दिल

"गज़ल" छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहे झूठ के सामने सच छुपाते रहे

वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प



"गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलो वक्त का वक्त है पल निभाएँ चलो

मापनी--212 212 212 212, समान्त— बसाएँ (आएँ स्वर) पदांत --- चलो "गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलोवक्त का वक्त है पल निभाएँ चलोक्या पता आप को आदमी कब मिलेलो मिला आन दिन खिलखिलाएँ चलो।।जा रहे आज चौकठ औ घर छोड़ क्योंखोल खिड़की परत गुनगुनाएँ चलो।।शख्स वो मुड़ रहा देखता द्वार कोगाँव छूटा कहाँ पुर बसाएँ



निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलतीकुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैंहर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलतीदेखा था जिसे मैंने कोई और था शायदवो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलतीहँसते हुए चेहरो



फैज़ अहमद फैज़ की दिल-छूती 15 शायरियां - 15 Best soulful Shayri of Faiz Ahmed Faiz in Hindi

फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmed Faiz) की शायरी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया | आज उनकी मौत को तीन दशक से अधिक हो चूका है पर लोगों के दिल में वो ज़िन्दा है | "बोल, कि लब आजाद हैं तेरे बोल, जबां अब तक है तेरी" - फैज़ के कलम से निकली ऐसी ना जाने कितनी ही शायरी लोगों को जीवन



दिल का चुराना

सुना है यूँ तो हुआ करती है दुनियां में दिल की चोरी ना तो दिल चोरी हुआ ना हम से दिल चुराया ही गया. (आलिम) आसमां में जो लिखे जाते जोड़े, इस जहाँ में यूँ क्यों तन्हा होते. (आलिम)



"गीतिका" उग आई ऋतु है चाहत की मत लाना दिल में शामत की

मापनी- 22 22 22 22, समान्त- अत, पदांत- की"गीतिका"उग आई ऋतु है चाहत कीमत लाना दिल में शामत कीदेखो कितनी सुंदर गलियाँ खुश्बू देती हैं राहत की।। जब कोई लगता दीवाना तब मन होता है बसाहत की।।दो दिल का मिलना खेल नहींपढ़ना लिखना है कहावत की।।माना की दिल तो मजनू हैपर मत चल डगर गुनाहत की।।देखो कलियाँ चंचल ह



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



दिल चाहे - शिखा

Dil chahe yu hi teri baaho mai rahena ,Dhadkan ki tarah dil mai basa lu tujko.Dil chahe yu hi teri palko pe rahena,Khwab ki tarah palko pe saja lu tujko.Dil chahe yu hi teri saanso mai rahena,Phoolo ki tarah saanso mai mila lu tujko.Dil chahe yu hi teri bagiya mai rahena,Khushbu ki tarah muj mai mi



दिलीप कुमार को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया

छाती में संक्रमणऔर सांस लेनेमें कठिनाई केबाद वेटेरन अभिनेता दिलीप कुमारको अस्पताल मेंभर्ती कराया गयाहै। 95 वर्षीय दिलीप कुमारके आधिकारिक ट्विटरअकाउंट ने रिपोर्टकी पुष्टि की। "साब को मुंबईके लीलावती अस्पतालमें भर्ती करायागया है क



पास मेरे बैठो ना तुम - शिखा

Paas mere baitho na tum,bahut si baate karni hai,dil ke halat batane hai,Kai sapne sajane hai.Kuchh teri sunni hai, Kuchh meri karni hai,Na sata tu muje itna ,Do pal to muskura aa.Sirf tujse muhobbat hai,fir kyu muje ajmate ho.Tuje hi yaad karti hu,Tujhi se pyar karti hu.Meri zindagi tujse hai,Meri



तुरंत आवश्यकता है !!!

