हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १७

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सत्रहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सोलहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*राम दूत*अब आगे:---*अतुलित बल धामा



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १६

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सोलहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पन्द्रहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय कपीश तिहुँ लोक उजागर*अब आगे :



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १५

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पन्द्रहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौदहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय हनुमान ज्ञान गुण सागर*अब आगे



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १४

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौदहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तेरहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय हनुमान*अब आगे:---*ज्ञान गुन सागर



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १३

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *तेरहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*बारहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*चौपाई* का भाव :-अब आगे :--- *जय हनु



हनुमान चालीसा तात्विक अनुशीलन !! भाग १२

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *बारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*ग्यारहवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ११

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *ग्यारहवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*दसवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *हर



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग १०

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *दसवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*नवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"हरहुँ कलेश विकार"* के अन्तर्गत *हरहुँ*अ



हनुमान चालीसा !! तातात्विक अनुशीलन भाग ९

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *आठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सातवें भाग* में आपने पढ़ा :--*"सुमिरौं पवन कुमार"*अब आगे:----*"बल ब



हनुमान चालीसा !! तात्तविक अनुशीलन !! भाग ७

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सातवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छठवें भाग* में आपने पढ़ा :---*"बुद



मृत्यु लोक के प्राणी वर्ष में एक बार धरती पर आते हैं

मृत्यु लोक के प्राणी वर्ष में एक बार धरती पर आते हैं डॉ शोभा भारद्वाज जहाँ भी बौद्ध धर्म ( इनमें सनातन धर्म की परम्पराएं भी मिश्रित हैं )का प्रभाव है वहाँ पितरों को बहुत सम्मान दिया जाता है। भारत की धरती से बौद्ध धर्म मंगोलिया तक पहुँचा था |मंगोल इतिहास में लिखा है कि छठी शताब्दी में भारत से द



पितृ विसर्जन अमावस्या :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में प्रत्येक तिथियों के विशेष देवता बताए गए हैं , अमावस्या तिथि के देवता पितर होते हैं | वर्ष भर की प्रत्येक अमावस्या को पितरों का पूजन श्राद्ध तर्पण आदि किया जाता रहा परंतु आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्व है क्योंकि भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक सोलह



पंचबलि :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अाश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों के प्रति श्रद्धास्वरूप मनाया जाने वाला पितृपक्ष अपनी संपूर्णता की ओर अग्रसर है , इसलिए इस के विधान के विषय में प्रत्येक जनमानस को अवश्य जानना चाहिए | प्रायः लोग पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन करा के पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा समर्पित करते है



श्राद्ध में क्षौरकर्म क्यों आवश्यक :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संसार में अनेकों धर्म हैं जो अपनी कट्टरता के लिए प्रसिद्ध है परंतु इन सब के बीच में सनातन धर्म इतना दिव्य है जिसमें कट्टरता नाम की चीज नहीं है | यह इतना लचीला है कि लोग इसे अपने अनुसार मोड़ लेते हैं | सनातन धर्म में अनेकों व्रत / उपवास एवं उनके नियम बताए गये हैं जिसका पालन करने से मनुष्य को उसका फ



पंच महायज्ञ :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से सनातन धर्म में पाप एवं पुण्य को बहुत महत्त्व दिया गया है | सत्कमों को पुण्यदायक एवं कदाचारण-दुराचरण को पापों का जनक माना जाता रहा है | हमारे धर्मग्रन्थ मानवमात्र को पापकर्मों से बचने की शिक्षा देते हैं ताकि मनुष्य को मरणोपरांत नर्कलोक की यातना न भुगतना पड़े | कहने का तात्पर्य है कि मनुष्य



हव्य एवं कव्य :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार को कर्म प्रधान कहा गया है | जो जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है यहां तक कि मृत्यु के बाद कर्म की भूमिका के कारण ही जीव को अनेक गतियां प्राप्त होती है | अपने कर्म के अनुसार मृत्यु के उपरांत कोई देवता , कोई पितर , कोई प्रेत , कोई हाथी / चींटी या वृक्ष आदि बन जाता है | ऐसे म



मातृ नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आश्विन मास का कृष्ण पक्ष पितरों के लिए समर्पित है | श्रद्धा से अपने पूर्वजों को याद करने एवं उनका तर्पण आदि करने के कारण इसको श्राद्ध पक्ष कहा जाता है | जिस प्रकार सनातन धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं के लिए विशेष दिन निश्चित किया गया है उसी प्रकार अपने पितरों के लिए भी अाश्विन कृष्ण पक्ष को विशेष द



भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में जल का बहुत बड़ा महत्व है | बिना जल के जीवन की संकल्पना भी नहीं की जा सकती | जिस प्रकार जीवन में जल का महत्व है उसी प्रकार बारह महीनों में भाद्रपद मास का भी बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि जल वर्षा का मुख्य समय भाद्रपद मास ही है | वर्ष की बारह महीनों में यदि भाद्रपद मास में जल वर्षा न हो तो



संतान सप्तमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत एवं हमारी भारतीय संस्कृति इतनी दिव्य है जिसका वर्णन कर पाना असंभव है | हमारे पूर्वज महापुरुषों ने मानव मात्र के कल्याण के लिए इतने नियम एवं विधान बता दिए हैं जिसे करने के बाद मनुष्य को और कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं हैं | जीवन के प्रत्येक अंग , जीवन



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x