सकारात्मक दृष्टिकोण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य में बुद्धि - विवेक विशेष रूप से परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है | मनुष्य अपने विवेक के द्वारा अनेकों कार्य सम्पन्न करता रहता है | इन सबमें सबसे महत्त्वपूर्ण है मनुष्य का दृष्टिकोण , क्योंकि मनुष्य का दृष्टिकोण ही उसके जीवन की दिशाधारा को तय करता है | एक ही घटना को अनेक मनुष्य



शिक्षा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है | शिक्षा प्राप्त किए बिना मनुष्य जीवन के अंधेरों में भटकता रहता है | मानव जीवन की नींव विद्यार्थी जीवन को कहा जा सकता है | यदि उचित शिक्षा ना प्राप्त हो तो मनुष्य को समाज में पिछड़ कर रहना और उपहास , तिरस्कार आदि का भाजन बनना पड़ता है | यदि शिक्षा समय रहत



नींव :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि में आदिकाल से सनातन धर्म विद्यमान है | सनातन धर्म से ही निकलकर अनेकों धर्म / सम्प्रदाय एवं पंथ बनते - बिगड़ते रहे परंतु सनातन धर्म आदिकाल से आज तक अडिग है | यदि सनातन धर्म आज तक अडिग है तो इसका मूल कारण है सनातन के सिद्धांत एवं संस्कार , जिसे सनातन की नींव कहा जाता है | इस संसार में नींव



सुख - दु:ख का रहस्य :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में शत्रु - मित्र , दिन - रात , सकारात्मकता - नकारात्मकता की तरह ही सुख एवं दुख भी आते जाते रहते हैं | यह सारे क्रियाकलाप या रिश्ते - नाते मनुष्य की सोच के ऊपर निर्भर होते हैं | यह मनुष्य स्वयं तय करता है कि वह सुखी रहना चाहता है या दुखी ? क्योंकि इसके मूल में मनुष्य की सोच ही होती है |



विचार शक्ति :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमपिता परमात्मा के द्वारा इस समस्त सृष्टि में चौरासी लाख योनियों का सृजन किया गया , जिसमें सर्वश्रेष्ठ बनकर मानव स्थापित हुआ | मनुष्य यदि सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है तो उस का प्रमुख कारण है मनुष्य की बुद्धि , विवेक एवं विचार करने की शक्ति | मनुष्य यदि अपने विचार शक्ति पर समुचित नियंत्रण कर



मिलन व वियोग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियों में सर्वोत्तम योनि मनुष्य की कही गयी है | अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में मनुष्य यत्र - तत्र भ्रमण करता रहता है इस क्रम में मनुष्य को समय समय पर अनेक प्रकार के अनुभव भी होते रहते हैं | परमात्मा की माया इतनी प्रबल है कि मनुष्य उनकी माया के वशीभूत होकर काम , क्रोध , मोह , प



मनोवृत्ति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में दुर्लभ मनुष्य शरीर पाकर के मनुष्य संसार में सब कुछ प्राप्त करने का प्रयास करता है | मनुष्य भूल जाता है कि देव दुर्लभ शरीर ही सब कुछ प्राप्त करने का साधन है इसी शरीर के भीतर अमृत भरा हुआ है , इसी में विष है तो इसी को पारस एवं कल्पवृक्ष भी कहा गया है | मनुष्य जो चाहे इसी शरीर से प्राप्त



कर्म प्रधान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर द्वारा बनाई हुई सृष्टि कर्म पर ही आधारित है | जो जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है | यह समझने की आवश्यकता है कि मनुष्य के द्वारा किया गया कर्म ही प्रारब्ध बनता है | जिस प्रकार किसान जो बीज खेत में बोता है उसे फसल के रूप में वहीं बाद में काटना पड़ता है | कोई भी मनुष्य अपने किए



पुस्तक का महत्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो एक समाज में रहता है | किसी भी समाज में रहने के लिए मनुष्य को समाज से संबंधित बहुत से विषय का ज्ञान होना चाहिए , और मानव जीवन से संबंधित सभी प्रकार के ज्ञान हमारे महापुरुषों ने पुस्तकों में संकलित किया है | पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं | किसी भी विषय के बारे में जानने



