दफ़न

भाषा ने जो कहा।

भाषा ने जो कहा।(साहित्यकार और बनारस के गीतो के राजकुमार नामवर सिंह को समर्पित कविता)जो खेल सका दुनियाई भाषा से वह खेल बहुत निराला हैं।किसान का हल, जवान की ताकत, लिखने वाले की कलम, बोलने वाले की आवाज।जब चारो मिलते हैं देश दुनिया के बागों मे महकते सुंदर फूल खिलते हैं।दुनियाँ जिससे ऊपर उठती हैं, यह दफ़न



मुँह मत मोड़ना

अगर दोबारा कहीं मिले चौराहे परमुबारक मुँह मत मोड़ना, आरक्षण से है, रहेगे, आगे भी बढ़ेगे, हमें मिटाने से हम नहीं मिटेगेजहाँ भी दफ़न होगे, आपके रास्ते पे वटवृक्ष बन ऊग आयेगे ....-हरेश परमार





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