(1) एक इलेक्ट्रिशियन : जो ऐसे दो व्यक्तियों के बीचकनेक्शन कर सके, जिनकी आपस में बातचीत बन्द हो ।(2) एक ऑप्टिशियन : जो लोगों की दृष्टि के साथदृष्टिकोण में भी सुधार कर सके ।(3) एक चित्रकार : जो हर व्यक्ति के चेहरे परमुस्कान की रेखा खींच स



हमारे सैनिक नहीं है जानवर, बंद करो हमारे सैनिको का दुरूपयोग, ये सैनिको पर अत्याचार है

सेकुलरों वामपंथियों को ये तस्वीर बहुत ही अच्छी लग सकती है, और सेक्युलर तत्व इस तस्वीर को फैलाकर बहुत ही ज्यादा खुश हो रहे है, पर ये तस्वीर को देख हमारा खून खौल रहा हैये तस्वीर अत्याचार को दर्शा रही है, और हमारे सैनिक पर अत्याचार हो रहा है, ये तस्वीर कूल बिलकुल नहीं है ये



सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है - पियूष मिश्रा

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में हैवक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँहम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में हैसरफ़रोशी की...देख फाँसी का ये फंदा ख़ौफ़ से है काँपताउफ़्फ़ कि जल्लादों की हालत भी बड़ी मुश्किल में हैनर्म स्याही से लिखे शेरों की बातें चुक गईंइ



दिल और दिमाग

दिल और दिमाग की जंग में दिल का साथ देना चाहिए, शायद ज्यादातर लोग इससे सहमत होंगे, किन्तु गीता में इसके विपरीत ही कहा गया है. जब व्यक्ति दिल से सोचता है तो उसमे मोह होता है, अपने और अपनों के प्रति , वो मोह ही मनुष्य को धर्म के



दिल उनके हवाले

ना खुल जाए राज, हमको हमसफ़र बनाया है, छिपाने बेवफाई अपनी यूँ हमसे दिल लगाया है. खूबसूरत है जो वो क्योंकर न बेवफा न होंगे, हो दुनियां दीवानी जिनकी वो ही तो बेवफा होंगे.होते हम भी खूबसूरत तो शायद बेवफा होते, बदसूरती ने ही हमको वफ़ा



इश्क़ और दोस्ती मेरी - ishka aur dosti meri

इश्क़ और दोस्ती मेरीज़िन्दगी के दो जहाँ है, इश्क़ मेरा रूह तोदोस्ती मेरा ईमान है, इश्क़ पे कर दूँ फ़िदाअपनी सारी ज़िन्दगी, मगर दोस्ती पे तोमेरा इश्क़ भी कुर्बान है ।ishka aur dosti meri jaindagi ke do jaha haiishka mera ruh to dosti mera iman haiishka pe kar du faida apni sari jindagimagar dosti pe t



किस हद तक जाना - kis had tak jana

किस हद तक जाना है ये कौन जानता है,किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है । दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो,किस रोज़ बिछड जाना है ये कौन जानता है ।kis had tak jana hai ye kaun janta haikis manjil ko pana hai ye kaun janta hai । dosti ke do pal ji bhar ke ji lokis roz bichad jana hai ye kaun janta hai ।



दोस्त समझते हो तो - dost samjhte ho to

दोस्त समझते हो तो दोस्ती निभाते रहना,हमें भी याद करना खुद भी याद आते रहना,हमारी तो हर ख़ुशी दोस्तों से ही है,हम खुश रहें या ना आप यूँ ही मुस्कुराते रहना।dost samjhte ho to dosti nibhate rahnahamen bhi yaad karna khud bhi yaad aate rahnahamari to har khushi doston se hi haihum khush rahen ya na aap yu



हमारी सच्चाई हमारी दोस्ती - hamari sachchai hamari dosti

दुनियादारी में हम थोड़े कच्चे हैं,पर दोस्ती के मामले में सच्चे हैं,हमारी सच्चाई बस इस बात पर कायम है,कि हमारे दोस्त हमसे भी अच्छे हैं।duniyadari men ham thode kachche hainpar dosti ke mamle men sachche hainhamari sachchai bas is baat par kayam haiki hamare dost humse bhi achhe hain।



उल्फत के फ़साने - ulfat ke fasane

होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते,जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते,दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द,कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते।honthon pe ulfat ke fasaane nahi aatejo beet gaee fir wo zamane nahi aatedost hi hote hain doston ke hamdardkoi farishte yaha sath nibhane nahin aate।



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