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बीजेपी, कांग्रेस गियर अप नो कॉन्फिडेंस मोशन, सदस्यों को जारी करने के लिए समस्या

लोकसभा में शुक्रवार की अविश्वास प्रस्ताव के आगे, बीजेपी ने गुरुवार से शुरू होने वाले सदन में संसद के अपने सभी सदस्यों को दो दिवसीय चाबुक जारी कर दी है।लोकसभा अनुराग ठाकुर में बीजेपी चीफ व्हीप द्वारा चाबुक जारी की गई थी।ठाकुर ने ट्वीट किया, 'मैंने 1 9 जुलाई और 20 जुलाई को सदन में सभी बीजेपी लोकसभा सा



दिल्ली में लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं से छेड़छाड़

दिल्ली का दंगल,दिल्ली का ड्रामा,धरना वाला मुख्यमंत्री जैसे शब्द आजकल सुनने को मिल जाते है मीडिया,नेता,संविधान बिशेषज्ञ सबके अलग अलग विचार हैं परंतु जो मुलभूत विचार है उसको ठेंगा दिखाने की कोशिश जरूर की जा रही यह स्पष्ट है।विशेषज्ञों का यह मानना है की दिल्ली में यह समस्या तब शुरू हुई जब दो अनुभवी



राजनीति की बजाय जनता से जुड़े कांग्रेस

अपने अब तक के इतिहास में कांग्रेस का इतना बुरा दौर शायद ही आया हो. लोकसभा में उसके सदस्यों की संख्या 44 के स्तर तक पहुँचने को तो शर्मनाक कहा ही जा सकता है, मगर उससे भी ज्यादा लज्जास्पद यह बात है कि कांग्रेस वर्तमान के राजनीतिक हालात से अभी भी मुंह चुराती नजर आ रही है. हकीकत में उसे इस बात का अहसास



चुनावी राजनीति और काला धन

हाल ही में अमित शाह द्वारा दिया गया बयान बड़ा चर्चित रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पांच साल मोदी सरकार के लिए काफी नहीं हैं. इससे पहले उन्होंने काले धन को लेकर बयान दिया था कि यह एक 'चुनावी जुमला' था. इन प्रश्नों के सहारे यदि हम राजनीतिक दलों के खर्चों और चंदों की जड़ तक पहुँचने की कोशिश करें तो



आतंकी संगठन का खतरनाक 'वैश्विक' उभार

अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दक्षता के बावजूद यदि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ़्रांस जैसे देश आतंकियों के निशाने पर आ जाएँ तो विश्व के दुसरे विकासशील देशों में भय का माहौल उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है. आतंक के शिकार अब तक तीसरी दुनिया के देश ही हुआ करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस ट्रेंड ने विकसित



लोकतंत्र की बाहें न मरोड़ी जाएँ - Respect the democratic system, hindi article

बुद्धिजीवियों के एक समूह में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को हल्के रूप में पेश करने की प्रतिस्पर्धा सी चल पड़ी है. आप तमाम विचारकों के लेखों को देखिये अथवा सोशल मीडिया पर नए रंगरूटों द्वारा चलाये जा रहे अभियानों पर गौर करें तो पाएंगे कि दिल्ली सरकार जैसी-तैसी, लड़खड़ाती, संभलती राजनीति के लंग



किसानों के साथ हमदर्दी या दिखावा देश के लिए घातक - Sympathy or something else with Indian Farmers

भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी को अगर किसी मुद्दे पर सरदर्द हुआ है तो वह निश्चित रूप से किसानों की बदहाली का ही मसला है. यदि यह बात कही जाए कि किसानों की यह हालत कोई एक दिन में नहीं हुई है तो कोई गलत नहीं होगा, किन्तु इसके साथ यह भी उतना ही सच है कि किसानों के मसले पर अपने एक



दिल्ली चुनाव पर मिथिलेश की कुण्डलिया - Poem on Delhi Election, Politics, BJP, AAP, Congress by Mithilesh

आया चुनाव नजदीक है, बन लोकतंत्र की लाज देखो, सुनो परखो जरा, यह है ज़रूरी काज। यह है ज़रूरी काज, नाच नेता की देखो। छल कपट दंश प्रपंच, वक्त पर तुम भी समझो। कहते 'अनभिज्ञ' सही, दूर हो मोह व माया शांत बुद्धि से वोट दो, दिन तुम्हारा आया। साठ साल तक राज में, ना उभरा दूजा और | कांग्रेस की दुर्गति में, यह





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