संध्या विधान :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमात्मा द्वारा बनाई हुई सृष्टि आदिकाल से गतिशील रही है | गति में निरंतरता बनाए रखने के लिए इस संसार की प्रत्येक वस्तु कहीं न कहीं से नवीन शक्तियां प्राप्त करती रहती है | इस संसार में चाहे सजीव वस्तु हो या निर्जीव सबको अपनी गतिशीलता बनाए रखने के लिए आहार की आवश्यकता होती है | किसी भी जीव को अपनी गत



श्रेष्ठता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि का सृजन करने वाले अखिलनियंता , अखिल ब्रम्हांड नायक , पारब्रह्म परमेश्वर , जिसकी सत्ता में चराचर जगत पल रहा है ! ऐसे कृपालु / दयालु परमात्मा को मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न नामों से जानता है | वेदों में कहा गया है :- "एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति" | वही ब्रह्म जहां जैसी आवश्यकता पड़त



भक्त और भगवान :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर भक्त और भगवान का पावन नाता आदिकाल से बनता चला आया है | अपने आराध्य को रिझाने के लिए भक्त जहां भजन कीर्तन एवं जब तथा आराधना करते रहे हैं वहीं ऐसे भी भक्तों की संख्या कम नहीं रही है जो भगवान की भक्ति में मगन होकर के नृत्य भी करते रहे हैं | भगवान को रिझाने की अनेक साधनों में एक साधन भगवा



जब कभी लगे तुम हार गए..अब कुछ नहीं हो सकता तो ये 9 लाइनें पढ लेना जिंदगी बदल जाएगी

आज हम आपके लिए लेकर आया हैं कुछ दमदार लाइनें, जिन्हें पढ़ने के बाद आपके अंदर की आग भड़क उठेगी आपका हौसला बुलंद हो जाएगा और आप कुछ भी करने के लिए तैयार होंगे ये लाइनें आपके मोटिवेशन को दुगना कर देंगी। इसीलिए दोस्तों एक बार पूरी लाइनें जरूर पढ़िएगा:-1. रख हौंसला वो मंजर भी



इस गुफा में होते हैं भगवान गणेश के कटे सिर के दर्शन… जो यहां गया उसने कभी गरीबी नहीं देखी

भगवान गणेश के भक्तों के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा आस्था का अद्भुत केंद्र है। यह गुफा पहाड़ी के करीब 90 फीट अंदर है। यह उत्तराखंड के कुमाऊं में अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी। की दूरी तय करके पहाड़ी के बीच बसे गंगोलीहाट कस्बे में है। पा



खुदाई में मिला 2000 साल पुराना 4 फुट का शिवलिंग, जिससे आजतक आ रही है तुलसी की खुशबू

ऐसी बहुत सी ऐतिहासिक चीजें हैं जो आज भी इस जमीन में दफन है और हमें हमारी पुरानी सभ्यता और उनसे जुड़े किस्से-कहानियों की याद दिलाती है।अक्सर पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई के दौरान मिली चीजों को देखकर हमारे होश उड़ जाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही हुआ यहां के सिरपुर में हुई खुदाई से पुरातत्व विशेषज



इन राशियों का बुरा समय हुआ दूर, शनि की साढ़ेसाती हुई खत्म, जीवन में खुशियों की आएगी बहार

सभी ग्रहों में शनि ग्रह को सबसे पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है यदि किसी व्यक्ति की राशि में शनि ग्रह बुरी स्थिति में हो तो व्यक्ति को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है ज्योतिष में भी शनि ग्रह को बुरा ग्रह माना गया है अपनी राशि में शनि के बुरे प्रभाव को दूर करने क



गुरू तेग बहादर हिंद दी चादर

जब इस देश पर औरंगजेब का शासन था तब वह कश्मीरी पंडितों तथा हिंदुओ पर बहुत अत्याचार कर रहा था उनका धर्म संकट में था वह उन्हें जबरन मुसलमान बना रहा था उसके जुलम से तंग आकर यह सभी लोग सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के पास सहायता के लिए पहुंचे तब उन्होंने इनसे कहा आप सभी लोग घबराए नहीं



भारत के 12 सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थल | India’s 12 best tourist places in Hindi

India’s 12 best tourist places in Hindiभारत अपनी संस्‍कृति में विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए हमेशा से ही दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। जहां गोवा जैसे राज्‍य इसकी समुद्र तटीय सुंदरता के लिए जाने जाते हैं, वहीं केरल और कश्‍मीर प्राकृतिक सुंदरत



यमुना पर जमी सफ़ेद झाग की परत बोल रही है कि दिल्ली की केवल हवा ही नहीं, पानी भी ज़हरीला है

भारत यानि हमारा अपना प्यारा देश जहां नदियों को पवित्र मानकर देवी के रूप में पूजा जाता है. फिर चाहे वो गंगा नदी हो, जमुना जी हो, सरस्वती या कोई अन्य नदी हो, हर नदी की अपनी महत्ता है और लोग अपनी-अपनी मान्यता के अनुसार उनको पूजते हैं. मगर एक वो ज़माना था जब इन नदियों का पानी



