धुन

मैं का भाव

अपनापन, भाईचारा'मैं' के भाव ने सब को माराइस में अपनेपन की छाँव नहीं'मैं' हूँ, 'हम' का भाव नहीं 'मैं' में स्वार्थ हरा-भरा लालच में लिपटा, अपने निमित्त 'मैं' से आपस का भाईचारा मराऊपर उठने की मनसा'हम' का मनोभाव नहीं 'मैं' के उद्धार करण मेंऔरों की बड़ती से मन झुलसा



न भूलो उनको।

न भूलो उनको।गैरों की तरह जब अपने देखने लगे।सच मे अपने और भी प्यारे लगने लगे।ता उम्र जिंदगी बिता दी हमने सबके लिए।सबने बस एक सलीका दिया, ज़िंदगी जीने के लिए।अब हाथो का हुनर, मशीने छीनने सी लगी।अब शोर कानो को, धुन सी लगने लगी।जिए हम भी थे, कभी शांती को जवानी की तरह।अब वह भी मुँह चुराने लगी, एक मोरनी की



राग : शुभ्रा

राग : शुभ्रा समूचे विश्व में मनाए जानेवाले भिन्न भिन्न त्योहार मानव की उत्सव मनाने की सहज प्रवृत्ति से जुड़े हैं और मौसम से, प्रकृति से इनका एक अटूट रिश्ता है। गणेशोत्सव के आख़िरी दिन गणेशजी को विदा देते समय , और कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कृष्ण का स्वागत करते समय ब



एक प्रतिभाशाली व्यक्ति जिसने दुनिया को बदल दिया

बहुत कम लोग इनको जान पाते है कम से कम जो मेरी तरह कंप्यूटर विज्ञान पढ़ रहे है | इस व्यक्ति की प्रतिभा को हम माप नहीं सकते | आज अगर आप फ़ोन या कंप्यूटर जैसे उपकरणों का प्रयोग कर पा रहे है तो इसमे सबसे बड़ा योग- दान डेनिस रिटची का है |



वर्तमान मे मेरा कम्प्यूटर

वर्तमान मे मेरा कम्प्यूटर कुछ इस तरह का दिखता है |





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