अपमान एवं सम्मान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *इस संसार में संपूर्ण धरा धाम पर मनुष्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है | मानव जीवन में शब्दों का बड़ा प्रभाव पड़ता है | ऐसे ही दो शब्द मानव जीवन की धारा को बदल देते हैं जिसे अपमान एवं सम्मान के नाम से जाना जाता है | मनुष्य मन के अधीन माना जाता है और मान शब्द मन से ही बना है



बुराई/निंदा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *मानव जीवन में कई पड़ाव आते हैं | सम्पूर्ण जीवनकाल कभी एक समान नहीं रहता है | यहाँ यदि मनुष्य की प्रशंसा होती है तो उसकी बुराई भी लोग करते रहते हैं | हालांकि संसार के लगभग सभी धर्म किसी की बुराई करना अनुचित मानते हैं परंतु मनुष्य अपनी आदत से मजबूर होकर ऐसा करता रहता है



भारतवासियों को संविधान दिवस (26 नवम्बर) की हार्दिक बधाई ।

सभी भारतवासियों को संविधान दिवस (26 नवम्बर) की हार्दिक बधाई । भारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। संविधान सभा के निर्मात्री समिति के अध्यक्ष डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने भारत के महान संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया। गणतंत्र



संभवना

इससे फर्क नहीं पड़ता,तुम कितना खाते हो?फर्क इससे भी नहीं पड़ता,कि कितना कमाते हो?फर्क इससे भी नहीं पड़ता, कि कितना कमाया है?फर्क इससे भी नहीं पड़ता,कि क्या क्या गंवाया है?दबाया है कितनों को,कुछ पाने के लिए.जलाया है कितनों को,पहचान बनाने के लिए.फर्क इससे नहीं पड़ता,कि दूजों को



समर्थवान कौन ?? --- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन काल से यदि भारतीय इतिहास दिव्य रहा है तो इसका का कारण है भारतीय साहित्य | हमारे ऋषि मुनियों ने ऐसे - ऐसे साहित्य लिखें जो आम जनमानस के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाते रहे हैं | हमारे सनातन साहित्य मनुष्य को जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हुए दिखाई पड़ते हैं | कविकुल शिरोमणि परमपूज्यपाद गोस्वा



जीवन में नैतिकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जीवन जीने के लिए हमारे महापुरुषों ने मनुष्य के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं | इन नियमों के बिना कोई भी मनुष्य परिवार , समाज व राष्ट्र का सहभागी नहीं कहा जा सकता | जीवन में नियमों का होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बिना नियम के कोई भी परिवार , समाज , संस्था , या देश को नहीं चलाया जा सक



कुत्ते और इन्सान: अजय अमिताभ सुमन

मैंने ये कविता आदमी और कुत्तों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लिखी है. मैंने देखा कि ईश्वर कुत्ते को स्वतन्त्र निर्णय लेने की शक्ति से वंचित रखा हुआ है. जबकि आदमी के पास स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता ह



विश्वास एवं विश्वासघात :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्



कृष्ण: योगी भी भोगी भी:अजय अमिताभ सुमन

मेरे एक मित्र ने कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सोशल मीडिया पे वायरल हो रहे एक मैसेज दिखाया। इसमें भगवान श्रीकृष्ण को काफी नकारात्मक रूप से दर्



सनातन धर्म का दर्शन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के आर्षग्रंथों (गीतादि) में मनुष्य के कल्याण के लिए तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है :- ज्ञानयोग , कर्मयोग एवं भक्तियोग | मनुष्य के लिए कल्याणकारक इन तीनों के अतिरिक्त चौथा कोई मार्ग ही नहीं है | प्रत्येक मनुष्य को अपने कल्याण के लिए इन्हीं तीनों में से किसी एक को चुनना ही पड़ेगा |



मनुष्य एवं सूर्य :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि को सुचारु रूप से संचालित करने में पंचतत्व एवं सूर्य , चन्द्र का प्रमुख योगदान है | जीवों को ऊर्जा सूर्य के माध्यम से प्राप्त होती है | सूर्य की गति के अनुसार ही सुबह , दोपहर एवं संध्या होती है | सनातन धर्म में इन तीनों समय (प्रात:काल , मध्यान्हकाल एवं संध्याकाल ) का व



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