एकादशी माहात्म्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनाये जाने वाले सभी पर्व एवं त्यौहार ही सनातन धर्म की दिव्यता का द्योतक हैं | भारत इतना विशाल देश है यहाँ अनेकों धर्म सम्प्रदाय के लोग रहते हैं | यहाँ वर्ष भर प्रतिदिन कोई न कोई पर्व , व्रत एवं त्यौहार मनाये ही जाते रहते है | सनातन धर्म में व्रत एवं त्यौहारों की एक लम्बी सूची है | इन



देवोत्थानी एकादशी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की प्रत्येक मान्यताओं के तरह चातुर्मास्य व्रत का बहुत बड़ा महत्व है | भगवान सूर्य के मिथुन राशि में आने पर चातुर्मास्य प्रारंभ होता है | यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है | जिसे हरिशयना एकादशी के नाम से जाना जाता है | आज के दिन सृष्टि के पालन कर्ता भगवान श्री हरि विष्णु चा



साधना :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारत देश को महान बनाने में सनातन धर्म का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | सनातन धर्म के अनुयायी ऋषियों / महर्षियों एवं साधकों ने अनन्तकाल तक कठोर साधना करके मानवमात्र को नये - नये आविष्कार करके दिये | मनुष्य को कुछ भी प्राप्त करने के लिए साधना करनी ही पड़ती है | सनातन में बताये गये चार पुरुषार्थ धर्म , अ



Common Sense

!! Use your common sense to know the truth!!हमे पढाया गया...👇👇“रघुपति राघव राजाराम,ईश्वर अल्लाह तेरो नाम”लेकिन असल मे ऋषियों ने लिखा था की....👇👇 “रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम”लोगों को समझना चाहिए कि,जब ये बोल लिखा गया था,तब ईस्लाम का अस्तित्व ही नहीं था,“



भईया दूज :*----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*कार्तिक माह में मनाए जाने वाले पंचपर्वों में पांचवा दिन होता है यम द्वितीया का , जिसे भैया दूज के नाम से जाना जाता है | धन्वंतरि जयंती से प्रारंभ होकर की भैया दूज तक ५ दिन तक लगातार मनाया जाने वाला पंच पर्व भैया दूज के साथ ही संपन्न हो जाएगा | भाई बहन के प्यार , स्नेह का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत करन



घाट को साफ करने में जी जान से जुटे हैं मुस्लिम समाज के लोग, छठ मैया के सच्चे भक्तों को सलाम

कहते हैं कि सियासत भले ही सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक सौहार्द की बात को न समझे लेकिन लोक आस्था के महापर्व छठ की छटा ऐसी है, जहां सिर्फ और सिर्फ सामाजिक सद्भाव और समरसता का ही दृश्य दिख रहा है. जी हां, मुजफ्फरपुर के छठ घाटों की सफाई में जुटे मुस्लिम समाज के युवा वैसे लोग



अन्नकूट (गोवर्धनपूजा) :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारतीय पर्वों की एक प्रधानता रही है कि उसमें प्रकृति का समावेश अवश्य रहता है | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे सनातन धर्म के त्यौहार अपना अमिट प्रभाव डालते हैं | फसल के घर आने की खुशी में जहाँ दीपावली मनाई जाती है ! वहीं दूसरे दिन मनाया जाता है "अन्नकूट" | जैसा कि नाम से ही परिभाषित हो रहा है



धनवंतरि जयंती :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म वैसे तो समय-समय पर पर्व एवं त्यौहार मनाए जाते रहते हैं , परंतु कार्तिक मास में पांच त्योहार एक साथ उपस्थित होकर के पंच पर्व या पांच दिवसीय महोत्सव मनाने का दिव्य अवसर प्रदान करते हैै | आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन से प्रारंभ होकर के शुक्ल पक्ष की द्वितीया का पर्वों का



दिवाली पर हर बार नई मूर्तियां लानी चाहिए या नहीं, जानिए यहाँ

आप सभी को बता दें कि दिवाली का इंतज़ार सभी को है और सभी दिवाली मनाने के लिए तैयारी में जुटे हुए हैं. ऐसे में इन दिनों कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि ‘क्या हर दीपावली नई लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां खरीदना चाहिए..?’ ऐसे में अगर आपके पास भी इसका जवाब नहीं है तो आइए हम बतात



बिहार में क्यों मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व, क्या है इसका इतिहास?

बिहार में क्यों मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व, क्या है इसका इतिहास- भारत के प्रमुख भौगोलिक और सांस्कृतिक त्योहारों (लोक त्योहारों) में से एक है छठ पूजा। इसकी मान्यता वैदिक काल से ही है, इसीलिए यह प्राचीन परंपराओं का धनी पर्व है। अगर आप भी इस त्यौहार के बारे में जानना चाहत



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