अभिलाष

जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे?सब कहते तुम व्याप्त मही हो,पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो?नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ,इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि को तुम रचते हो।कहते कण कण में बसते हो,फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ?सक्त हुआ मन निरासक्त पे,अभिव



भक्ति स्वतंत्र सकल गुन खानी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में भक्ति का बहुत बड़ा महत्व है | भक्ति क्या है ? इसका विश्लेषण हमारे शास्त्रों में बहुत ही विधिवत किया गया है | वैसे तो भक्ति नौ पिरकार की कही गयी है परंतु मुख्यत: भक्ति दो प्रकार की बताई गई हैं :- साध्य भक्ति एवं साधन भक्ति | साध्य भक्ति क्या है ? इसके व



उत्पन्ना एकादशी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों व्रत उपवास बताए गए है जो मनुष्य को भौतिकता से कुछ क्षण के लिए उबार कर सात्त्विकता की ओर अग्रसर करते हैं | अपनी संस्कृति एवं संस्कार को.जानने का सशक्त साधन हैं समय समय पर पड़ने वाले हमारे व्रत एवं उपवास | वैसे तो सनातन धर्म में व्रत उपवासों की वृहद श्रृंखला है परंतु कुछ व्पत वि



अन्नदाताओं का मसला है।

अन्नदाताओं का मसला है। कानून घिर गया।ठंड़ीयो से खेलेंगे, दिल्ली बॉर्डर को घेरेंगे।कोरोना को डंडा-लाठियों से किसान पिटेंगे।दिल्ली में घुसने की देरी है, अब किसानों की बारी है।काला कानून वापस लेने की तैयारी है। जय किसान।जिसको आना है बॉर्डर आओ, बुराड़ी को न जाना है।कोरोना मर गया। दिल्ली में फस गया।कोरोना



कर्तिक पूर्णिमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धरा धाम पर प्रतिष्ठित होने वाला एकमात्र धर्म सनातन धर्म मानव मात्र का धर्म है क्योंकि सनातन धर्म ही ऐसा दिव्य है जो मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हुए एक दूसरे को पर्व त्योहारों के माध्यम से समीप लाने का कार्य करता है | सनातन धर्म में वर्ष के प्रत्येक माह में कुछ ना कुछ पर्व ऐसे मन



तुलसी विवाह एवं पंचकोसी परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक कार्य शुभ कर्म करके तब प्रारंभ करने की परंपरा रही है | विगत चार महीनों से सभी शुभ कार्य चातुर्मास्य के कारण बंद पड़े थे , आज देवोत्थानी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के जागृत होने पर सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे | शुभ कार्य प्रारंभ होने से पहले मनुष्य के द्वारा कुछ अ



देवोत्थानी एकादशी :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की प्रत्येक मान्यता स्वयं में गौरवशाली है | सृष्टि का संयोजन एवं इसकी गतिशीलता यद्यपि ईश्वर के हाथों में है परंतु मानव मात्र की सहायता के लिए हमारे विद्वानों ने वर्ष , मास एवं दिन , बारह राशियों , २७ नक्षत्रों एवं सूर्य चंद्रमा के आधार पर काल विभाग किया है | समस्त संसार को प्राण एवं ऊर्ज



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६५

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *विश्राम - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौंसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६४

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *चौसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*तिरसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६३

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *तिरसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*बासठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*पवन तनय संकट हरण म



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ६२

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *बासठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*इकसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*तुलसीदास सदा हरि चे



हनुमान चालीसा (तात्त्विक अनुशीलन) भाग ६१

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *इकसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*साठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जो य पढ़े हनुमान चाल



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ६०

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *साठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*उनसठवें भाग* में आपने पढ़ा :--*यह सत बार पाठ कर जोई



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ५९

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *उनसठवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*अट्ठावनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय जय जय हनुमान ग



हनुमान चालीसा (तात्विक अनुशीलन) भाग ५८

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *अट्ठावनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*सत्तावनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*जय जय जय हनुमा



हनुमान चालीसा !(तात्विक अनुशीलन) भाग ५७

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *सत्तावनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*छप्पनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*संकट कटै मिटै सब प



योगी किसे कहते हैं

*सनातन धर्म में साधक की कई श्रेणियाँ कही गयी हैं इसमें सर्वश्रेष्ठ श्रेणी है योगी की ! योगी शब्द बहुत ही सम्माननीय है | योगी कौन होता है ? इस पर विचार करना परम आवश्यक है | योगी को समझने के लिए सर्वप्रथम योग को जानने का प्रयास करना चाहिए कि आखिर योग क्या है जिसे धारण करके एक साधारण मनुष्य योगी बनता ह



शरणागति का भाव

*इस संसार में मनुष्य अपना जीवन यापन करने के लिए अनेकानेक उपाय करता है जिससे कि उसका जीवन सुखमय व्यतीत हो सके | जीवन इतना जटिल है कि इसे समझ पाना सरल नहीं है | मनुष्य का जन्म ईश्वर की अनुकम्पा से हुआ है अत: मनुष्य को सदैव ईश्वर के अनुकूल रहते हुए उनकी शरण प्पाप्त करने का प्रयास करते रहना चाहिए | इसी



हनुमान चालीसी !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५६

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *छप्पनवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*पचपनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*और देवता चित्त ना ध



हनुमान चालीसा !! तात्विक अनुशीलन !! भाग ५५

🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 ‼️ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼️ 🟣 *श्री हनुमान चालीसा* 🟣 *!! तात्त्विक अनुशीलन !!* 🩸 *पचपनवनवाँ - भाग* 🩸🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧🏵️💧*गतांक से आगे :--*➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖*चौवनवें भाग* में आपने पढ़ा :--*अंतकाल रघुबर पुर जाई



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