धर्मेंद्रराजमंगल

कविता - आ लिपट गले

चप्पा चप्पा हर सडक सडककरता मेरा दिल धडक धडकतुझसे मिलने की चाहत मेंन रहता दिल मेरा राहत मेंहै तू गई कहाँ मेरी बंजारनआ लिपट गले जा मनहारन. तेरी झीनी उस खुशबू मेंखोता रहता क्यों मजनू मैंलाली गुलाब सी होंठ खूबनरमाई जैसे हो घास दूबअब लौट के आजा मनभावनआ गले लिपट जा मनहारन. उन सख्त गर्म दोपहरी मेंउन नर्म अ



कहानी - मौत की झांकी

शाम का समय था.चौराहे पर जाम लगा हुआ था. एक एम्बुलेंसलगातार सायरन दिए जा रही थी लेकिन उसे जगह देना कोई नही चाहता था. क्योंकि वहां पर भगवान राम की झांकी जा रही थी. येआयोजन शहर की एक सांकृतिक संस्था ने आयोजित किया था. कईनेतागण भी उसमे मौजूद थे. रईसों की तो गिनती ही नही क



भागी हुई लड़की

सुबहका समय था. राजू सोया पड़ा था कि तभी किसी नेउसे झकझोर कर उठाया. राजू आँखे मलते हुए उठ गया. सामने मामी खड़ी थीं. मामी ने हांफते हुए कहा,“तुम्हे पता है रात छबीली घूरे के साले के साथ भाग गयी.” राजू ने आँखे मिचमिचा कर देखा कि कहीं वो सपना तो नही देख रहा है. राजू मामी से बोला, “किसने बताया आपको?”मामी



कहानी - दूसरी शादी

संतोष हरफनमौला और शौकीन किस्म का इंसान था। पिता सरकारी मास्टर थे, जिनके पैसों से वह आराम से अपने शौक पूरे करता रहता था। उसके बाकी के दो बडे भाई भी थे लेकिन वे अपने खर्चे अपनी कमाई से ही करते थे। उन दोनों का शौक संतोष की तरह नही था। लेकिन पिता की सरकारी नौकरी कब तक चलती.



कैसे इतनी हिम्मत हो जाती है किसी महिला को छेड़ने की. ?

अभी कुछ दिन पहले ही बैंगलूरू की छेडछाड वाली घटना देखी। दो लडके स्कूटर पर एक लडकी का पीछा करते हुये उसके पास आये और उनमें से एक ने स्कूटर से उतर कर उस लडकी को छेडना शुरू कर दिया। जब उस लडकी के सामने उसकी पेश न ग





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