़ा आंदोलन : भारत छोड़ो

भारत छोड़ो आन्दोलन, द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ८ अगस्त १९४२ को आरम्भ किया गया था|



कसक उठी मेरे मन में पिया - छोड़ो न यार

Lyrics of Kasak Uthi Mere Man Mein Piya from movie Chhodo Na Yaar is composed, sung and written by talented Anand Raj Anand.छोड़ो न यार (Chhodo Na Yaar )कसक उठी मेरे मन में पिया की लिरिक्स (Lyrics Of Kasak Uthi Mere Man Mein Piya )पिया पिया ओ रे पियाकसक उठी मेरे मन में पियामुझे गले लगा लेकसक उठी म



छोड़ो न यार (Chhodo Na Yaar )

'छोडो ना यार' 2007 की एक हिंदी फिल्म है जिसमें जिमी शीरगिल, किम शर्मा, महेक छल, कबीर सदानंद, फरीद अमिरी, अहमद खान, श्रीवाल्लभ व्यास और विनोद नागपाल प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास छोडो ना यार के एक गीत गीत हैं। आनंद राज आनंद ने अपना संगीत बना लिया है। आनंद राज आनंद ने इन गीतों को गाया है, जबकि आ



“गज़ल” सुना वो शहर छोड़ जाने लगा है॥

बह्र- १२२ १२२ १२२ १२२ काफ़िया- आने रदीफ़- लगा है“गज़ल”यहाँ भी वही शोर आने लगा हैजिसे छोड़ आई सताने लगा है किधर जा पड़ूँ बंद कमरे बताओ तराने वहीं कान गाने लगा है॥ सुलाने नयन को न देती निगाहें खुला है फ़लक आ डराने लगा है॥बहाने बनाती बहुत मन मनातीअदा वह दिशा को नचाने लगा है॥ खड़ी



“गीतिका” पिया गए परदेश में छोड़ मुझे ससुराल

“गीतिका”पिया गए परदेश में छोड़ मुझे ससुराल रब जाने किस हाल में होगे उनके भाल देखन में सुंदर लगें मुस्कायें दिल खोलमानों पिय बहुरूपिया नजर चित्त पयमाल॥ कलंगी अस सँवारते तिरछे नैना वाह फिर आएंगे जब पिया लाल करूँगी गाल॥रोज लिखूँ चित पातियाँ घायल विरहन गीत पायल पग लपटा गए



“कता”तुझे छोड़ न जाऊँ री सैयां न कर लफड़ा डोली में।

“कता”तुझे छोड़ न जाऊँ री सैयां न कर लफड़ा डोली में। क्या रखा है इस झोली में जो नहीं तेरी ठिठोली में। आज के दिन तूँ रोक ले आँसू नैन छुपा ले नैनों से- दिल ही दिल की भाषा जाने क्या रखा है बोली में ॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



जनता सोना छोड़ो

दिल्ली के गांधीनगर में पांच वर्षीय गुडिया के साथ हुए दुष्कर्म ने एक बार फिर वहां की जनता को झकझोरा और जनता जुट गयी फिर से प्रदर्शनों की होड़ में .पुलिस ने एफ.आई.आर.दर्ज नहीं की ,२०००/-रूपए दे चुप बैठने को कहा और लगी पुलिस पर हमला करने -परिणाम एक और लड़की दुर्घटना की



satya Sayri

Mai ghar we nikala tha manzil ki tarafMai manzil se bhi dur chala aya huMai laut bhi jau waps to kya hasil haiMai sab kuch chhod kar mazbur chala aya huMuje lagat hai khusiyo ki talash me mai zannat se bahut dur chala aya hu.



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)प्रस्तुत ब्लॉग में मैनें उन ग़ज़लों और रचनाओं को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया है , जिन्हें किसी पत्रिका ,मैग्जीन ,अखबार,संस्करण या किसी वेव साइट में शामिल किया गया है। आशा ही नहीं बल्कि पूरा बिश्वास



मेरी प्रकाशित गज़लें और रचनाएँ : मेरी पोस्ट (जब से मैंने गाँव क्या छोड़ा ) जागरण जंक्शन में प्रकाशित)

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ग़ज़ल ( दिल में दर्द जगाता क्यों हैं )

 ग़ज़ल ( दिल में दर्द जगाता क्यों हैं ) - Sahityapedia





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